महिला आरक्षण पर बड़ा कदम, लोकसभा में होंगी 850 सीटें: 33 फीसदी आरक्षण 15 साल तक लागू करने का प्रस्ताव, परिसीमन के बाद नई व्यवस्था होगी प्रभावी

देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में केंद्र सरकार एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है। प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण लागू करने की तैयारी की जा रही है। इस पहल के साथ ही लोकसभा की कुल सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 तक किए जाने का प्रस्ताव भी सामने आया है, जिससे महिलाओं को व्यापक प्रतिनिधित्व मिल सके।
सरकार की योजना के अनुसार नई व्यवस्था लागू होने के बाद राज्यों के लिए 815 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें निर्धारित की जाएंगी। इस तरह लोकसभा का आकार काफी बड़ा हो जाएगा। माना जा रहा है कि बढ़ती जनसंख्या और प्रतिनिधित्व की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया जा रहा है।
महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण
प्रस्तावित विधेयक के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इसमें अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग की महिलाओं को भी उनके अनुपात के अनुसार आरक्षण का लाभ दिया जाएगा। यह कदम सामाजिक समावेश और समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रोटेशन प्रणाली से मिलेगा मौका
महिला आरक्षण को रोटेशन प्रणाली के आधार पर लागू किया जाएगा। इसका मतलब है कि हर चुनाव में आरक्षित सीटें बदलती रहेंगी, ताकि अलग-अलग क्षेत्रों की महिलाओं को चुनाव लड़ने और प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिल सके। इससे किसी एक क्षेत्र में आरक्षण स्थायी रूप से सीमित नहीं रहेगा और व्यापक स्तर पर भागीदारी सुनिश्चित होगी।
15 वर्षों तक लागू रहेगी व्यवस्था
सरकार के प्रस्ताव के अनुसार महिला आरक्षण की यह व्यवस्था 15 वर्षों तक प्रभावी रहेगी। इसका मतलब है कि 2029, 2034 और 2039 के लोकसभा चुनावों तक महिलाओं को इसका लाभ मिलेगा। इस अवधि के दौरान हर चुनाव में सीटों का पुनः निर्धारण किया जाएगा, जिससे अधिक से अधिक महिलाओं को राजनीति में आने का अवसर मिल सके।
परिसीमन के बाद ही लागू होगा आरक्षण
इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण (परिसीमन) किया जाएगा, जो 2011 की जनगणना के आधार पर प्रस्तावित है। संविधान के अनुच्छेद 334ए में संशोधन के जरिए यह प्रावधान जोड़ा जा रहा है कि महिला आरक्षण तभी लागू होगा जब परिसीमन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
संसद सत्र में पेश हो सकता है विधेयक
सूत्रों के अनुसार सरकार इस विधेयक को 16 से 18 अप्रैल के बीच होने वाले संसद सत्र में पेश कर सकती है। इसके लिए विधेयक की प्रतियां सांसदों को भेजी जा चुकी हैं। सरकार का लक्ष्य है कि आवश्यक संवैधानिक प्रक्रिया पूरी कर इस व्यवस्था को जल्द से जल्द लागू किया जाए, ताकि अगली चुनाव प्रक्रिया में ही महिलाओं को इसका सीधा लाभ मिल सके।
इस पहल को भारतीय राजनीति में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है, जिससे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और अधिक समावेशी बन सकेगी।
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