एनपीएस खाताधारकों के लिए बड़ा बदलाव: पेंशन सेक्टर में एफडीआई 100% तक संभव, 2015 में 49% से बढ़ाकर किया गया 74%

20 अप्रैल 2026
पेंशन सेक्टर में एफडीआई 100% तक संभव, 2015 में 49% से बढ़ाकर किया गया 74%

देश में पेंशन सेक्टर को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्र की भारत सरकार ने नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) से जुड़े नियमों में संशोधन की तैयारी शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक पेंशन सेक्टर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा को 49% से बढ़ाकर सीधे 100% तक किया जा सकता है। इसके लिए पीएफआरडीए एक्ट में बदलाव किया जाएगा। सरकार इस संशोधन बिल को संसद के आने वाले सत्र में पेश कर सकती है। इस कदम को पेंशन सेक्टर में बड़े रिफॉर्म के तौर पर देखा जा रहा है।

फिलहाल पेंशन फंड में विदेशी निवेश की सीमा 49% तक तय है। सरकार इस सीमा को हटाकर 100% तक खोलना चाहती है। इसका मकसद पेंशन सेक्टर में ज्यादा विदेशी निवेश लाना है। इससे फंड का साइज बढ़ेगा। साथ ही नए प्लेयर्स की एंट्री भी आसान होगी। सरकार का मानना है कि ज्यादा निवेश आने से सेक्टर मजबूत होगा। इससे फंड मैनेजमेंट बेहतर होगा। लंबी अवधि में रिटर्न भी बेहतर हो सकता है।

एनपीएस ट्रस्ट को किया जाएगा अलग

इस प्रस्ताव का दूसरा बड़ा हिस्सा है एनपीएस ट्रस्ट को पीएफआरडीए से अलग करना। अभी एनपीएस ट्रस्ट पीएफआरडीए के नियमों के तहत काम करता है। नए प्लान के तहत इसे एक स्वतंत्र संस्था बनाया जा सकता है। इसे चैरिटेबल ट्रस्ट या कंपनी एक्ट के तहत लाने पर विचार हो रहा है। इसके लिए एक नया बोर्ड बनाया जाएगा। इसमें करीब 15 सदस्य होंगे। इस बोर्ड में सरकार की भूमिका अहम रहेगी। क्योंकि केंद्र और राज्य सरकारें इस फंड में सबसे बड़ा योगदान देती हैं। इससे सिस्टम में ज्यादा पारदर्शिता और स्वायत्तता आने की उम्मीद है।

बीमा सेक्टर जैसा मॉडल

सरकार इस बदलाव को बीमा सेक्टर के मॉडल पर लागू करना चाहती है। बीमा क्षेत्र में पहले ही 100% एफडीआई की अनुमति दी जा चुकी है। पिछले साल संसद ने बीमा सेक्टर में विदेशी निवेश की सीमा 74% से बढ़ाकर 100% कर दी थी। इससे पहले 2015 में इसे 49% से बढ़ाकर 74% किया गया था। अब उसी मॉडल को पेंशन सेक्टर में लागू करने की तैयारी है।

जरूरी हैं ये बदलाव

सरकार का मानना है कि पेंशन सिस्टम को और मजबूत बनाने के लिए ये बदलाव जरूरी हैं। पीएफआरडीए का गठन पेंशन सेक्टर के विकास के लिए किया गया था। अब एनपीएस ट्रस्ट को अलग करने से कामकाज ज्यादा फोकस्ड हो सकता है। इससे जवाबदेही भी बढ़ेगी। साथ ही निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा।

एनपीएस का बैकग्राउंड और उद्देश्य

एनपीएस को 1 जनवरी 2004 से केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए लागू किया गया था। इसमें सशस्त्र बलों को शामिल नहीं किया गया था। इसके बाद 2009 में इसे आम नागरिकों के लिए भी खोल दिया गया। इसका मकसद लोगों को रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा देना है। पुरानी पेंशन योजना के मुकाबले एनपीएस को ज्यादा टिकाऊ माना गया। इससे सरकार पर वित्तीय बोझ भी कम होता है।

खाताधारकों पर क्या होगा असर

इन प्रस्तावित बदलावों का सीधा असर एनपीएस खाताधारकों पर पड़ सकता है। ज्यादा विदेशी निवेश आने से फंड का विस्तार होगा। इससे बेहतर रिटर्न की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि रेगुलेशन और मॉनिटरिंग मजबूत रहनी चाहिए। ताकि निवेश सुरक्षित बना रहे।

नव्य जागरण

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