महिला आरक्षण और परिसीमन पर संसद में घमासान: पीएम बोले- नीयत पर सवाल उठाने वालों को नारी शक्ति नहीं करेगी माफ , 17 अप्रैल को होगी वोटिंग

महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों पर संसद में तीखी बहस देखने को मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जहां इसे महिलाओं के अधिकार से जुड़ा ऐतिहासिक कदम बताया, वहीं विपक्ष ने सरकार पर इसे राजनीतिक रणनीति करार देते हुए सवाल खड़े किए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि महिलाओं को अधिकार देने के मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने अतीत में महिलाओं के अधिकारों का विरोध किया, उन्हें जनता ने कभी माफ नहीं किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “नीयत में खोट को देश की नारी शक्ति कभी माफ नहीं करेगी।”
पीएम मोदी ने विपक्ष को तंज भरे अंदाज में कहा कि उन्हें इस फैसले का पूरा श्रेय लेने में कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा, “हम क्रेडिट का ब्लैंक चेक देने को तैयार हैं, बस इस ऐतिहासिक कदम को राजनीतिक रंग न दिया जाए।”
महिलाओं की भागीदारी पर जोर
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि महिलाओं की भागीदारी केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र को मजबूत करने का माध्यम है। उन्होंने पंचायत और स्थानीय निकायों में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि उनका अनुभव देश के विकास को नई दिशा देगा।
काले कपड़ों पर तंज
संसद में विरोध के तौर पर काले कपड़े पहनकर पहुंचे विपक्षी सांसदों पर पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय परंपरा में बुरी नजर से बचाने के लिए काला टीका लगाया जाता है। उन्होंने इसे उसी नजरिए से देखा।

विपक्ष का पलटवार
समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा महिलाओं को “नारा” बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि भाजपा शासित राज्यों में कितनी महिला मुख्यमंत्री हैं और पार्टी में महिलाओं की वास्तविक भागीदारी कितनी है।
आरक्षण टालने का आरोप
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण को लागू करने के बजाय उसे टालने के लिए परिसीमन का सहारा ले रही है। उन्होंने कहा कि सरकार जनगणना, खासकर जातीय जनगणना से बचना चाहती है, इसलिए इस तरह के बिल ला रही है।
महिला सशक्तिकरण पर राजनीतिक टकराव
विपक्ष का कहना है कि सरकार का असली उद्देश्य सत्ता में बने रहना है, जबकि सरकार इसे महिलाओं को उनका हक दिलाने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक खींचतान जारी है।
17 अप्रैल को होगा फैसला
लोकसभा में पेश किए गए इन विधेयकों पर 16 और 17 अप्रैल को कुल 15 घंटे चर्चा तय की गई है। इसके बाद 17 अप्रैल को शाम 4 बजे वोटिंग होगी। इस वोटिंग के बाद ही यह साफ होगा कि महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों का भविष्य क्या होगा।
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