NEET पेपर लीक में CBI का शिकंजा तेज: अब तक पांच गिरफ्तार, राजस्थान से लेकर महाराष्ट्र तक कार्रवाई

14 मई 2026
अब तक पांच गिरफ्तार, राजस्थान से लेकर महाराष्ट्र तक कार्रवाई

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा पर संकट गहराया है। NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में अब जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। केंद्रीय जांच एजेंसी CBI ने अब तक पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों को अलग-अलग राज्यों से पकड़ा गया। बुधवार को 14 संदिग्धों से लंबी पूछताछ हुई। इसके बाद कई लोगों को छोड़ दिया गया। वहीं मुख्य आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर भेजा गया। अब CBI सभी को दिल्ली ले जाकर पूछताछ करेगी।

CBI ने राजस्थान के सीकर से मांगी लाल बिंवाल को पकड़ा। उसके साथ दिनेश बिंवाल और विकास बिंवाल भी गिरफ्तार हुए। हरियाणा के गुरुग्राम से यश यादव गिरफ्तार किया गया। महाराष्ट्र के नासिक से शुभम खैरनार पकड़ा गया। जांच में सामने आया कि शुभम ने ही यश को पेपर उपलब्ध कराया था। इसके बाद पेपर राजस्थान तक पहुंचा। इधर पुणे से ब्यूटीशियन मनीषा वाघमारे को हिरासत में लिया गया। अहिल्यानगर से धनंजय लोखंडे को भी पूछताछ के लिए पकड़ा गया। एजेंसियों को शक है कि पेपर लीक के पैसों का लेनदेन खातों के जरिए हुआ। जांच में पता चला कि मनीषा के 21 खातों में करीब दस लाख रुपए जमा हुए थे। अब इन खातों की जांच की जा रही है।

हजार छात्रों तक पहुंचा लीक पेपर

राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप यानी SOG ने बड़ा खुलासा किया। जांच एजेंसी के मुताबिक, लीक पेपर करीब एक हजार छात्रों तक पहुंचाया गया। यह काम कोचिंग नेटवर्क के जरिए हुआ। सूत्रों के अनुसार, छात्रों से दो लाख से पांच लाख रुपए तक वसूले गए। बदले में उन्हें प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया। CBI जांच में सामने आया कि आरोपी यश यादव ने पेपर सीकर पहुंचाया था। वहीं विकास बिंवाल के पिता दिनेश ने कथित तौर पर पेपर स्कैन किया। हार्ड कॉपी को PDF फाइल में बदला गया। इसके बाद उसे छात्रों तक भेजा गया। आरोपियों ने पहले सवाल हाथ से लिखे। फिर उन्हें स्कैन करके वायरल किया गया।

वायरल गेस पेपर में मिले असली सवाल

सीकर में तीन मई की रात बड़ा खुलासा हुआ था। पुलिस थाने पहुंचे कोचिंग टीचर और PG संचालक के पास गेस पेपर मिला। इस क्वेश्चन बैंक में असली परीक्षा के 180 में से 150 सवाल हूबहू थे। इसके बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया। सोशल मीडिया पर भी छात्रों ने परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। NTA ने बढ़ते विवाद के बाद परीक्षा रद्द कर दी। साथ ही दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया। केंद्र सरकार ने जांच CBI को सौंप दी। अब एजेंसी कई राज्यों में छापेमारी कर रही है।

दिल्ली में एडमिशन रैकेट का भंडाफोड़

इसी बीच दिल्ली पुलिस ने एक और बड़े गिरोह का खुलासा किया। यह गैंग मेडिकल कॉलेज में एडमिशन दिलाने का झांसा देता था। पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें RJD के राष्ट्रीय सचिव संतोष कुमार जायसवाल भी शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि वही पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड था। गिरोह छात्रों और अभिभावकों से करोड़ों की ठगी करता था। आरोप है कि MBBS एडमिशन दिलाने के नाम पर 20 से 30 लाख रुपए मांगे जाते थे। इस नेटवर्क में एक डॉक्टर भी शामिल बताया गया है। पुलिस अब बैंक खातों और कॉल रिकॉर्ड की जांच कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

पेपर लीक विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने याचिका दाखिल की है। इसमें सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में परीक्षा कराने की मांग हुई। याचिका में कहा गया कि NTA पर अब भरोसा नहीं बचा। देशभर के लाखों छात्र अब दोबारा परीक्षा को लेकर परेशान हैं। अभिभावकों में भी गुस्सा बढ़ रहा है। जांच एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं।

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