खराब मौसम ने रोकी केदारनाथ हेली सेवा: चार हजार से ज्यादा टिकट कैंसिल, DGCA की सख्ती के बाद बिना मौसम क्लियरेंस नहीं उड़ेंगे हेलिकॉप्टर

उत्तराखंड में चल रही केदारनाथ यात्रा के बीच हेलिकॉप्टर सेवाएं लगातार खराब मौसम की मार झेल रही हैं। बारिश, बर्फबारी और तेज हवाओं के कारण अब तक चार हजार से ज्यादा हेलिकॉप्टर बुकिंग रद्द की जा चुकी हैं। यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई श्रद्धालु घंटों तक हेलीपैड पर इंतजार कर रहे हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोगों को यात्रा बीच में ही रोकनी पड़ रही है। हालात को देखते हुए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने उत्तराखंड सिविल एविएशन डेवलपमेंट अथॉरिटी (UCADA) को सख्त निर्देश जारी किए हैं। साफ कहा गया है कि मौसम खराब होने पर किसी भी हालत में हेलिकॉप्टर उड़ान नहीं भरेगा। सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा।
पिछले साल चारधाम यात्रा के दौरान हुए हेलिकॉप्टर हादसों ने सरकार और एविएशन एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी थी। वर्ष 2025 में पांच बड़े हेली हादसों में 13 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद से DGCA ने इस बार यात्रा शुरू होने से पहले ही सुरक्षा नियमों को और सख्त कर दिया। सभी ऑपरेटरों को एडवाइजरी जारी की गई थी कि मौसम को लेकर कोई रिस्क नहीं लिया जाएगा। अब उसी नीति के तहत हर उड़ान की रियल टाइम मॉनिटरिंग हो रही है। खराब मौसम का हल्का संकेत मिलते ही उड़ानें रोक दी जा रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता है।
मई में मौसम बना सबसे बड़ी चुनौती
मई महीने में उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में लगातार मौसम बदल रहा है। कभी तेज बारिश तो कभी अचानक बर्फबारी हो रही है। कई बार बादल इतनी तेजी से घिर रहे हैं कि विजिबिलिटी कुछ मिनटों में ही खत्म हो जा रही है। इसी वजह से करीब 40 प्रतिशत उड़ानें प्रभावित हुई हैं। केदारनाथ रूट पर फिलहाल आठ हेली कंपनियां सेवाएं दे रही हैं। इनकी बुकिंग IRCTC के जरिए हो रही है। लेकिन दोपहर बाद मौसम लगातार खराब होने के कारण कई उड़ानों को बीच में ही रोकना पड़ रहा है। इससे यात्रियों का शेड्यूल पूरी तरह बिगड़ गया है।
बादलों के बीच उड़ान का रिस्क नहीं ले रहे अधिकारी
UCADA के सीईओ आशीष चौहान ने कहा कि इस बार प्रशासन “जीरो टॉलरेंस” नीति पर काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि मंदाकिनी घाटी में मौसम बहुत तेजी से बदलता है। कई बार बादल नीचे घाटियों से ऊपर उठते हैं और अचानक पूरा इलाका ढंक लेते हैं। ऐसे में पायलटों को जोखिम लेने की इजाजत नहीं दी जा रही। उन्होंने कहा कि कंट्रोल रूम से कैमरों और तकनीकी सिस्टम के जरिए लगातार निगरानी हो रही है। जैसे ही मौसम खराब होने का संकेत मिलता है, तुरंत उड़ानें रोक दी जाती हैं। अधिकारियों का मानना है कि पहले कई हादसे खराब मौसम में जोखिम लेने की वजह से हुए थे।
पायलटों की ट्रेनिंग भी हुई सख्त
इस बार हेलिकॉप्टर उड़ाने वाले पायलटों के लिए नियम और कड़े किए गए हैं। केदारनाथ रूट पर ऊंचाई 10 हजार फीट से ज्यादा है। यहां ऑक्सीजन की कमी और संकरे एयर रूट पायलटों के लिए बड़ी चुनौती होते हैं। DGCA ने पहले 8 टेकऑफ और लैंडिंग का अनुभव अनिवार्य किया था, लेकिन UCADA ने इसे बढ़ाकर 10 कर दिया है। साथ ही 10 घंटे की अतिरिक्त फ्लाइंग ट्रेनिंग भी जरूरी की गई है। इसके बाद ही किसी पायलट को केदारनाथ रूट पर उड़ान की अनुमति दी जा रही है।
तय रूट से हटे तो तुरंत कार्रवाई
इस बार सभी हेलिकॉप्टरों में एडवांस ट्रैकिंग सिस्टम लगाए गए हैं। अगर कोई पायलट तय एयर रूट से थोड़ा भी इधर-उधर होता है या स्पीड लिमिट पार करता है, तो कंट्रोल रूम में तुरंत अलर्ट पहुंच जाता है। अधिकारियों के मुताबिक सभी उड़ानों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जा रही है। नियम तोड़ने वाले ऑपरेटरों को सीधे ग्राउंडेड किया जा सकता है। फिलहाल किसी कंपनी पर जुर्माना नहीं लगाया गया है, लेकिन कई उड़ानों को सुरक्षा कारणों से रोका गया है।
धामों में बढ़ेंगे हेलीपैड और ATC सिस्टम
यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकार अब चारधाम क्षेत्र में नए हेलीपैड बनाने की तैयारी कर रही है। केदारनाथ और बद्रीनाथ में स्थायी एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम यानी ATC बनाने का काम भी शुरू हो गया है। अभी अस्थायी ATC के जरिए संचालन हो रहा है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में हेली सेवाओं को और सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जाएगा, ताकि यात्रियों को परेशानी कम हो और हादसों की संभावना भी घटे।
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