अमेरिका का पलटवार: ईरान पर की एयर स्ट्राइक, बहरीन में अमेरिकी नौसेना बेस पर ईरान ने किया ड्रोन हमला

10 जून 2026
ईरान पर की एयर स्ट्राइक, बहरीन में अमेरिकी नौसेना बेस पर ईरान ने किया ड्रोन हमला

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने मंगलवार रात ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार यह कार्रवाई होर्मुज स्ट्रेट के निकट अमेरिकी AH-64 अपाचे हेलिकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने की घटना और क्षेत्र में अमेरिकी हितों पर बढ़ते खतरों के जवाब में की गई। वहीं ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई को आक्रामक कदम बताते हुए जवाबी कार्रवाई का दावा किया है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा है कि उसने बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और अमेरिकी नौसेना के फिफ्थ फ्लीट मुख्यालय को ड्रोन हमलों से निशाना बनाया है। दोनों देशों के दावों और जवाबी दावों के बीच पूरे पश्चिम एशिया में सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि नियमित गश्त के दौरान अमेरिकी अपाचे हेलिकॉप्टर को ईरान ने मार गिराया। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हेलिकॉप्टर में सवार दोनों पायलट सुरक्षित हैं। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका अपने सैनिकों और सैन्य संसाधनों पर हमले को नजरअंदाज नहीं कर सकता तथा इस घटना का जवाब देना आवश्यक था। दूसरी ओर, कुछ अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि हेलिकॉप्टर संभवतः एक ईरानी ड्रोन से टकराने के बाद दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। घटना के वास्तविक कारणों की जांच अभी जारी है, जिससे इस मामले को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।

ईरान का पलटवार

अमेरिकी हमलों के कुछ घंटों बाद ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया कि उसने बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमले किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी नौसेना के फिफ्थ फ्लीट मुख्यालय सहित कई सैन्य परिसरों को निशाना बनाया गया। ईरान ने कहा कि यह कार्रवाई उसके दक्षिणी क्षेत्रों पर हुए अमेरिकी हमलों के प्रतिरोध में की गई। हालांकि अमेरिकी सेना ने अभी तक इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है। इसके बावजूद बहरीन में सुरक्षा एजेंसियों ने एहतियातन एयर रेड सायरन बजाए। नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह जारी की।

जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर भी हमले का दावा

तनाव के बीच ईरान ने एक और बड़ा दावा करते हुए कहा कि उसने जॉर्डन के एक एयरबेस पर लंबी दूरी की मिसाइलों से हमला किया है। IRGC के मुताबिक इस हमले में F-35 लड़ाकू विमानों के हैंगर, कमांड सेंटर और अन्य महत्वपूर्ण सैन्य ढांचों को नुकसान पहुंचाया गया। ईरान का कहना है कि उसने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति से जुड़े कुल 21 लक्ष्यों को निशाना बनाया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।

MQ-9 रीपर ड्रोन गिराने का भी दावा

ईरान ने दावा किया है कि उसकी वायु रक्षा इकाइयों ने दक्षिणी ईरान के जाम क्षेत्र में एक अमेरिकी MQ-9 रीपर ड्रोन को मार गिराया है। ईरानी ने इससे जुड़ा एक वीडियो भी जारी किया है। हालांकि अमेरिकी रक्षा विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। यदि यह दावा सही साबित होता है तो यह दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव को और गंभीर बना सकता है।

होर्मुज स्ट्रेट के आसपास बढ़ी हलचल

अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान ईरान के रणनीतिक बंदरगाह शहर बंदर अब्बास और केश्म द्वीप के आसपास कई धमाकों की आवाजें सुनाई देने की खबरें सामने आई हैं। ये दोनों क्षेत्र होर्मुज स्ट्रेट के निकट स्थित हैं। जिसे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की दृष्टि से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है। सुरक्षा एजेंसियां घटनाओं की जांच में जुटी हैं। जबकि क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ने की सूचनाएं भी सामने आ रही हैं।

तेल बाजार पर दिखा असर

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी दिखाई दिया। सैन्य घटनाक्रम के बाद इंटरनेशनल बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग एक प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड 92 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी मजबूत बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट में अस्थिरता बढ़ती है तो वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

अमेरिका बोला- सैन्य अभियान पूरा, ईरान ने दी चेतावनी

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि ईरान के खिलाफ उसकी जवाबी सैन्य कार्रवाई पूरी हो चुकी है। अमेरिकी सेना के अनुसार हवाई हमलों में ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, निगरानी रडार और ग्राउंड कंट्रोल स्टेशनों को निशाना बनाया गया। दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी कि ईरान अपने खिलाफ होने वाले हर हमले का जवाब देगा। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका क्षेत्र में तनाव नहीं चाहता तो उसे ईरान के आसपास की सैन्य गतिविधियों पर पुनर्विचार करना चाहिए।

कूटनीतिक संकेत भी जारी

सैन्य तनाव के बीच अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने संकेत दिया कि वॉशिंगटन अब भी कूटनीतिक समाधान के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि उनकी समझ के अनुसार ईरान व्यापक युद्ध नहीं चाहता और बातचीत के रास्ते तलाश रहा है। वहीं इजराइल ने भी स्पष्ट किया है कि यदि आवश्यक हुआ तो वह ईरान के खिलाफ भविष्य में फिर सैन्य कार्रवाई कर सकता है। इजराइली सेना प्रमुख एयाल जामिर ने कहा कि हालिया अभियान क्षेत्रीय सुरक्षा रणनीति का हिस्सा था। देश किसी भी खतरे का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

पूरे पश्चिम एशिया पर मंडरा रहा अस्थिरता का खतरा

अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने पूरे पश्चिम एशिया को एक बार फिर तनाव के केंद्र में ला खड़ा किया है। बहरीन, जॉर्डन, होर्मुज स्ट्रेट और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ी सुरक्षा सतर्कता इस बात का संकेत है कि हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि दोनों पक्षों के बीच टकराव का दायरा और बढ़ा तो इसका असर न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और इंटरनेशनल व्यापार पर भी पड़ सकता है।

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