सूरत में शुरू हुआ बैरियर-फ्री सिस्टम: टोल पर नहीं लगेगी अब ब्रेक, बिना रुके कटेगा पैसा

02 मई 2026
टोल पर नहीं लगेगी अब ब्रेक, बिना रुके कटेगा पैसा

भारत में हाईवे यात्रा अब पहले से ज्यादा तेज और आसान होने जा रही है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि साल 2026 के अंत तक देश पूरी तरह बैरियर-फ्री टोल सिस्टम पर शिफ्ट हो जाएगा। इसका मतलब साफ है। अब टोल प्लाजा पर रुकना नहीं पड़ेगा। लंबी लाइनों से छुटकारा मिलेगा। इसी दिशा में पहला बड़ा कदम गुजरात के सूरत में उठाया गया है, जहां देश का पहला बैरियर-फ्री टोल प्लाजा शुरू हो चुका है।

यह नया सिस्टम चौर्यासी टोल प्लाजा पर लागू किया गया है। यह टोल प्लाजा एनएच-48 पर स्थित है। यहां मल्टी लेन फ्री फ्लो तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। अब यहां गाड़ियां बिना रुके गुजर रही हैं। सड़क के ऊपर एक बड़ा फ्रेम लगाया गया है। इसमें हाईटेक कैमरे और सेंसर लगे हैं। यही सिस्टम पूरे टोल कलेक्शन को ऑटोमैटिक तरीके से संभालता है।

कैसे काम करता है बैरियर-फ्री टोल सिस्टम?

यह सिस्टम पूरी तरह डिजिटल और ऑटोमेटेड है। जैसे ही कोई वाहन टोल पॉइंट के पास आता है, सेंसर उसे पहचान लेते हैं। एआई आधारित कैमरे गाड़ी की नंबर प्लेट पढ़ते हैं। साथ ही आरएफआईडी रीडर गाड़ी में लगे फास्टैग को स्कैन करता है। जैसे ही पहचान पूरी होती है, टोल फीस सीधे बैंक खाते से कट जाती है। पूरी प्रक्रिया कुछ सेकंड में हो जाती है। गाड़ी को रुकने की जरूरत नहीं होती।

फास्टैग नहीं तो भी कटेगा चालान

अगर किसी वाहन में फास्टैग नहीं है या वह काम नहीं कर रहा है, तब भी सिस्टम एक्टिव रहता है। कैमरा नंबर प्लेट के जरिए गाड़ी की पहचान करता है। इसके बाद वाहन मालिक को ई-नोटिस भेजा जाता है। इससे टोल चोरी की संभावना भी काफी कम हो जाती है। सिस्टम पूरी तरह ट्रैकिंग और मॉनिटरिंग पर आधारित है।

पुराने टोल प्लाजा से कितना अलग है सिस्टम

अब तक टोल प्लाजा पर बैरियर लगे होते थे। गाड़ियों को रुकना पड़ता था। फास्टैग या कैश से भुगतान होता था। इस कारण लंबी कतारें लग जाती थीं। लेकिन बैरियर-फ्री सिस्टम में कोई रुकावट नहीं है। गाड़ियां 60 से 80 किमी प्रति घंटे की स्पीड से गुजर सकती हैं। इससे ट्रैफिक फ्लो बना रहता है और समय की बचत होती है।

यात्रियों को मिलेंगे कई बड़े फायदे

इस नई तकनीक से सबसे बड़ा फायदा समय की बचत है। लंबे जाम और इंतजार खत्म होगा। ईंधन की खपत भी कम होगी। वाहनों का स्मूद मूवमेंट बना रहेगा।इसके अलावा प्रदूषण भी कम होगा क्योंकि गाड़ियां बार-बार रुकेंगी नहीं। ड्राइविंग एक्सपीरियंस पहले से ज्यादा बेहतर हो जाएगा।

आने वाले समय में पूरे देश में लागू होगा सिस्टम

सरकार का लक्ष्य साफ है। देशभर के सभी टोल प्लाजा को बैरियर-फ्री बनाना है। अगर सूरत मॉडल सफल रहता है, तो इसे तेजी से अन्य हाईवे पर लागू किया जाएगा। यह भारत के ट्रांसपोर्ट सेक्टर में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

हाईवे ट्रैवल होगा और स्मार्ट

यह पहल डिजिटल इंडिया और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में बड़ा कदम है। अब यात्रा सिर्फ तेज नहीं, बल्कि ज्यादा स्मार्ट भी होगी। टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से आम लोगों को सीधा फायदा मिलेगा। आने वाले समय में टोल सिस्टम पूरी तरह ऑटोमेटेड और यूजर-फ्रेंडली हो जाएगा।

नव्य जागरण

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