ईरान तनाव के बीच इंडियन ऑयल का भरोसा: एक महीने से ज्यादा का कच्चा तेल स्टॉक, सप्लाई बनाए रखने की तैयारी तेज

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ईरान से जुड़े संकट के बीच देश की सबसे बड़ी सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशनने राहत देने वाली तस्वीर पेश की है। कंपनी ने साफ किया है कि मौजूदा हालात के बावजूद देश में कच्चे तेल की कोई तत्काल कमी नहीं होने दी जाएगी। इंडियन ऑयल के पास एक महीने से अधिक का क्रूड ऑयल स्टॉक मौजूद है। सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं। कंपनी का कहना है कि ऊर्जा सुरक्षा को लेकर लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि अंतरराष्ट्रीय संकट का असर आम उपभोक्ताओं तक न पहुंचे।
दरअसल, अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ती अनिश्चितता ने वैश्विक तेल बाजार में चिंता बढ़ा दी है। भारत की बड़ी मात्रा में ऊर्जा आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से होकर आती है। ऐसे में तेल कंपनियों पर सप्लाई बनाए रखने का दबाव बढ़ गया है। इंडियन ऑयल ने कहा कि उसने पहले से ही वैकल्पिक रणनीति तैयार कर रखी है और जरूरत पड़ने पर दूसरे देशों से आयात बढ़ाया जा रहा है। कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, होर्मुज रूट पर असर पड़ने के बावजूद देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की उपलब्धता सामान्य बनी हुई है।
एलपीजी सप्लाई प्रभावित, लेकिन संकट नहीं
कंपनी के डायरेक्टर फाइनेंस अनुज जैन ने बताया कि खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ने के बाद एलपीजी सप्लाई पर कुछ असर जरूर पड़ा है, क्योंकि भारत की करीब 90 प्रतिशत एलपीजी आपूर्ति इसी क्षेत्र से जुड़ी हुई है। हालांकि इंडियन ऑयल ने स्थिति को संभालने के लिए इंडोनेशिया, नाइजीरिया, अंगोला और ओमान जैसे देशों से तत्काल खरीद शुरू कर दी है। इससे घरेलू गैस वितरण पर बड़ा असर नहीं पड़ने दिया गया। उन्होंने कहा कि कंपनी ने अपने सप्लाई नेटवर्क को अधिक लचीला बनाया है, ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो सके। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक हालात भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों के लिए चुनौतीपूर्ण हैं। यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबा खिंचता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। इसका सीधा असर परिवहन लागत, घरेलू गैस और महंगाई पर भी पड़ सकता है। हालांकि फिलहाल सरकार और तेल कंपनियां स्थिति को नियंत्रित रखने की कोशिश में जुटी हैं।
मुनाफे में 81 प्रतिशत की बड़ी छलांग
इसी बीच इंडियन ऑयल ने अपने वित्तीय नतीजों में भी शानदार प्रदर्शन दर्ज किया है। वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा 81 प्रतिशत बढ़कर 15,176 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 8,367 करोड़ रुपये था। मजबूत कमाई के बाद कंपनी के बोर्ड ने शेयरधारकों के लिए प्रति शेयर 1.25 रुपये के फाइनल डिविडेंड की भी सिफारिश की है। कंपनी आने वाले वर्षों में रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाने पर भी बड़ा निवेश करने जा रही है। पानीपत, गुजरात और बरौनी रिफाइनरियों के विस्तार पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इंडियन ऑयल का कहना है कि देश में बढ़ती ऊर्जा मांग को देखते हुए उत्पादन क्षमता बढ़ाना जरूरी हो गया है। इसके लिए वर्ष 2026-27 में 32,700 करोड़ रुपये के पूंजीगत निवेश की योजना बनाई गई है।
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