पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर राहत: बढ़ोतरी की खबरों को सरकार ने किया खारिज, वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची

24 अप्रैल 2026
बढ़ोतरी की खबरों को सरकार ने किया खारिज, वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची

पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर चल रही अटकलों पर सरकार ने साफ रुख अपनाया है। सरकार ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि फिलहाल ईंधन की खुदरा कीमत बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। हाल के दिनों में कई रिपोर्ट्स सामने आई थीं। इनमें दावा किया गया था कि चुनाव के बाद पेट्रोल और डीजल महंगे हो सकते हैं। लेकिन सरकार ने इन सभी खबरों को खारिज कर दिया है। इससे आम जनता को बड़ी राहत मिली है।

सरकार ने यह भी बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां इस समय नुकसान में काम कर रही हैं। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। इसके चलते कंपनियों पर दबाव बढ़ा है। बताया गया है कि कंपनियां पेट्रोल पर करीब 20 रुपये प्रति लीटर तक का नुकसान उठा रही हैं। वहीं डीजल पर यह नुकसान और ज्यादा बताया जा रहा है। इसके बावजूद कीमतें स्थिर रखी गई हैं।

सोशल मीडिया पर सरकार का स्पष्टीकरण

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बयान जारी किया। मंत्रालय ने कहा कि कुछ खबरों में ईंधन की कीमत बढ़ने की बात कही जा रही है। यह खबरें भ्रामक हैं। सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। मंत्रालय ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।

रिपोर्ट के बाद बढ़ी थी चर्चा

कीमत बढ़ने की चर्चा एक रिपोर्ट के बाद तेज हुई थी। एक ब्रोकरेज फर्म की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि चुनाव के बाद कीमतों में 25 से 28 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी हो सकती है। इस रिपोर्ट में कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया था। इसी आधार पर यह दावा किया गया था कि कीमतें बढ़ सकती हैं।

चुनाव से जोड़कर देखी जा रही थी स्थिति

कुछ विश्लेषकों ने इस मुद्दे को चुनाव से भी जोड़कर देखा। उनका कहना था कि चुनाव खत्म होने के बाद कीमतों में बदलाव हो सकता है। खासतौर पर उन राज्यों में जहां मतदान प्रक्रिया चल रही है। लेकिन सरकार ने इन सभी अटकलों को पूरी तरह नकार दिया है।

आम लोगों के लिए राहत की खबर

सरकार के इस फैसले से आम उपभोक्ताओं को राहत मिली है। महंगाई के दौर में ईंधन की कीमतें बढ़ना सीधे जेब पर असर डालता है। ट्रांसपोर्ट महंगा होता है। रोजमर्रा की चीजों के दाम भी बढ़ते हैं। ऐसे में कीमत स्थिर रहने से लोगों को थोड़ी राहत मिलेगी।

नव्य जागरण

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