बेंगलुरु में बुजुर्ग महिला से 24 करोड़ की साइबर ठगी: पांच महीने तक ‘डिजिटल अरेस्ट’, मुंबई, प्रयागराज और दिल्ली से पांच आरोपी अरेस्ट

57 मिनट पहले
पांच महीने तक ‘डिजिटल अरेस्ट’, मुंबई, प्रयागराज और दिल्ली से पांच आरोपी अरेस्ट

साइबर अपराधियों ने ठगी का ऐसा जाल बुना कि एक बुजुर्ग महिला से करीब 24 करोड़ रुपये की ठगी कर ली गई। खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताने वाले ठगों ने महिला को “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाया और पांच महीने तक मानसिक दबाव में रखकर अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करवा ली। मामले का खुलासा तब हुआ, जब महिला पैसे जुटाने के लिए अपने सोने के गहने गिरवी रखने बैंक पहुंचीं। पुलिस ने इस मामले में मुंबई, प्रयागराज और दिल्ली से पांच आरोपियों को अरेस्ट किया है और एक बैंक खाते से 60 लाख रुपये फ्रीज किए गए हैं।

पुलिस के मुताबिक पीड़िता ने हाल ही में अपनी एक बड़ी प्रॉपर्टी बेची थी। साइबर ठगों को इसकी जानकारी मिल गई और जनवरी 2026 में उन्होंने महिला को कॉल कर खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताया। ठगों ने दावा किया कि महिला के बैंक खातों का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है और जांच पूरी होने तक उन्हें किसी से संपर्क नहीं करना होगा। इसके बाद महिला को लगातार वीडियो कॉल और फोन के जरिए डराया गया और जनवरी से मई के बीच 22 अलग-अलग खातों में करीब 24 करोड़ रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए।

सोना गिरवी रखने पहुंचीं तो खुली ठगी की परतें

पुलिस अधिकारियों के अनुसार ठग करोड़ों रुपये लेने के बाद भी लगातार और पैसों की मांग कर रहे थे। जब महिला के पास नकदी खत्म हो गई तो वह करीब 1.30 किलो सोने के गहने गिरवी रखकर पैसे जुटाने बैंक पहुंचीं। बैंक अधिकारियों को लेन-देन संदिग्ध लगा, जिसके बाद उन्होंने पुलिस को सूचना दी। जांच शुरू होते ही पूरे साइबर फ्रॉड का खुलासा हुआ। पुलिस का कहना है कि यह मामला डिजिटल अरेस्ट के नाम पर हो रही ठगी का अब तक का सबसे बड़ा मामलों में से एक है। साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक अपराधी लोगों को कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी का डर दिखाकर मानसिक रूप से इतना दबाव में ला देते हैं कि पीड़ित बिना जांच-पड़ताल किए पैसे ट्रांसफर कर देते हैं।

फर्जी इंटरव्यू और AI तकनीक से बढ़ा खतरा

साइबर क्राइम ब्रांच ने एक नई एडवाइजरी जारी करते हुए बताया है कि अपराधी अब नौकरी के ऑनलाइन इंटरव्यू और ई-केवाईसी के नाम पर लोगों की आंखों की पुतलियों और चेहरे का डेटा रिकॉर्ड कर रहे हैं। इसके बाद एआई तकनीक की मदद से डीपफेक वीडियो तैयार किए जा रहे हैं, जिनका इस्तेमाल आधार में मोबाइल नंबर बदलने और फर्जी डिजिटल अकाउंट खोलने में किया जा रहा है। जांच में सामने आया है कि कॉमन सर्विस सेंटर यानी सीएससी के जरिए होने वाले आधार अपडेट सिस्टम में भी सेंधमारी की जा रही है। अपराधी चोरी की लॉगिन आईडी, फर्जी एजेंट नेटवर्क या अंदरूनी मिलीभगत के जरिए सिस्टम तक पहुंच बना रहे हैं।

युवती को फर्जी इंटरव्यू से बनाया निशाना

साइबर क्राइम ब्रांच ने एक अन्य मामले का भी खुलासा किया है, जिसमें जयपुर की एक 28 वर्षीय युवती को निजी कंपनी के नाम पर फर्जी ऑनलाइन इंटरव्यू लिंक भेजा गया। वीडियो कॉल के दौरान “फेस वेरिफिकेशन” के नाम पर उसका चेहरा अलग-अलग एंगल से रिकॉर्ड किया गया और आंखें झपकवाने जैसी गतिविधियां कराई गईं। कुछ दिन बाद युवती को ई-केवाईसी और डिजिटल वॉलेट एक्टिवेशन के संदेश मिलने लगे। जांच में पता चला कि अपराधियों ने रिकॉर्ड किए गए डेटा से एआई आधारित डीपफेक तैयार कर फर्जी अकाउंट खोलने की कोशिश की थी।

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