बांग्लादेश में पूर्व क्रिकेटर शाकिब के घर हमला: उपद्रवियों ने की पत्थरबाजी, शेख हसीना के कार्यक्रम में शामिल होने पर बवाल

बांग्लादेश के पूर्व क्रिकेटर और अवामी लीग के पूर्व सांसद शाकिब अल हसन के मगुरा स्थित आवास पर हमला कर दिया गया। यह घटना पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में शाकिब की मौजूदगी के कुछ घंटे बाद हुई। पुलिस के अनुसार, उपद्रवियों ने घर पर पथराव किया, खिड़कियों के शीशे तोड़ दिए और पेट्रोल से आग लगाने का भी प्रयास किया। घटना के समय मकान खाली था, इसलिए कोई जनहानि नहीं हुई। फिलहाल शाकिब श्रीलंका में हैं। घटना के बाद इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
जानकारी के अनुसार, मगुरा सदर पुलिस के अधिकारी मोहम्मद अब्दुल्ला अल मामून ने बताया कि कुछ लोगों ने घर पर पत्थर फेंककर खिड़कियां क्षतिग्रस्त कर दीं। इसके बाद हमलावरों ने मकान में आग लगाने की कोशिश की। दावा किया जा रहा है कि इसके लिए कोल्ड ड्रिंक की बोतलों में पेट्रोल भरकर लाया गया था। हालांकि, घर में कोई मौजूद नहीं होने के कारण किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।
हसीना की वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में दिखे थे शाकिब
हमले से कुछ घंटे पहले ही पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने करीब दो वर्ष बाद वर्चुअल माध्यम से समर्थकों को संबोधित किया था। करीब 25 मिनट तक चले इस कार्यक्रम में शाकिब अल हसन भी शामिल हुए। उनके अलावा शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद जॉय और पूर्व शिक्षा मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी भी मौजूद थे। बताया गया कि संबोधन के दौरान शेख हसीना का कैमरा बंद रहा।
सांसद रहते हुए भी जारी रखा क्रिकेट करियर
शाकिब अल हसन अवामी लीग के सांसद बनने के बाद भी क्रिकेट खेलते रहे। अगस्त 2024 में बांग्लादेश में आरक्षण विरोधी छात्र आंदोलन और उसके बाद राजनीतिक उथल-पुथल के दौरान उनकी काफी आलोचना हुई थी। आरोप लगाया गया था कि अवामी लीग के सांसद होने के बावजूद उन्होंने आंदोलन के दौरान चुप्पी बनाए रखी।
पहले भी बन चुका है निशाना
शेख हसीना सरकार के सत्ता से हटने के बाद देशभर में अवामी लीग से जुड़े कई नेताओं और पूर्व सांसदों के घरों पर हमले हुए थे। उस दौरान भी मगुरा स्थित शाकिब के घर को निशाना बनाया गया था। उस समय भी वह घर पर मौजूद नहीं थे।
हत्या के मामले में भी दर्ज है केस
अगस्त 2024 में हुए राजनीतिक घटनाक्रम के दौरान शाकिब बांग्लादेश छोड़कर विदेश चले गए थे। बाद में छात्र आंदोलन के दौरान एक व्यक्ति की मौत से जुड़े हत्या के मामले समेत उनके खिलाफ कई आपराधिक केस दर्ज किए गए। उस समय वह देश से बाहर थे, इसलिए पुलिस उन्हें अरेस्ट नहीं कर सकी।










