परिसीमन पर नया विवाद: महिलाओं के आरक्षण के साथ बदलेंगे चुनावी समीकरण, सीटों की संख्या बढ़ाने की तैयारी

16 अप्रैल 2026
 महिलाओं के आरक्षण के साथ बदलेंगे चुनावी समीकरण, सीटों की संख्या बढ़ाने की तैयारी

केंद्र सरकार ने संसद में परिसीमन (सीमांकन) से जुड़े अहम बिल पेश किए हैं, जिनके बाद देश की चुनावी व्यवस्था में बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है। इस बार परिसीमन को लेकर विवाद इसलिए बढ़ गया है, क्योंकि सरकार 2029 के आम चुनाव से पहले लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33% आरक्षण देने की तैयारी में है। खास बात यह है कि यह आरक्षण राज्यों के मौजूदा सीट अनुपात को बदले बिना लागू करने की योजना है।

परिसीमन का मतलब निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को तय या पुनर्निर्धारित करना होता है। यह प्रक्रिया जनसंख्या के आधार पर की जाती है, ताकि हर क्षेत्र में लगभग समान आबादी का प्रतिनिधित्व हो सके।

संविधान के अनुच्छेद 82 के तहत हर जनगणना के बाद परिसीमन होना चाहिए, लेकिन 1976 में 42वें संशोधन के जरिए लोकसभा सीटों की संख्या 543 पर स्थिर कर दी गई थी।

अब क्या है नया प्रस्ताव?

सरकार इस बार परिसीमन में एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। प्रस्ताव के अनुसार, राज्यों के बीच सीटों का अनुपात बदले बिना लोकसभा की कुल सीटों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।

महिलाओं को 33% आरक्षण देने के लिए सीटों में करीब 50% तक बढ़ोतरी का अनुमान है। उदाहरण के तौर पर, उत्तर प्रदेश की सीटें 80 से बढ़कर 120 तक हो सकती हैं।

महिलाओं को मिलेगा 33% आरक्षण

इस प्रस्ताव का सबसे अहम हिस्सा महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करना है। बढ़ी हुई सीटों में से एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए निर्धारित की जाएंगी। इससे संसद और विधानसभा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

सीमांकन की प्रक्रिया कैसे होती है?

सीमांकन के लिए केंद्र सरकार एक आयोग का गठन करती है, जिसमें आमतौर पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश, मुख्य चुनाव आयुक्त या उनके प्रतिनिधि शामिल होते हैं।

यह आयोग तय करता है कि किस क्षेत्र की सीमाएं कैसे बदली जाएं और किसे कितनी सीट मिले।

कानून में प्रस्तावित बदलाव

नए बिल में यह प्रस्ताव भी शामिल है कि अब हर जनगणना के बाद परिसीमन करना जरूरी नहीं होगा। पहले यह संवैधानिक बाध्यता थी, लेकिन अब इसे संसद के विवेक पर छोड़ने की बात कही जा रही है। इससे सरकार को समय और प्रक्रिया तय करने में अधिक लचीलापन मिलेगा।

दक्षिणी राज्यों की चिंता

दक्षिण भारत के कई राज्यों को डर है कि अगर नई जनगणना के आधार पर परिसीमन हुआ तो उनकी सीटें घट सकती हैं, क्योंकि वहां जनसंख्या वृद्धि अपेक्षाकृत कम रही है।

हालांकि, सरकार ने सीटों का अनुपात न बदलने का संकेत देकर उनकी चिंता कम करने की कोशिश की है।

उत्तर भारत में असंतोष की आशंका

वहीं दूसरी ओर उत्तर भारत के राज्यों में असंतोष की संभावना है। यहां जनसंख्या तेजी से बढ़ी है, लेकिन अगर सीटों का अनुपात वही रहता है तो उन्हें अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाएगा।

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