त्रिशाला दत्त ने एक्टिंग छोड़ चुना अलग करियर: अब बनीं मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट, पापा के करीब रहने के लिए आना चाहती थीं बॉलीवुड

02 मई 2026
अब बनीं मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट, पापा के करीब रहने के लिए आना चाहती थीं बॉलीवुड

संजय दत्त की बेटी त्रिशाला दत्त ने अपनी जिंदगी से जुड़ा एक अहम खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि वह कभी बॉलीवुड में आना चाहती थीं। लेकिन इसका कारण एक्टिंग का जुनून नहीं था। उनका मकसद सिर्फ अपने पिता के करीब रहना था। त्रिशाला ने यह बात एक पॉडकास्ट इंटरव्यू के दौरान कही। उन्होंने अपने बचपन, परिवार और करियर से जुड़े कई अनुभव साझा किए। यह कहानी एक स्टार किड के संघर्ष और फैसलों की अलग तस्वीर दिखाती है।

त्रिशाला ने बताया कि बचपन में उन्हें लगता था कि अगर वह फिल्मों में काम करेंगी तो अपने पिता के साथ ज्यादा समय बिता पाएंगी। वह अपने पिता के करीब आना चाहती थीं। उन्होंने कहा कि उनका यह फैसला इमोशनल था। उस समय उन्हें एक्टिंग के बारे में ज्यादा समझ नहीं थी। बस एक ही ख्वाहिश थी कि वह अपने पिता के साथ ज्यादा वक्त बिताएं।

संजय दत्त की सलाह बनी टर्निंग पॉइंट

जब त्रिशाला ने बॉलीवुड में आने की इच्छा जताई तो संजय दत्त ने उनसे एक सीधा सवाल पूछा। उन्होंने कहा कि क्या एक्टिंग सच में उनका पैशन है। इस पर त्रिशाला ने ईमानदारी से जवाब दिया कि वह सिर्फ उनके करीब रहना चाहती हैं। इसके बाद संजय दत्त ने उन्हें समझाया कि सिर्फ स्टार किड होना सफलता की गारंटी नहीं है। उन्होंने कहा कि वही काम करना चाहिए, जिसमें असली रुचि हो। यह सलाह त्रिशाला के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुई।

बचपन और पारिवारिक परिस्थितियां

त्रिशाला, संजय दत्त और उनकी पहली पत्नी रिचा शर्मा की बेटी हैं। उनकी मां का 1996 में ब्रेन ट्यूमर से निधन हो गया था। इसके बाद त्रिशाला अमेरिका में अपने नाना-नानी के साथ पली-बढ़ीं। उन्होंने बताया कि उनका बचपन सामान्य नहीं था। वह भारत कम आ पाती थीं। परिवार के साथ समय सीमित था। हालांकि, उन्होंने कहा कि जब भी वह अपने पिता के साथ होती हैं, उन्हें एक सामान्य पिता-बेटी जैसा रिश्ता महसूस होता है।

मेंटल हेल्थ को बनाया करियर

बॉलीवुड में करियर बनाने के बजाय त्रिशाला ने एक अलग रास्ता चुना। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम शुरू किया। आज वह एक थेरेपिस्ट हैं। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर खुलकर बात नहीं होती। वह इस विषय को लेकर जागरूकता फैलाना चाहती थीं। उनका मानना है कि हर व्यक्ति अपने जीवन में संघर्ष से गुजरता है और इस पर बात करना जरूरी है।

मेंटल हेल्थ पर खुलकर बोलने की जरूरत

त्रिशाला ने कहा कि समाज में अभी भी मानसिक स्वास्थ्य को लेकर झिझक है। लोग इसे छिपाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने दीपिका पादुकोण की तारीफ की, जिन्होंने डिप्रेशन जैसे मुद्दे पर खुलकर बात की। उनके मुताबिक, ऐसे कदम लोगों को प्रेरित करते हैं और उन्हें अपनी समस्याओं के बारे में बोलने का हौसला देते हैं।

संघर्ष से मिली सीख

त्रिशाला की जिंदगी आसान नहीं रही। बचपन में मां का साया उठ जाना और पिता से दूरी, यह सब उनके लिए चुनौतीपूर्ण था। लेकिन उन्होंने इन परिस्थितियों को अपनी ताकत बनाया। उन्होंने खुद को समझा और सही दिशा में आगे बढ़ने का फैसला लिया।

एक अलग पहचान की कहानी

आज त्रिशाला दत्त ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है। उन्होंने यह साबित किया है कि सफलता सिर्फ फिल्मों में नहीं, बल्कि अपने पैशन को पहचानने में होती है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि सही मार्गदर्शन और आत्मविश्वास से कोई भी अपनी राह बना सकता है।

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