तमिलनाडु चुनाव 2026; 23 अप्रैल को वोटिंग: फिर लौट सकती है स्टालिन सरकार, थलापति विजय को मिल सकती है पांच से 15 सीटें

तमिलनाडु की 234 सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होनी है। सरकार बनाने के लिए 118 सीटों का आंकड़ा जरूरी है। मुकाबला सीधा है। एक तरफ एम.के. स्टालिन की डीएमके है। दूसरी तरफ एआईएडीएमके और बीजेपी का गठबंधन है। चेन्नई से लेकर मदुरै तक यही ट्रेंड दिखा। आम लोग, एक्सपर्ट और जर्नलिस्ट एक ही बात कह रहे हैं। सत्ता वापसी की राह डीएमके के लिए आसान दिख रही है।
रिपोर्ट के अनुसार डीएमके गठबंधन को 120 से 140 सीटें मिल सकती हैं। इसमें डीएमके को 100 से 110 सीटें मिलने का अनुमान है। कांग्रेस को 10 से 15 सीटें मिल सकती हैं। बाकी सहयोगी दल भी 10 से 15 सीटें जोड़ सकते हैं। 2021 में डीएमके गठबंधन ने 159 सीटें जीती थीं। अकेले डीएमके ने बहुमत हासिल किया था। इस बार भी वही ट्रेंड दिख रहा है। फर्क इतना है कि इस बार सरकार के कामकाज का भी असर दिख रहा है।
क्यों पिछड़ रहा एआईएडीएमके-बीजेपी गठबंधन
एआईएडीएमके गठबंधन को 90 से 100 सीटें मिल सकती हैं। एआईएडीएमके को 70 से 80 सीटों का अनुमान है। बीजेपी 27 सीटों पर लड़ रही है लेकिन उसका खाता खुलना मुश्किल माना जा रहा है। बेहतर प्रदर्शन में पांच सीटें मिल सकती हैं। गठबंधन की सबसे बड़ी समस्या अंदरूनी कलह है। जयललिता के बाद लीडरशिप कमजोर हुई है। पलानीस्वामी और पन्नीरसेल्वम के बीच खींचतान रही। इससे वोटर्स में कन्फ्यूजन है। दूसरी दिक्कत नैरेटिव की है। स्टालिन सरकार के खिलाफ कोई बड़ा मुद्दा नहीं बन पाया। हिंदुत्व कार्ड भी असरदार नहीं दिख रहा। तमिलनाडु की द्रविड़ राजनीति में यह रणनीति कमजोर पड़ती है।
स्टालिन की वापसी के पीछे क्या कारण
एम.के. स्टालिन की वापसी के पीछे कई फैक्टर हैं। पहला है मजबूत गठबंधन। उन्होंने छोटे और क्षेत्रीय दलों को साथ जोड़ा। इससे वोट बैंक मजबूत हुआ। दूसरा बड़ा कारण योजनाएं हैं। ‘कलैगनार मगलिर उरीमाई थोगाई’ योजना के तहत महिलाओं को हर महीने 1000 रुपए मिल रहे हैं। करीब 1 करोड़ महिलाएं इससे जुड़ी हैं। बसों में महिलाओं के लिए फ्री सफर भी बड़ा मुद्दा है। युवाओं के लिए भी योजनाएं असरदार हैं। छात्राओं को हर महीने सहायता राशि मिल रही है। फ्री कोचिंग, लाइब्रेरी और स्कॉलरशिप प्रोग्राम चल रहे हैं। पहली बार वोट डालने वाले करीब 12.5 लाख युवा इन योजनाओं से प्रभावित हैं।
थलापति विजय की एंट्री, लेकिन असर सीमित
फिल्म स्टार विजय की पार्टी टीवीके पहली बार चुनाव लड़ रही है। पार्टी को पांच से 15 सीटें मिल सकती हैं। वोट शेयर करीब 12% रहने का अनुमान है। हालांकि, पार्टी का स्ट्रक्चर अभी कमजोर है। ज्यादातर उम्मीदवार नए हैं। संगठन मजबूत नहीं है। ऐसे में सिर्फ स्टारडम के दम पर बड़ी जीत मुश्किल लगती है।
क्या विजय बन सकते हैं किंगमेकर
राजनीतिक समीकरण में एक संभावना जरूर है। अगर किसी को बहुमत नहीं मिलता, तो विजय किंगमेकर बन सकते हैं। उनका असर 20-25% वोटर्स पर माना जाता है। लेकिन मौजूदा माहौल में यह संभावना कमजोर दिखती है। डीएमके गठबंधन स्पष्ट बढ़त में नजर आ रहा है। ऐसे में तमिलनाडु में एक बार फिर स्टालिन सरकार की वापसी लगभग तय मानी जा रही है।
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