ग्वालियर हाईवे पर जलती कार में जिंदा जले दो दोस्त: पीछे का गेट खुलने से एक की बची जान, शादी समारोह से लौट रहे थे तीनों

मध्य प्रदेश के डबरा-ग्वालियर हाईवे पर एक दर्दनाक सड़क हादसे ने हर किसी को झकझोर दिया। तेज रफ्तार कार बिजली के पोल से टकराकर पलट गई। हादसे के बाद कार में भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि कार में फंसे दो युवक जिंदा जल गए। वहीं पीछे की सीट पर बैठा तीसरा युवक किसी तरह बाहर निकलने में सफल रहा और उसकी जान बच गई। हादसा अर्रु तिराहे के पास हुआ। घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है, जिसमें हादसे के बाद लोगों की चीख-पुकार और बचाने की कोशिशें कैद हुई हैं।
जानकारी के मुताबिक मृतकों की पहचान अवधेश विश्वकर्मा और रामजी सोनी के रूप में हुई है। अवधेश छतरपुर के रहने वाले थे और फाइनेंस का काम करते थे। वहीं रामजी सोनी सोने-चांदी के कारोबारी बताए जा रहे हैं। अवधेश की शादी दो साल पहले हुई थी और उनका 9 महीने का बेटा भी है। तीनों दोस्त ग्वालियर में एक शादी समारोह में शामिल होने गए थे और देर रात वापस लौट रहे थे।
बताया गया कि अवधेश के साले अविनाश झा के दोस्त की शादी थी। इसी समारोह में शामिल होने के लिए तीनों पहले शिवपुरी पहुंचे और वहां से कार से ग्वालियर गए। शादी में आतिशबाजी हुई थी। वापसी के दौरान बचे हुए पटाखों को कार की डिग्गी में रख लिया गया। यही पटाखे बाद में हादसे की सबसे बड़ी वजह बन गए।
नींद का झोंका बना मौत की वजह
रात के समय जब कार डबरा-ग्वालियर हाईवे से गुजर रही थी, तभी चालक अवधेश विश्वकर्मा को नींद का झोंका आ गया। तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर सीधे बिजली के पोल से टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि पोल बीच से टूट गया। हादसे के तुरंत बाद 11 केवी बिजली लाइन कार पर गिर गई। बिजली की चिंगारी डिग्गी में रखे पटाखों तक पहुंच गई और देखते ही देखते कार आग का गोला बन गई।
CCTV में कैद हुआ खौफनाक मंजर
पास के एक ढाबे पर लगे CCTV कैमरे में पूरी घटना रिकॉर्ड हो गई। फुटेज में दिखाई दे रहा है कि हादसे के तुरंत बाद आसपास मौजूद लोग मदद के लिए दौड़ते हैं। कुछ लोग कार में फंसे युवकों को बाहर निकालने की कोशिश भी करते हैं। लेकिन करीब ढाई मिनट बाद कार से चिंगारी निकलने लगती है। पटाखों में आग लगने के बाद लोग डरकर पीछे हट जाते हैं। करीब साढ़े छह मिनट बाद दोबारा तेज चिंगारी उठती है। इसके बाद आग और भड़क जाती है। कुछ ही देर में पूरी कार आग की लपटों में घिर जाती है। दहशत के कारण कोई भी ज्यादा देर तक कार के करीब नहीं जा सका। लोग पानी और मिट्टी डालकर आग बुझाने की कोशिश करते रहे, लेकिन आग पर काबू नहीं पाया जा सका।
पीछे का दरवाजा खुलने से बची जान
हादसे के समय अविनाश झा कार की पीछे वाली सीट पर बैठे थे। टक्कर के बाद कार के आगे के दोनों दरवाजे लॉक हो गए, लेकिन पीछे का गेट खुल गया। इससे अविनाश बाहर गिर गए और उनकी जान बच गई। वहीं आगे बैठे अवधेश और रामजी कार में ही फंस गए। दोनों बाहर नहीं निकल सके और जिंदा जल गए। सूचना मिलने पर डायल-112 और अन्य पुलिस वाहन मौके पर पहुंचे। लेकिन तब तक आग पूरी तरह विकराल हो चुकी थी। देर रात तक राहत कार्य चलता रहा। सुबह जब आग पूरी तरह बुझी तो कार के अंदर से दोनों युवकों के कंकाल बरामद किए गए।
इलाके में पसरा मातम
घटना की खबर मिलते ही परिवारों में कोहराम मच गया। दोनों मृतकों के घरों में मातम का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर कार में पटाखे नहीं रखे होते तो शायद दोनों युवकों की जान बच सकती थी। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और CCTV फुटेज को भी जांच में शामिल किया गया है।
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