डॉलर की छलांग से टूटा बाजार: रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा रुपया, हजार अंक लुढ़का सेंसेक्स

वैश्विक तनाव और महंगे कच्चे तेल के दबाव ने सोमवार को भारतीय बाजार की चाल बिगाड़ दी। डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 96.18 के स्तर पर पहुंच गया। भारतीय मुद्रा में 20 पैसे की बड़ी गिरावट दर्ज हुई। दूसरी तरफ शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स करीब एक हजार अंक टूटकर 74,200 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। वहीं निफ्टी भी 300 अंक फिसलकर 23,300 के करीब पहुंच गया। बाजार में शुरुआती घंटों से ही दबाव का माहौल बना रहा। विदेशी निवेशकों की सतर्क रणनीति ने भी बाजार की कमजोरी बढ़ा दी।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का सीधा असर भारतीय बाजार पर दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी आने से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। महंगे तेल से आयात बिल बढ़ने की आशंका बनी हुई है। इसका दबाव सीधे रुपए और बाजार दोनों पर पड़ रहा है। सोमवार सुबह इंटरनेशनल मार्केट में कच्चा तेल 111 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। कीमतों में लगभग दो प्रतिशत की तेजी दर्ज हुई। विश्लेषकों के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने बाजार को अस्थिर कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हालिया बयान के बाद निवेशकों की चिंता और गहरी हो गई। ट्रम्प ने ईरान पर शांति समझौते के लिए दबाव बढ़ाया है। इसके बाद वैश्विक बाजार में अनिश्चितता का माहौल बन गया। दरअसल, पिछले सप्ताह अमेरिका ने ईरान को नया शांति प्रस्ताव दिया था। ईरान ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर विवाद लगातार बढ़ रहा है। इसका असर अब अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है।
निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह
एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि सेंसेक्स फिलहाल 75,200 से 75,300 के दायरे के आसपास बना हुआ है। बाजार अभी धीरे-धीरे रिकवरी की कोशिश कर रहा है। हालांकि वैश्विक अनिश्चितता के कारण निवेशकों का भरोसा कमजोर बना हुआ है। उनके मुताबिक 75,600 से 76,000 का स्तर बाजार के लिए मजबूत रेजिस्टेंस माना जा रहा है। वहीं 74,500 से 74,200 के बीच मजबूत सपोर्ट दिखाई दे रहा है। चॉइस ब्रोकिंग के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट ने कहा कि निफ्टी के लिए 24,000 और 24,250 अहम रेजिस्टेंस स्तर हैं। वहीं 23,250 और 23,000 का स्तर मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। उन्होंने निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने की सलाह दी है। बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने के कारण ट्रेडर्स को सख्त स्टॉप-लॉस रणनीति अपनाने की जरूरत बताई गई है।
विदेशी दबाव और कमजोर रुपया बने बड़ी चुनौती
एक्सपर्ट्स का मानना है कि कमजोर रुपया आने वाले दिनों में महंगाई का दबाव बढ़ा सकता है। कच्चे तेल की कीमतें यदि इसी तरह ऊंचे स्तर पर बनी रहीं, तो भारतीय अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ बढ़ सकता है। फिलहाल बाजार की नजर वैश्विक घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर टिकी हुई है।
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