सुप्रीम कोर्ट में बढ़ेगी जजों की संख्या: 37 जजों के प्रस्ताव को मंजूरी, कैबिनेट की मंजूरी

06 मई 2026
37 जजों के प्रस्ताव को मंजूरी, कैबिनेट की मंजूरी

देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया गया है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव मंजूर कर दिया है। अब जजों की कुल संख्या 33 से बढ़ाकर 37 की जाएगी। यह फैसला कैबिनेट की बैठक में लिया गया। इसका मकसद न्यायिक प्रक्रिया को तेज करना और लंबित मामलों का बोझ कम करना है।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी कि इस प्रस्ताव को संसद के अगले सत्र में विधेयक के रूप में पेश किया जाएगा। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस समेत 33 जजों की अधिकतम संख्या तय है। अब इसमें चार नए जज जोड़े जाएंगे।

कानून में संशोधन की प्रक्रिया

इस फैसले के बाद 1956 के मौजूदा कानून में संशोधन किया जाएगा। संविधान के अनुच्छेद 124(1) के तहत संसद को सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या तय करने का अधिकार है। जैसे ही संसद इस विधेयक को पास करेगी, नई संख्या लागू हो जाएगी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम नए जजों के नाम सरकार को भेजेगा। नियुक्ति की प्रक्रिया उसी संवैधानिक ढांचे के तहत पूरी की जाएगी, जो पहले से लागू है।

पहले भी बढ़ चुकी है संख्या

सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या समय-समय पर बढ़ाई जाती रही है। 2019 में आखिरी बार संख्या 31 से बढ़ाकर 33 की गई थी। उससे पहले 2008 में इसे 26 से बढ़ाकर 31 किया गया था। शुरुआती दौर में सुप्रीम कोर्ट में केवल 10 जजों की व्यवस्था थी। समय के साथ मामलों की संख्या बढ़ी और न्यायिक कामकाज का दायरा भी बड़ा हुआ। इसी के चलते जजों की संख्या बढ़ाने की जरूरत महसूस होती रही है।

खाली पद और आने वाली रिटायरमेंट

इस समय सुप्रीम कोर्ट में दो पद पहले से खाली हैं। इसके अलावा आने वाले महीनों में तीन और जज रिटायर होने वाले हैं। इससे कुल खाली पदों की संख्या बढ़ सकती है। रिटायरमेंट की वजह से न्यायिक कार्य प्रभावित होता है। ऐसे में नए जजों की नियुक्ति जरूरी हो जाती है। सरकार का यह कदम इसी दिशा में देखा जा रहा है।

जज बनने की योग्यता

संविधान के अनुच्छेद 124(3) के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का जज बनने के लिए कुछ तय मानदंड हैं। व्यक्ति का भारतीय नागरिक होना जरूरी है। इसके साथ ही कम से कम पांच साल तक हाईकोर्ट में जज रहना या दस साल तक वकील के रूप में काम करना अनिवार्य है। इसके अलावा किसी प्रतिष्ठित विधि विशेषज्ञ को भी जज बनाया जा सकता है।

पेंडिंग केस बड़ी चुनौती

सुप्रीम कोर्ट में इस समय 92 हजार से ज्यादा केस लंबित हैं। यह संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। कोविड के बाद ई-फाइलिंग सिस्टम के बढ़ने से मामलों की एंट्री और तेज हो गई है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, देशभर की अदालतों में कुल 5.49 करोड़ से ज्यादा केस पेंडिंग हैं। इसमें सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट दोनों शामिल हैं।

क्या होगा फायदा

जजों की संख्या बढ़ने से मामलों की सुनवाई तेज हो सकती है। कोर्ट पर काम का दबाव कम होगा। इससे न्याय मिलने में देरी कम होने की उम्मीद है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह फैसला न्यायिक सिस्टम में सुधार की दिशा में अहम कदम है। हालांकि, सिर्फ जजों की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। इसके साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रक्रियाओं में सुधार भी जरूरी है।

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