एक मई से एलपीजी नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी : बुकिंग और डिलीवरी सिस्टम में बदलाव की संभावना, ई-केवाईसी को करना होगा अपडेट

27 अप्रैल 2026
बुकिंग और डिलीवरी सिस्टम में बदलाव की संभावना,  ई-केवाईसी को करना होगा अपडेट

मई का महीना शुरू होने वाला है और इसके साथ ही एलपीजी गैस सिलिंडर से जुड़े नियमों में बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक मई 2026 से गैस बुकिंग, डिलीवरी सिस्टम और कीमतों में कुछ बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है लेकिन तेल मार्केटिंग कंपनियां नए नियमों को लेकर मंथन कर रही हैं। वैश्विक स्तर पर जारी ऊर्जा संकट और मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण एलपीजी सप्लाई पर दबाव बना हुआ है। इसका असर भारत सहित कई देशों पर देखने को मिल रहा है। ऐसे में सरकार और कंपनियां सप्लाई को संतुलित रखने के लिए नई रणनीति तैयार कर रही हैं।

सूत्रों के अनुसार, इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल जैसी कंपनियां एलपीजी सिलिंडर की बुकिंग और डिलीवरी प्रोसेस को अपडेट करने पर विचार कर रही हैं। माना जा रहा है कि मौजूदा सिस्टम में कुछ सख्ती लाई जा सकती है। खासतौर पर बुकिंग के बीच का समय यानी ‘लॉक-इन पीरियड’ बदला जा सकता है। अभी कई जगहों पर यह 25 दिन है, जिसे जरूरत के हिसाब से घटाया या बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा ओटीपी बेस्ड डिलीवरी सिस्टम को स्थायी रूप से लागू किया जा सकता है। इससे फर्जी डिलीवरी और गैस के गलत इस्तेमाल पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

कीमतों में फिर हो सकता है बदलाव

एलपीजी सिलिंडर की कीमतों में भी एक मई से बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है। हाल के महीनों में घरेलू और कमर्शियल दोनों तरह के सिलिंडरों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलिंडर के दाम में करीब 60 रुपए तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलिंडर की कीमतों में एक महीने के भीतर कई बार इजाफा हुआ है। अप्रैल 2026 में मेट्रो शहरों में इनकी कीमतें 196 से 218 रुपए तक बढ़ी थीं। ऐसे में मई में फिर से रेट रिवीजन की संभावना से उपभोक्ता चिंतित हैं।

सरकार का फोकस

सरकार ने साफ किया है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात के बावजूद देश में घरेलू एलपीजी, पीएनजी और सीएनजी की सप्लाई पूरी तरह से जारी है। सप्लाई चेन को मजबूत बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। ऑनलाइन बुकिंग में तेजी आई है और यह लगभग 98 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। वहीं ओटीपी आधारित डिलीवरी सिस्टम भी 90 प्रतिशत से ज्यादा मामलों में लागू हो चुका है। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और सिस्टम ज्यादा सुरक्षित हुआ है।

कमर्शियल सेक्टर के लिए प्राथमिकता तय

कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई में सरकार ने प्राथमिकता तय की है। अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों और जरूरी उद्योगों को पहले गैस उपलब्ध कराई जा रही है। इसमें फार्मा, स्टील, ऑटोमोबाइल और कृषि से जुड़े सेक्टर शामिल हैं। इसके अलावा प्रवासी मजदूरों के लिए छोटे पांच किलो वाले सिलिंडरों की सप्लाई भी बढ़ाई गई है ताकि जरूरतमंद लोगों को राहत मिल सके।

मौजूदा नियम और ई-केवाईसी की अनिवार्यता

फिलहाल एलपीजी बुकिंग के लिए शहरी इलाकों में 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन का अंतराल तय किया गया है। इसके साथ ही उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए आधार आधारित ई-केवाईसी अनिवार्य कर दी गई है। जिन उपभोक्ताओं ने अभी तक ई-केवाईसी पूरा नहीं किया है उन्हें जल्द इसे अपडेट करना होगा। सरकार का मानना है कि इससे फर्जी कनेक्शन और दुरुपयोग पर रोक लगेगी।

पीएनजी की ओर शिफ्ट करने पर जोर

सरकार बड़े शहरों में कमर्शियल उपभोक्ताओं को पीएनजी गैस अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इससे एलपीजी पर दबाव कम होगा और सप्लाई बेहतर तरीके से मैनेज की जा सकेगी। साथ ही, पीएनजी यूजर्स को नया एलपीजी कनेक्शन लेने से रोका गया है। यह कदम संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए उठाया गया है।

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