कांस फिल्म फेस्टिवल में नेपाली सिनेमा का बड़ा मुकाम: ‘एलिफेंट्स इन द फॉग’ ने जीता जूरी पुरस्कार, ट्रांसजेंडर समुदाय के दर्द और संघर्ष की अनकही दास्तां

नेपाल की फिल्म इंडस्ट्री ने इंटरनेशनल मंच पर नया इतिहास रच दिया है। नेपाली फिल्म ‘एलिफेंट्स इन द फॉग’ ने दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित फिल्म समारोहों में शामिल कांस फिल्म फेस्टिवल में बड़ा सम्मान हासिल करते हुए ‘अन सर्टेन रिगार्ड’ श्रेणी का जूरी पुरस्कार अपने नाम कर लिया। यह उपलब्धि हासिल करने वाली यह पहली नेपाली फिल्म बन गई है। इस जीत के बाद नेपाल ही नहीं, पूरे दक्षिण एशियाई सिनेमा जगत में खुशी और उत्साह का माहौल है।
फिल्म का निर्देशन युवा फिल्मकार अभिनाश बिक्रम शाह ने किया है। खास बात यह है कि यह उनकी पहली फीचर फिल्म है, जिसने अपने पहले ही प्रयास में वैश्विक स्तर पर पहचान बना ली। इससे पहले भी यह फिल्म चर्चा में तब आई थी, जब इसे ‘अन सर्टेन रिगार्ड’ सेक्शन के लिए चुना गया। इस श्रेणी को कांस महोत्सव में उभरते निर्देशकों और अलग विषयों पर आधारित फिल्मों के लिए बेहद प्रतिष्ठित माना जाता है।
समाज के हाशिये की कहानी को मिला वैश्विक मंच
फिल्म की कहानी नेपाल के दक्षिणी तराई क्षेत्र में स्थित थोरी गांव के इर्द-गिर्द घूमती है, जो जंगलों और सामाजिक चुनौतियों से घिरा इलाका माना जाता है। ‘एलिफेंट्स इन द फॉग’ में समाज के हाशिये पर जीवन जी रही ट्रांसजेंडर महिलाओं के संघर्ष, अस्मिता और सामाजिक उपेक्षा को बेहद संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत किया गया है। फिल्म अपने भावनात्मक कथानक और यथार्थवादी प्रस्तुति के कारण इंटरनेशनल जूरी और दर्शकों दोनों को प्रभावित करने में सफल रही। फिल्म समीक्षकों के अनुसार, यह सिर्फ एक क्षेत्रीय कहानी नहीं बल्कि सामाजिक स्वीकार्यता, पहचान और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा वैश्विक विषय है। यही वजह रही कि फिल्म ने कांस जैसे इंटरनेशनल मंच पर अलग पहचान बनाई।
इंटरनेशनल सहयोग से तैयार हुई फिल्म
यह फिल्म नेपाल की प्रोडक्शन कंपनियों अंडरग्राउंड टॉकीज नेपाल और जयंती क्रिएशंस के सहयोग से बनाई गई है। इसके निर्माण में फ्रांस, जर्मनी, ब्राजील और नॉर्वे के फिल्म निर्माताओं का भी सहयोग शामिल रहा। इंटरनेशनल साझेदारी के चलते फिल्म की तकनीकी गुणवत्ता और प्रस्तुति को विश्वस्तरीय स्वरूप मिला। इस उपलब्धि से नेपाली सिनेमा को वैश्विक पहचान मिलेगी और आने वाले समय में नेपाल के स्वतंत्र फिल्मकारों के लिए नए अवसर खुलेंगे। साथ ही यह दक्षिण एशियाई फिल्मों में सामाजिक मुद्दों पर आधारित कंटेंट को भी इंटरनेशनल लेवल पर मजबूती प्रदान करेगा।
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