आईएनएस महेंद्रगिरि नौसेना में शामिल : ब्रह्मोस से लैस स्टेल्थ फ्रिगेट से बढ़ी समुद्री ताकत, नौसेना को मिला आधुनिक युद्धपोत

भारत की समुद्री शक्ति को बड़ा बूस्ट मिला है। स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस महेंद्रगिरि को भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया है। यह अत्याधुनिक युद्धपोत मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, मुंबई में तैयार किया गया। इसे 30 अप्रैल को आधिकारिक रूप से नौसेना को डिलीवर किया गया। यह जहाज नीलगिरि-क्लास यानी प्रोजेक्ट 17ए का हिस्सा है। इसे आधुनिक युद्ध जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। रक्षा विशेषज्ञ इसे भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं।
आईएनएस महेंद्रगिरि की सबसे बड़ी खासियत इसकी स्टेल्थ क्षमता है। यह दुश्मन के रडार को आसानी से चकमा दे सकता है। इसमें ब्रह्मोस मिसाइल लगी है, जो सुपरसोनिक स्पीड से टारगेट को हिट करती है। इसके अलावा इसमें अत्याधुनिक सोनार सिस्टम भी मौजूद है। यह पनडुब्बियों का पता लगाने में सक्षम है। जहाज में एयर डिफेंस और एंटी-सर्फेस वारफेयर सिस्टम भी लगाए गए हैं। इससे यह मल्टी-रोल कॉम्बैट प्लेटफॉर्म बन जाता है।
नौसेना की क्षमता में ‘क्वालिटेटिव जंप’
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह फ्रिगेट नौसेना की क्षमताओं में बड़ा बदलाव लाता है। डिजाइन, फायरपावर और सर्वाइवल के मामले में यह एक ‘क्वालिटेटिव जंप’ है। प्रोजेक्ट 17ए के जहाजों को इस तरह बनाया गया है कि वे वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों का सामना कर सकें। यह सिर्फ एक युद्धपोत नहीं, बल्कि हाई-टेक समुद्री प्लेटफॉर्म है।
शिवालिक क्लास से ज्यादा एडवांस टेक्नोलॉजी
महेंद्रगिरि को पहले के शिवालिक क्लास फ्रिगेट से ज्यादा एडवांस बनाया गया है। इसमें बेहतर हथियार और सेंसर सिस्टम लगाए गए हैं। इसका प्रोपल्शन सिस्टम भी खास है। इसमें कंबाइंड डीजल एंड गैस तकनीक का इस्तेमाल हुआ है। इसमें डीजल इंजन और गैस टरबाइन दोनों शामिल हैं। इससे जहाज को तेज स्पीड और बेहतर कंट्रोल मिलता है। इसके अलावा इसमें इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम भी है, जो पूरे जहाज के ऑपरेशन को स्मार्ट तरीके से कंट्रोल करता है।
भारत की इंजीनियरिंग क्षमता का प्रदर्शन
महेंद्रगिरि को 17 महीने से कम समय में नौसेना को सौंप दिया गया। यह अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। इससे भारत की डिजाइन और इंजीनियरिंग क्षमता का प्रदर्शन होता है। यह प्रोजेक्ट पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित है। इसमें करीब 75% सामग्री देश में ही बनाई गई है।
एमएसएमई सेक्टर को भी मिला बड़ा फायदा
इस प्रोजेक्ट में 200 से ज्यादा एमएसएमई कंपनियों ने हिस्सा लिया। इससे छोटे और मध्यम उद्योगों को बड़ा सपोर्ट मिला है। करीब 4,000 लोगों को सीधे रोजगार मिला। वहीं 10,000 से ज्यादा लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिला। यह प्रोजेक्ट ‘मेक इन इंडिया’ को भी मजबूती देता है।
भारत की समुद्री सुरक्षा हुई मजबूत
आईएनएस महेंद्रगिरि के शामिल होने से भारतीय नौसेना की ताकत और बढ़ गई है। यह हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति को मजबूत करेगा। चीन और अन्य देशों की बढ़ती समुद्री गतिविधियों के बीच यह जहाज भारत के लिए अहम साबित होगा।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम
यह युद्धपोत सिर्फ एक सैन्य उपलब्धि नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम है। स्वदेशी तकनीक, लोकल इंडस्ट्री और आधुनिक डिजाइन का यह संगम भारत को रक्षा क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। आने वाले समय में ऐसे और युद्धपोत भारत की ताकत को और मजबूत करेंगे।











