प्रियंका गांधी का केंद्र पर निशाना: सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव सत्ता में बने रहने की साजिश, कहा- विपक्ष के विरोध से लोकतंत्र की हुई जीत

18 अप्रैल 2026
 सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव सत्ता में बने रहने की साजिश, कहा- विपक्ष के विरोध से लोकतंत्र की हुई जीत

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने लोकसभा में सीटें बढ़ाने से जुड़े संविधान संशोधन बिल के गिरने पर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। शनिवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र की बड़ी जीत है। उनके मुताबिक सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण के नाम पर सत्ता में बने रहने की साजिश कर रही थी। जिसे विपक्ष ने मिलकर विफल कर दिया।

शुक्रवार को लोकसभा में सरकार द्वारा लाया गया संविधान का 131वां संशोधन बिल पारित नहीं हो सका। यह प्रस्ताव 54 वोटों से गिर गया। इस बिल के तहत संसद की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान किया गया था। सरकार इसे ऐतिहासिक कदम बता रही थी। विपक्ष ने इसके पीछे राजनीतिक मंशा होने का आरोप लगाया।

‘पीएम के बयान से हम चौंक गए’

प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री के भाषण पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कई बार संकेत दिया कि जो इस प्रस्ताव से सहमत नहीं होंगे। वे संसद में बैठने के योग्य नहीं हैं।

उन्होंने कहा, “हम इस बात से हैरान थे कि आखिर इस बयान के पीछे क्या मंशा थी। यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।”

‘महिलाओं के नाम पर सत्ता बचाने की कोशिश’

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि यह बिल महिलाओं के हित में नहीं हैं। केंद्र सरकार का सत्ता में बने रहने की रणनीति का हिस्सा था। उन्होंने कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया 2029 से पहले संभव नहीं है, फिर भी इसे महिला आरक्षण से जोड़कर पेश किया गया। उनके अनुसार, “सरकार ने महिलाओं के नाम पर एक ऐसा ढांचा तैयार करने की कोशिश की। जिससे उन्हें लंबे समय तक सत्ता में बने रहने का फायदा मिल सके।”

‘विपक्ष को महिला विरोधी साबित करने की कोशिश’

प्रियंका गांधी ने कहा कि सरकार की रणनीति दोहरी थी। यदि बिल पास हो जाता तो इसे अपनी बड़ी उपलब्धि बताया जाता और अगर नहीं होता तो विपक्ष को महिला विरोधी साबित करने की कोशिश की जाती। उन्होंने कहा, “सत्ता पक्ष हमें महिला विरोधी बताकर खुद को मसीहा साबित करना चाहता था। लेकिन यह प्रयास सफल नहीं हुआ।”

विपक्ष के रुख पर जताई संतुष्टि

कांग्रेस सांसद ने विपक्षी दलों के एकजुट रुख की सराहना की। उन्होंने कहा कि सभी विपक्षी नेताओं ने इस प्रस्ताव का विरोध कर यह स्पष्ट कर दिया कि यह कदम महिलाओं के हित में नहीं बल्कि राजनीतिक लाभ के लिए उठाया गया था। उन्होंने कहा, “मैं खुश हूं कि विपक्ष ने मजबूती से इसका विरोध किया। इससे यह साफ हो गया कि लोकतंत्र में अभी भी संतुलन कायम है।”

सरकार के लिए झटका

प्रियंका गांधी ने कहा कि यह परिणाम सरकार के लिए एक बड़ा झटका है। उन्होंने इसे “ब्लैक डे” करार देते हुए कहा कि सत्ता पक्ष को उम्मीद नहीं थी कि बिल इस तरह खारिज हो जाएगा। उनके मुताबिक, यह घटना दर्शाती है कि संसद में बहुमत होने के बावजूद हर प्रस्ताव को पारित नहीं किया जा सकता।

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