पंचतत्व में विलीन हुईं 'सुरों की मल्लिका' आशा भोंसले: मुंबई में राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई, गूंजती रहेगी उनकी 'जादुई आवाज़'

भारतीय संगीत जगत की सबसे वर्सेटाइल और बुलंद आवाज़, आशा भोंसले पंचतत्व में विलीन हो गईं। मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में बीते रोज उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। उनके पुत्र आनंद भोंसले ने मुखाग्नि दी। इस दौरान महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सहित राजनीति और फिल्म जगत की तमाम दिग्गज हस्तियां मौजूद रहीं। तिरंगे में लिपटी अपनी चहेती गायिका को विदा करने के लिए हजारों प्रशंसकों की भीड़ उमड़ पड़ी थी।
लता मंगेशकर जैसी महान गायिका की छोटी बहन होना कोई आसान बात नहीं थी, लेकिन आशा जी ने अपनी मेहनत और अलग शैली से अपनी साख बनाई। उन्होंने साबित किया कि अगर प्रतिभा और जज्बा हो, तो अपनी राह खुद बनाई जा सकती है। 'पद्म विभूषण' और 'दादा साहब फाल्के' जैसे पुरस्कार उनकी इसी महानता की गवाही देते हैं।
नम आंखों से दी गई 'आशा ताई' को अंतिम विदाईं
12 अप्रैल को हुए आशा भोंसले के निधन की खबर से पूरी फिल्म इंडस्ट्री में मातम पसरा है। सितारों ने सोशल मीडिया और व्यक्तिगत रूप से अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। विभिन्न हस्तियों ने उनके निधन पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी: पीएम मोदी ने शोक व्यक्त करते हुए कहा, "आशा भोंसले जी की आवाज़ ने दशकों तक हमारी संस्कृति को समृद्ध किया और करोड़ों दिलों को छुआ। उनका जाना संगीत जगत की अपूरणीय क्षति है।"
शाहरुख खान: उन्होंने आशा भोंसले के साथ अपनी यादें साझा करते हुए कहा कि आज संगीत ने अपनी रूह खो दी है।
सचिन तेंदुलकर: क्रिकेट के भगवान सचिन भी अंतिम विदाई देने शिवाजी पार्क पहुँचे। उन्होंने कहा, "ताई की आवाज़ में वो जादू था जो हर भारतीय के सुख-दुख का साथी बना।"
आमिर खान और रणबीर कपूर ने आशा भोंसले को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें एक ऐसी कलाकार बताया जिसने हर पीढ़ी को प्रेरित किया।
संगीत में अतुलनीय योगदान: 80 साल, 11 हजार गाने
आशा भोंसले का योगदान केवल गानों तक सीमित नहीं था, उन्होंने भारतीय पार्श्व गायन की परिभाषा ही बदल दी थी।
वर्सेटैलिटी की क्वीन: उन्होंने शास्त्रीय संगीत से लेकर जैज, पॉप और हिप-हॉप तक सब कुछ गाया। 'उमराव जान' की गजलें और 'तीसरी मंजिल' के रॉक गाने इस बात का प्रमाण हैं कि उनकी आवाज़ की कोई सीमा नहीं थी।
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड: 20 से अधिक भाषाओं में 11,000 से अधिक गाने रिकॉर्ड करने का विश्व रिकॉर्ड उनके नाम दर्ज है।
संगीतकारों की पसंद: ओपी नैय्यर की मस्ती हो या आरडी बर्मन का आधुनिक संगीत, आशा भोंसले हर सांचे में ढल गईं।
सुरों का कारवां थमा: गूँजती रहेगी उनकी खनक
सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने कहा- "शिवाजी पार्क की लपटों में भले ही वह पार्थिव शरीर विलीन हो गया हो, लेकिन 'पिया तू अब तो आजा' की ऊर्जा और 'अभी ना जाओ छोड़कर' की कशिश हमेशा हमारे बीच रहेगी। आशा भोंसले अपनी आवाज़ के जरिए बरसों तक याद की जाती रहेंगी।"
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