नक्सल क्षेत्रों में विदेशी फंडिंग का जाल: ईडी की जांच में खुलासा, विदेशी डेबिट कार्ड के जरिए निकाला गया कैश

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने देश के नक्सल प्रभावित इलाकों में संदिग्ध विदेशी फंडिंग और नकदी निकासी के बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। एजेंसी इस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। यह मामला एक वैश्विक ईसाई मिशन से जुड़ा बताया जा रहा है। जांच में सामने आया है कि विदेशी डेबिट कार्ड के जरिए भारत में बड़े पैमाने पर कैश निकाला गया। यह गतिविधि कई राज्यों में फैली हुई थी। ईडी ने इसे वित्तीय नियमों के उल्लंघन और सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील मामला माना है।
ईडी ने 18 और 19 अप्रैल को कई राज्यों में एक साथ सर्च ऑपरेशन चलाया। यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के तहत दर्ज केस में की गई। इस दौरान एजेंसी को कई अहम सबूत मिले। तलाशी में 25 विदेशी डेबिट कार्ड बरामद किए गए। साथ ही लगभग 40 लाख रुपये कैश भी जब्त किया गया। जांच टीम को कुछ डिजिटल डिवाइस और संदिग्ध दस्तावेज भी मिले। इनसे नेटवर्क के विस्तार का संकेत मिलता है। अधिकारियों का मानना है कि यह एक संगठित और प्लान्ड ऑपरेशन था।
विदेशी बैंक से जुड़े कार्ड का इस्तेमाल
जांच में पता चला है कि ये डेबिट कार्ड अमेरिका के एक बैंक से जुड़े थे। इन्हें भारत में लाया गया था। इसके बाद इनका उपयोग अलग-अलग एटीएम से बार-बार कैश निकालने के लिए किया गया। यह प्रक्रिया लंबे समय से चल रही थी। एजेंसी के अनुसार, यह कोई सामान्य लेन-देन नहीं था। इसमें एक सुनियोजित पैटर्न दिख रहा है। इससे संकेत मिलता है कि इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था। यह नेटवर्क भारत के संवेदनशील इलाकों में एक्टिव था।
नक्सल क्षेत्रों में 6.5 करोड़ की निकासी
ईडी की जांच में छत्तीसगढ़ के बस्तर और धमतारी जैसे नक्सल प्रभावित इलाकों का नाम सामने आया है। यहां पिछले कुछ वर्षों में लगभग 6.5 करोड़ रुपये की नकदी निकाली गई। इस रकम का उपयोग एक संगठन की गतिविधियों में किया गया। यह संगठन ‘द टिमोथी इनिशिएटिव’ (टीटीआई) से जुड़ा बताया गया है। एजेंसी के अनुसार, यह संगठन भारत में एफसीआरए के तहत रजिस्टर्ड नहीं है। इसके बावजूद इसकी फंडिंग और खर्च जारी था। यह कानून के उल्लंघन का मामला बनता है।
वेब पोर्टल और फंडिंग पर सवाल
जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित संगठन का वेब पोर्टल भारत में एक्सेस नहीं होता। यह एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। इससे संकेत मिलता है कि गतिविधियों को छिपाने की कोशिश की गई। साथ ही एक ऑनलाइन बिलिंग और अकाउंटिंग प्लेटफॉर्म का भी पता चला। इस प्लेटफॉर्म के जरिए पूरी फाइनेंशियल ट्रैकिंग की जा रही थी। खास बात यह है कि इसे विदेश में बैठी संस्थाएं कंट्रोल कर रही थीं। इससे नेटवर्क की इंटरनेशनल लिंकिंग साफ दिखती है।
एयरपोर्ट पर पकड़ा गया संदिग्ध व्यक्ति
इस केस में एक अहम गिरफ्तारी भी सामने आई है। बेंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मीका मार्क नाम के व्यक्ति को रोका गया। उसके पास से 24 विदेशी डेबिट कार्ड बरामद हुए। एजेंसियों को शक है कि वह इस नेटवर्क का सक्रिय हिस्सा था। इन कार्ड्स का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर कैश निकालने के लिए किया जा रहा था। यह मामला अब और गहराता जा रहा है। जांच एजेंसियां उसके संपर्कों और नेटवर्क को ट्रेस कर रही हैं।
95 करोड़ रुपये की विदेशी एंट्री
ईडी के मुताबिक, नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच करीब 95 करोड़ रुपये भारत में आए। यह रकम अलग-अलग माध्यमों से लाई गई। इसका उपयोग देश के अंदर विभिन्न गतिविधियों के लिए किया गया। यह फंडिंग किस उद्देश्य से आई, इसकी जांच जारी है। एजेंसी इसे देश की वित्तीय सुरक्षा और अखंडता के लिए गंभीर खतरा मान रही है। आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे संभव हैं।
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