तमिलनाडु में सत्ता संग्राम तेज: विजय की सरकार पर सस्पेंस, डीएमके ने विधायकों को चेन्नई में रोका

तमिलनाडु की राजनीति इस समय बेहद गर्म हो चुकी है। सरकार गठन को लेकर राज्य में लगातार सियासी हलचल बढ़ रही है। विजय की पार्टी टीवीके सरकार बनाने के लिए पूरी ताकत लगा रही है, लेकिन अभी भी बहुमत का आंकड़ा उसके लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसी बीच राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने एक बार फिर विजय के दावे को खारिज कर दिया। राज्यपाल ने साफ कहा कि सरकार बनाने का दावा तभी स्वीकार होगा, जब टीवीके 118 विधायकों के समर्थन पत्र लेकर आएगी। इसके बाद तमिलनाडु की राजनीति में जोड़तोड़ और बैठकों का दौर तेज हो गया है।
हालांकि राज्यपाल ने विजय को यह भरोसा भी दिया है कि फिलहाल किसी दूसरी पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित नहीं किया जाएगा। इससे टीवीके को राहत जरूर मिली है, लेकिन बहुमत जुटाने की चुनौती अभी भी बरकरार है। सूत्रों के मुताबिक, टीवीके अब वामपंथी दलों, वीसीके और आईयूएमएल जैसे दलों को साथ लाने की कोशिश में जुटी हुई है। पार्टी लगातार समर्थन बढ़ाने के लिए बैकडोर बातचीत कर रही है।
डीएमके ने विधायकों को चेन्नई में रुकने का आदेश दिया
राजनीतिक संकट के बीच डीएमके ने अपने सभी विधायकों को 10 मई तक चेन्नई में रहने का निर्देश दिया है। पार्टी का कहना है कि आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक फैसला लिया जा सकता है। इसी वजह से सभी विधायकों की मौजूदगी जरूरी है। डीएमके के भीतर लगातार बैठकों का दौर जारी है। पार्टी ने विधायक दल की बैठक में चार बड़े प्रस्ताव भी पास किए। पहले प्रस्ताव में जनता और गठबंधन सहयोगियों का धन्यवाद किया गया। दूसरे प्रस्ताव में मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के नेतृत्व की सराहना की गई। तीसरे प्रस्ताव में स्टालिन को मौजूदा हालात को देखते हुए कोई भी बड़ा राजनीतिक फैसला लेने का अधिकार दिया गया। सबसे ज्यादा चर्चा चौथे प्रस्ताव की हो रही है। इसमें कांग्रेस पर गठबंधन तोड़ने और राजनीतिक विश्वासघात का आरोप लगाया गया। डीएमके ने कहा कि कांग्रेस को गठबंधन के तहत राज्यसभा सीट और विधानसभा सीटें देने के बावजूद उसने अलग रास्ता चुन लिया। इससे दोनों दलों के रिश्तों में तनाव साफ दिखाई दे रहा है।
एआईएडीएमके के विधायक रिसॉर्ट में शिफ्ट
तमिलनाडु में सियासी उठापटक के बीच एआईएडीएमके के 28 विधायकों को पुदुचेरी के एक रिसॉर्ट में शिफ्ट किया गया है। बताया जा रहा है कि ये विधायक वरिष्ठ नेता सीवी शनमुगम के करीबी हैं। इस कदम के बाद राज्य में हॉर्स ट्रेडिंग और राजनीतिक दबाव की चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, टीवीके और एआईएडीएमके के बागी गुट के बीच बातचीत जारी है। उपमुख्यमंत्री पद और मंत्रालयों के बंटवारे को लेकर फॉर्मूला तैयार किया जा रहा है। हालांकि एआईएडीएमके महासचिव एडप्पादी पलानीस्वामी इस गठजोड़ के खिलाफ बताए जा रहे हैं। ऐसे में पार्टी के भीतर भी टकराव की स्थिति बनती दिख रही है।
केरल और असम में भी राजनीतिक हलचल
इधर केरल में भी सरकार गठन को लेकर कांग्रेस के भीतर मंथन जारी है। पार्टी पर्यवेक्षक मुकुल वासनिक और अजय माकन ने सभी 63 विधायकों से मुलाकात की। बैठक में प्रस्ताव पास कर मुख्यमंत्री चुनने का अधिकार कांग्रेस आलाकमान को सौंप दिया गया है। अब सभी की नजर हाईकमान के फैसले पर टिकी हुई है। वहीं असम में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 12 मई को गुवाहाटी के खानापारा में होगा। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होंगे। भाजपा नीत एनडीए ने 102 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। 10 मई को विधायक दल की बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।











