राजस्थान रिफाइनरी में लगी भीषण आग: प्रधानमंत्री मोदी कल करने वाले थे लोर्कापण, 2013 में प्रोजेक्ट की हुई थी शुरुआत

20 अप्रैल 2026
प्रधानमंत्री मोदी कल करने वाले थे लोर्कापण, 2013 में प्रोजेक्ट की हुई थी शुरुआत

राजस्थान में एक बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट पर अचानक संकट खड़ा हो गया है। बालोतरा के पचपदरा में स्थित रिफाइनरी में भीषण आग लग गई। यह वही रिफाइनरी है जिसका उद्घाटन 21 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करने वाले थे। लोर्कापण से ठीक एक दिन पहले हुई इस घटना ने सभी को चौंका दिया है। आग इतनी तेज थी कि देखते ही देखते पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। राहत और बचाव टीमों को तुरंत मौके पर भेजा गया। प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है।

यह रिफाइनरी हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और राजस्थान सरकार का संयुक्त प्रोजेक्ट है। इसे देश की पहली ग्रीनफील्ड इंटीग्रेटेड रिफाइनरी-कम-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स के तौर पर विकसित किया गया है। इस प्रोजेक्ट को ऊर्जा सेक्टर में बड़ा गेमचेंजर माना जा रहा था। इस रिफाइनरी से न केवल ईंधन उत्पादन होना है, बल्कि बड़े स्तर पर पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट भी बनाए जाने हैं। इससे पूरे क्षेत्र में औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद थी।

लोर्कापण से पहले हादसा

घटना ऐसे समय हुई है जब लोर्कापण की तैयारियां अंतिम चरण में थीं। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का भी कार्यक्रम तय था। वे शाम करीब चार बजे रिफाइनरी पहुंचने वाले थे। लेकिन इससे पहले ही आग लगने की खबर सामने आ गई। इस हादसे ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इतने बड़े प्रोजेक्ट में अंतिम समय पर ऐसी घटना चिंता का विषय बन गई है।

प्रधानमंत्री मोदी कल करने वाले थे लोर्कापण, 2013 में प्रोजेक्ट की हुई थी शुरुआत

हरकत में प्रशासन

घटना की गंभीरता को देखते हुए राज्य के मुख्य सचिव मौके पर पहुंच गए हैं। उन्होंने हालात का जायजा लिया। प्रशासन ने उच्च स्तरीय जांच की तैयारी शुरू कर दी है। तकनीकी विशेषज्ञों की टीम को भी मौके पर बुलाया गया है। वे आग लगने के कारणों की जांच करेंगे। शुरुआती तौर पर यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि आग तकनीकी खराबी से लगी या किसी और वजह से।

2013 में रखी गई थी नींव

इस प्रोजेक्ट की शुरुआत कई साल पहले हुई थी। 22 सितंबर 2013 को सोनिया गांधी ने इसकी आधारशिला रखी थी। उस समय राज्य में अशोक गहलोत की सरकार थी। शुरुआत में इसकी लागत करीब 37,230 करोड़ रुपये आंकी गई थी। बाद में सरकार बदलने के बाद 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस प्रोजेक्ट को दोबारा शुरू किया। संशोधित लागत बढ़कर 43,129 करोड़ रुपये हो गई।

प्रधानमंत्री मोदी कल करने वाले थे लोर्कापण, 2013 में प्रोजेक्ट की हुई थी शुरुआत

रिफाइनरी से उद्योगों को बड़ा फायदा

यह रिफाइनरी केवल ईंधन तक सीमित नहीं है। यहां से कई तरह के पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट बनने हैं। इनमें पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलीइथाइलीन, बेंजीन, टोल्यूनि और ब्यूटाडाइन जैसे उत्पाद शामिल हैं। इन उत्पादों के आधार पर कई नए उद्योग स्थापित हो सकते हैं। इससे प्लास्टिक, ऑटोमोबाइल, कृषि, मेडिकल और केमिकल सेक्टर को बड़ा फायदा मिलेगा। स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

क्षेत्र में बढ़ी चिंता

बालोतरा और पचपदरा इलाके में इस घटना के बाद चिंता का माहौल है। लोग इस बड़े प्रोजेक्ट से काफी उम्मीदें लगाए बैठे थे। हालांकि राहत कार्य तेजी से जारी है। प्रशासन आग पर काबू पाने की पूरी कोशिश कर रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आग पर पूरी तरह कब तक काबू पाया जाएगा। साथ ही इसकी असली वजह क्या सामने आएगी। इस घटना ने एक बार फिर बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स में सुरक्षा व्यवस्था की अहमियत को उजागर कर दिया है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट के बाद ही पूरी तस्वीर साफ हो पाएगी।

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