गहरी सांस लेने से मस्तिष्क और नर्वस सिस्टम रहता है शांत: सक्रिय होता है पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम, रिसर्च में खुलासा

सही तरीके से सांस लेने का विज्ञान हमारे मस्तिष्क और नर्वस सिस्टम को तुरंत शांत कर सकता है। जब हम अपनी सांसों की गति को धीमा और गहरा करते हैं, तो शरीर का पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय हो जाता है, जिससे तनाव पैदा करने वाला 'फाइट या फ्लाइट' मोड बंद हो जाता है।
गहरी सांस लेने से कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन्स का स्तर गिरता है। धीमी और लयबद्ध सांसें दिल की धड़कन और रक्तचाप को सामान्य करती हैं। नियंत्रित ब्रीदिंग से दिमाग में ऑक्सीजन का स्तर सुधरता है और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है। साथ ही गहरी सांसें फेफड़ों को पूरी तरह काम करने में मदद करती हैं। विज्ञान के अनुसार सही ब्रीदिंग पैटर्न क्रोनिक दर्द की अनुभूति को कम करता है।
नियंत्रित और गहरी सांस के सकारात्मक प्रभाव
कई अध्ययनों में पाया गया है कि नियंत्रित और गहरी सांस लेने वाले व्यायाम शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति को बेहतर बनाने, तनाव के स्तर को कम करने, हृदय की कार्यक्षमता सुधारने और ब्लड प्रेशर को कम करने में मददगार हैं। यही नहीं, नियमित श्वास अभ्यास से नींद की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है, एकाग्रता बढ़ सकती है और शरीर की रिकवरी क्षमता पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
सांसों पर नियंत्रण की आदत बनाती है मजबूत
विशेषज्ञ कहते हैं, कभी-कभी मेहनत वाला कोई काम करते वक्त हम गहरी सांस लेते हैं और फिर नई ऊर्जा से जुट जाते हैं। गहरी सांस लेने और धीरे-धीरे छोड़ने की प्रक्रिया न सिर्फ तनाव घटाती है बल्कि नए जोश से भर देती है। इसी को लेकर जर्नल न्यूरॉन में छपी रिसर्च के मुताबिक, अगर सांसों पर नियंत्रण को आदत बना लिया जाए तो जिंदगी में जोखिम भरे फैसले लेने में कोई हिचकिचाहट नहीं होगी।
धीमी गति से सांस छोड़ने पर सक्रिय होता है तंत्रिका तंत्र
वैज्ञानिकों के मुताबिक, जब थोड़ी देर सांस रोककर धीरे-धीरे छोड़ते हैं तो पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम यानी शरीर का आराम देने वाला तंत्रिका तंत्र सक्रिय हो जाता है। ब्रेन स्कैन से पता चला कि इस दौरान दिल और फेफड़ों ने दिमाग को शांत करने वाले संकेत पहुंचने लगते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि सांस को साधकर तनाव, चिंता, पैनिक डिसऑर्डर और खान-पान की आदतें सुधारी जा सकती हैं।
शारीरिक और मानसिक रूप से होते है स्वस्थ
एक अध्ययन में पाया गया कि गहरी सांसें लेना या यूं कहें कि अचानक ठंडी आहें भरने से आपके शरीर में बदलाव की प्रक्रिया शुरू होती है। उस वक्त आपके शरीर का रीसेट बटन चालू हो जाता है। किसी शारीरिक गतिविधि या भावनात्मक स्थिति में अचानक बदलाव के अनुकूल शरीर तैयार होने लगता है। अध्ययन में एक टीम को स्क्रीन पर कंट्रास्ट बदलने वाले पैटर्न क्लिक करने का काम देकर उनके ध्यान और सांसों के डाटा को टैक किया गया। जबकि दूसरी टीम ने 21 मिनट तक धुनों के साथ लयबद्ध क्लिक करने का कार्य किया। इस दौरान बदलाव मापा गया।
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