केजरीवाल को हाईकोर्ट से झटका: जस्टिस शर्मा ने केस से अलग होने से किया इनकार, पक्षपात के आरोपों को कोर्ट ने बताया निराधार

21 अप्रैल 2026
जस्टिस शर्मा ने केस से अलग होने से किया इनकार, पक्षपात के आरोपों को कोर्ट ने बताया निराधार

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की याचिका पर बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने साफ कर दिया कि इस मामले की सुनवाई उसी बेंच में जारी रहेगी। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत अन्य आरोपियों की उस मांग को खारिज कर दिया जिसमें जज से खुद को केस से अलग करने को कहा गया था। अदालत ने कहा कि लगाए गए पक्षपात के आरोप बेबुनियाद हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह बिना किसी दबाव के सुनवाई जारी रखेगी। इस दौरान अदालत ने एक घंटे से अधिक समय तक विस्तृत आदेश पढ़ा। हर तर्क का जवाब दिया गया।

सुनवाई के दौरान अदालत का रुख सख्त दिखा। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि केवल आशंका के आधार पर किसी जज को हटाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका निष्पक्ष तरीके से काम करती है। इस पर सवाल उठाना सही नहीं है। अदालत ने केजरीवाल की सभी दलीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस तरह की मांगें न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश लगती हैं। यह मामला कथित शराब घोटाले से जुड़ा है। ट्रायल कोर्ट ने पहले केजरीवाल समेत 23 आरोपियों को राहत दी थी। इस फैसले को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने हाई कोर्ट में चुनौती दी है। इसी केस की सुनवाई को लेकर विवाद खड़ा हुआ था।

खुद केजरीवाल ने रखा पक्ष

इस मामले में केजरीवाल ने खुद अदालत में पैरवी की। उन्होंने लंबी बहस की। उन्होंने पहले चीफ जस्टिस को पत्र लिखा था। इसके बाद अदालत में याचिका दाखिल की। उनका कहना था कि निष्पक्ष सुनवाई के लिए बेंच बदलना जरूरी है। हालांकि कोर्ट ने इस तर्क को नहीं माना। जस्टिस शर्मा ने कहा कि किसी जज के खिलाफ आरोप लगाने के लिए ठोस आधार होना चाहिए। सिर्फ आशंका के आधार पर ऐसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटेगी।

इंटरनेट बंद होने से कुछ देर रुकी कार्यवाही

सुनवाई के दौरान एक अनोखा पल भी देखने को मिला। जब जस्टिस शर्मा फैसला पढ़ रही थीं, तभी अचानक कोर्ट का इंटरनेट बंद हो गया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सिस्टम काम करना बंद कर गया। इससे तुषार मेहता का कनेक्शन टूट गया। जस्टिस शर्मा ने अपनी बात रोकी। उन्होंने कहा कि तकनीकी दिक्कत ठीक होने का इंतजार किया जाएगा। इसी बीच अदालत का माहौल थोड़ा हल्का हो गया। गंभीर माहौल में अचानक आई इस रुकावट ने सबका ध्यान खींचा।

जज की टिप्पणी पर मुस्कुराया कोर्ट रूम

इंटरनेट दिक्कत के बीच जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने हल्के अंदाज में टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “सीबीआई से पता करवाओ कि इंटरनेट को क्या हुआ।” यह सुनते ही कोर्ट रूम में मौजूद लोग मुस्कुरा दिए। कुछ देर के लिए माहौल सहज हो गया। इसके बाद इंटरनेट दोबारा चालू हुआ। जस्टिस शर्मा ने फिर से आदेश पढ़ना शुरू किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अपनी ड्यूटी पूरी करेंगी। सुनवाई जारी रहेगी।

कोर्ट का साफ संदेश

इस फैसले के साथ हाई कोर्ट ने साफ संदेश दिया। न्यायिक प्रक्रिया अपने नियमों के अनुसार ही चलेगी। किसी भी तरह के आरोप या दबाव का असर नहीं पड़ेगा। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि यह मामला केवल एक जज पर नहीं बल्कि पूरी न्यायिक व्यवस्था पर सवाल उठाने जैसा है। अब इस केस की आगे की सुनवाई इसी बेंच में होगी। कोर्ट के इस फैसले को इस मामले में बड़ा मोड़ माना जा रहा है।

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