सुप्रीम कोर्ट सख्त: बोला- जांच में सीएम का दखल लोकतंत्र के लिए खतरा, ईडी ने आई-पैक के ऑफिस पर की थी छापेमारी

23 अप्रैल 2026
बोला- जांच में सीएम का दखल लोकतंत्र के लिए खतरा, ईडी ने आई-पैक के ऑफिस पर की थी छापेमारी

नई दिल्ली में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई ने एक बड़े संवैधानिक मुद्दे को केंद्र में ला दिया। मामला आई-पैक रेड से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की याचिका पर कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि किसी मुख्यमंत्री का जांच प्रक्रिया में दखल देना लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। कोर्ट की टिप्पणी सीधे तौर पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस कदम पर थी, जब वे छापेमारी के दौरान मौके पर पहुंच गई थीं। इस पूरे घटनाक्रम ने केंद्र और राज्य के अधिकार क्षेत्र, जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता और राजनीतिक दखल जैसे मुद्दों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

सुनवाई के दौरान जस्टिस कुमार ने कहा कि यह मामला सिर्फ एक राज्य और केंद्र के बीच का विवाद नहीं है। यह उससे कहीं ज्यादा गंभीर है। उन्होंने कहा कि संविधान बनाते समय किसी ने यह नहीं सोचा होगा कि एक मुख्यमंत्री जांच एजेंसी की कार्रवाई के दौरान मौके पर पहुंच जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि सिर्फ कानूनी थ्योरी से काम नहीं चलेगा। जमीन की सच्चाई भी देखनी होगी। बदलते समय के साथ संविधान की व्याख्या भी बदलती है। ऐसे मामलों में कोर्ट को नए नजरिए से सोचने की जरूरत होती है। कोर्ट की इन टिप्पणियों को काफी अहम माना जा रहा है। क्योंकि यह सीधे तौर पर प्रशासनिक मर्यादा और संस्थागत संतुलन की बात करता है।

क्या है पूरा मामला

दरअसल आठ जनवरी को ईडी की टीम ने कोलकाता में आई-पैक हेड प्रतीक जैन के घर और ऑफिस पर रेड की थी। आई-पैक एक पॉलिटिकल कंसल्टिंग फर्म है। यह ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के चुनावी कैंपेन को संभालती है। रेड के दौरान ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुंच गई थीं। आरोप है कि वे कुछ दस्तावेज अपने साथ लेकर चली गईं। ईडी ने इसे जांच में बाधा बताया। एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कि राज्य सरकार और पुलिस ने उनकी कार्रवाई में हस्तक्षेप किया। यह एजेंसी के अधिकारों का उल्लंघन है।

ममता पक्ष की दलीलें

ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट में पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि ईडी को जांच करने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है। यह सिर्फ एक प्रशासनिक काम है। उन्होंने तर्क दिया कि ईडी अधिकारी एक सरकारी कर्मचारी है। वह किसी विशेष अधिकार का दावा नहीं कर सकता। सिंघवी ने यह भी कहा कि ईडी खुद को “जनता का रक्षक” बताकर कोर्ट में नहीं आ सकती। उनके अनुसार, एजेंसी ने इस मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया है। इसमें मौलिक अधिकारों का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है।

आई-पैक ऑफिस बंद, चुनावी माहौल पर असर

इस पूरे विवाद के बीच आई-पैक का कोलकाता स्थित ऑफिस 20 अप्रैल से बंद है। बताया जा रहा है कि करीब 1300 कर्मचारियों को काम पर न आने का नोटिस दिया गया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब राज्य में चुनावी माहौल गर्म है। पहले चरण की वोटिंग 23 अप्रैल को होनी है। दूसरे चरण की वोटिंग 29 अप्रैल को तय है। रिजल्ट चार मई को आएंगे। ऐसे में आई-पैक की भूमिका और उसकी अनुपस्थिति चुनावी रणनीति पर असर डाल सकती है।

टीएमसी टिकट कटने में आई-पैक की भूमिका

सूत्रों के अनुसार, टीएमसी के कई विधायकों के टिकट कटने के पीछे आई-पैक का सर्वे बड़ा कारण था। करीब 33 प्रतिशत मौजूदा विधायकों को टिकट नहीं मिला। यह फैसला आई-पैक की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया था। फर्म ने राज्य के 93 हजार पोलिंग बूथों के लिए करीब एक लाख शैडो एजेंट्स भी तैयार किए थे। यह पूरी रणनीति चुनाव में बड़ा फैक्टर मानी जा रही थी। अब इस विवाद के चलते इसकी कार्यप्रणाली पर भी असर पड़ सकता है।

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