बंगाल में 'कट मनी' विवाद फिर गरमाया: तृणमूल नेताओं पर वसूली के आरोप, कई जगह लाभार्थियों को लौटाई जा रही रकम

कोलकाता|15 घंटे पहले
तृणमूल नेताओं पर वसूली के आरोप, कई जगह लाभार्थियों को लौटाई जा रही रकम

पश्चिम बंगाल में एक बार फिर कथित 'कट मनी' का मुद्दा राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गया है। राज्य के विभिन्न जिलों से ऐसे कई वीडियो सामने आए हैं। जिनमें तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के स्थानीय नेता ग्रामीणों और लाभार्थियों को नकद राशि लौटाते दिखाई दे रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि यह वही रकम है, जो सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर कथित तौर पर लाभार्थियों से वसूली गई थी। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इन वीडियो ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दो वीडियो साझा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि दक्षिण 24 परगना जिले के नामखाना क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों से घर दिलाने के नाम पर प्रति व्यक्ति पांच हजार रुपये की वसूली की गई थी। उनके अनुसार, अब स्थानीय टीएमसी नेता और ग्राम पंचायत सदस्य ग्रामीणों को यह राशि वापस कर रहे हैं। हालांकि संबंधित पंचायत सदस्य माधव चंद्र लाया ने दावा किया कि उन्होंने बिना किसी दबाव के स्वयं ग्रामीणों को पैसे लौटाए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उस समय पार्टी और कुछ स्थानीय प्रभावशाली लोगों के दबाव में यह धनराशि ली गई थी।

सरकारी योजनाओं में अनियमितताओं के आरोप तेज

कट मनी विवाद के बीच राज्य के कई जिलों से सरकारी योजनाओं में कथित अनियमितताओं के मामले भी सामने आ रहे हैं। मुर्शिदाबाद जिले के नूतनग्राम में बांग्लार आवास योजना के तहत रिश्वत लेने के आरोप में ग्राम उपप्रधान सिराजुल शेख को पुलिस ने अरेस्ट किया है। ग्रामीणों का आरोप है कि आवास योजना का लाभ दिलाने के नाम पर लोगों से पांच हजार से लेकर पंद्रह हजार रुपये तक वसूले जाते थे। शिकायतों के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। उधर, नादिया जिले के धुबुलिया क्षेत्र में महिलाओं के लिए संचालित लक्ष्मीर भंडार योजना में भी गंभीर गड़बड़ी सामने आई है। जांच के दौरान लाभार्थियों की सूची में 173 पुरुषों के नाम पाए गए। यह योजना केवल महिलाओं के लिए संचालित की जाती है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इन खातों के माध्यम से कई महीनों तक राशि भी निकाली गई। जांच पूरी होने के बाद संबंधित नाम सूची से हटा दिए गए हैं। मामले की विस्तृत जांच जारी है।

जांच आयोग गठित, शिकायतों के लिए खुला मंच

सरकारी योजनाओं में कथित भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं और कट मनी के आरोपों को देखते हुए राज्य सरकार ने हाल ही में एक संस्थागत जांच आयोग का गठन किया है। सेवानिवृत्त न्यायाधीश विश्वजीत बसु की अध्यक्षता में गठित यह आयोग सरकारी योजनाओं से जुड़े मामलों की जांच करेगा। सरकार का कहना है कि आयोग के माध्यम से आम नागरिक सीधे अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे। मामलों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाएगी।

'कट मनी' बना फिर राजनीतिक मुद्दा

भाजपा ने एक बार फिर इस मुद्दे को लेकर तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधा है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि पूर्ववर्ती व्यवस्था में ग्रामीणों और लाभार्थियों पर योजनाओं का लाभ पाने के लिए कथित दबाव बनाया जाता था। वहीं टीएमसी ने इन आरोपों से दूरी बनाया है। कहा है कि पार्टी किसी भी प्रकार की अवैध वसूली का समर्थन नहीं करती। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति ने निजी स्तर पर गलत कार्य किया है तो उसकी जवाबदेही स्वयं तय होगी। गौरतलब है कि वर्ष 2019 में भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सार्वजनिक मंच से पार्टी कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर लोगों से ली गई 'कट मनी' वापस करने की सलाह दी थी। इसके बाद राज्य के कई हिस्सों में लाभार्थियों द्वारा पैसे लौटाने की मांग को लेकर आंदोलन भी हुए थे। अब एक बार फिर यह मुद्दा पश्चिम बंगाल की राजनीति में गर्माहट पैदा करता दिखाई दे रहा है।

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