ईडी का बड़ा एक्शन: 81,422 करोड़ की संपत्ति जब्त, 94% तक पहुंची दोष सिद्धि दर

देश में आर्थिक अपराधों के खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पिछले वित्त वर्ष में बड़ी सफलता हासिल की है। एजेंसी ने 81,422 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की हैं। यह आंकड़ा अब तक के सबसे बड़े एक्शन में से एक माना जा रहा है। इस कार्रवाई का मकसद साफ है। मनी लॉन्ड्रिंग और आर्थिक अपराधों में शामिल लोगों पर सख्त नकेल कसना। ईडी का दावा है कि अब वह मनी ट्रेल के जरिए सीधे अपराधियों तक पहुंचने में सफल हो रही है।
ईडी ने सिर्फ संपत्ति जब्त ही नहीं की, बल्कि बड़ी रकम वापस भी दिलाई है। एजेंसी के अनुसार, 63,142 करोड़ रुपये बैंकों, निवेशकों और घर खरीददारों को लौटाए गए हैं। यह उन लोगों के लिए राहत की खबर है, जो आर्थिक धोखाधड़ी के शिकार हुए थे। इससे एजेंसी की रिकवरी क्षमता भी मजबूत दिखती है।
94% दोष सिद्धि दर
ईडी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि उसकी दोष सिद्धि दर 94% तक पहुंच गई है। यानी जिन मामलों का फैसला हुआ, उनमें ज्यादातर में दोष साबित हुआ है। हालांकि एक बड़ी चुनौती अभी भी बाकी है। 2,400 से ज्यादा मामले अदालतों में लंबित हैं। इससे यह साफ है कि न्यायिक प्रक्रिया अभी भी धीमी है।
कम मामलों का ही हुआ अंतिम निपटारा
आंकड़ों के अनुसार, दर्ज कुल मामलों में से बहुत कम का ही पूरा निपटारा हो पाया है। 31 मार्च तक सिर्फ लगभग 60 मामलों में ही अंतिम फैसला आया है। यह स्थिति दिखाती है कि केसों की संख्या ज्यादा है, लेकिन ट्रायल पूरा होने में समय लग रहा है। इससे एजेंसी की उपलब्धियों के साथ-साथ सिस्टम की चुनौतियां भी सामने आती हैं।
विदेश भागे अपराधियों पर भी सख्ती
ईडी ने भगोड़ा आर्थिक अपराधियों के खिलाफ भी कड़ा रुख अपनाया है। भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम के तहत 54 लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है। इनमें से 21 को भगोड़ा घोषित किया जा चुका है। इन अपराधियों की 2,178 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है। यह कार्रवाई उन लोगों के लिए चेतावनी है, जो देश से भागकर बचने की कोशिश करते हैं।
डिजिटल और विदेशी खतरों पर भी नजर
ईडी अब सिर्फ पारंपरिक अपराधों तक सीमित नहीं है। एजेंसी ने नए तरह के खतरों पर भी फोकस बढ़ाया है। डिजिटल अरेस्ट, विदेशी हस्तक्षेप और बौद्धिक संपदा से जुड़े मामलों पर भी कार्रवाई हो रही है। पीएमएलए के तहत पिछले सात महीनों में करीब 800 नए मामले दर्ज किए गए हैं।
नई जोखिम मूल्यांकन समिति की बड़ी भूमिका
इन मामलों के पीछे ईडी की नई रिस्क असेसमेंट कमेटी का बड़ा रोल है। यह समिति नए खतरों की पहचान करती है और जांच के लिए मामलों को मंजूरी देती है। ईडी निदेशक राहुल नवीन ने बताया कि अक्टूबर 2025 से अब तक समिति की 91 बैठकें हो चुकी हैं। इन बैठकों में 794 मामलों को दर्ज करने की मंजूरी दी गई।
स्थापना दिवस पर रिपोर्ट
ईडी ने यह रिपोर्ट अपने 70वें स्थापना दिवस के मौके पर जारी की। इसमें एजेंसी की उपलब्धियों और भविष्य की रणनीति दोनों को सामने रखा गया।
अब फोकस सिर्फ कार्रवाई पर नहीं, बल्कि तेजी और पारदर्शिता पर भी है।
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