अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड बना दिल का दुश्मन: 20% तक बढ़ा हार्ट डिजीज का खतरा, रिपोर्ट में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों का खानपान तेजी से बदल रहा है। घर के ताजे भोजन की जगह अब पैकेट बंद खाने ने ले ली है। इंस्टेंट नूडल्स, चिप्स, कोल्ड ड्रिंक्स और रेडी-टू-ईट फूड अब रोजमर्रा की आदत बन चुके हैं। लेकिन यही सुविधा अब दिल की सेहत पर भारी पड़ रही है। यूरोपियन कार्डियोलॉजी सोसायटी की हालिया रिपोर्ट ने बड़ा खुलासा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड का लगातार सेवन हृदय रोगों का खतरा करीब 20 फीसदी तक बढ़ा सकता है। एक्सपर्ट्स ने इसे आने वाले समय का बड़ा हेल्थ अलर्ट बताया है।
यूरोपियन कार्डियोलॉजी सोसायटी की रिपोर्ट में अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड को गंभीर स्वास्थ्य खतरा बताया गया है। यह अध्ययन यूरोपियन हार्ट जर्नल में प्रकाशित हुआ है। रिसर्च में पाया गया कि जो लोग अधिक मात्रा में प्रोसेस्ड फूड खाते हैं, उनमें दिल की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दिल की अनियमित धड़कन का खतरा करीब 13 फीसदी तक बढ़ जाता है। वहीं कुछ मामलों में हृदय संबंधी मौतों का जोखिम 65 फीसदी तक अधिक पाया गया। एक्सपर्ट्स का कहना है कि दुनिया भर में हृदय रोग पहले ही मौत का बड़ा कारण बने हुए हैं। ऐसे में यह नई चेतावनी बेहद गंभीर मानी जा रही है।
क्या होते हैं अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड?
अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड औद्योगिक स्तर पर तैयार किए जाते हैं। इनमें कई कृत्रिम तत्व मिलाए जाते हैं। स्वाद बढ़ाने वाले केमिकल्स डाले जाते हैं। लंबे समय तक सुरक्षित रखने वाले प्रिजरवेटिव्स मिलाए जाते हैं। रंग और खुशबू बढ़ाने वाले एडिटिव्स भी इस्तेमाल होते हैं। पैकेट वाले चिप्स, फ्रोजन पिज्जा, प्रोसेस्ड मीट, ब्रेकफास्ट सीरियल्स और सॉफ्ट ड्रिंक्स इसी श्रेणी में आते हैं। इन खाद्य पदार्थों का मकसद केवल स्वाद बढ़ाना होता है। लेकिन पोषण के मामले में ये बेहद कमजोर माने जाते हैं।
शरीर के मेटाबॉलिज्म पर पड़ता है असर
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड शरीर के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करते हैं। इससे शरीर की ऊर्जा प्रणाली कमजोर होने लगती है। ऐसे खाद्य पदार्थ शरीर में सूजन बढ़ाते हैं। आंतों के लाभकारी बैक्टीरिया का संतुलन बिगाड़ते हैं। कई प्रोसेस्ड फूड इस तरह डिजाइन किए जाते हैं कि लोग उन्हें ज्यादा मात्रा में खाएं। इससे भूख और तृप्ति की प्राकृतिक प्रक्रिया प्रभावित होती है। यही वजह है कि लोग जरूरत से ज्यादा खाना शुरू कर देते हैं। धीरे-धीरे मोटापा बढ़ने लगता है। इसके बाद उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी बीमारियां जन्म लेती हैं। यही समस्याएं आगे चलकर दिल को कमजोर करती हैं।
बदलती लाइफस्टाइल बना रही हालात खतरनाक
एक्सपर्ट्स का कहना है कि आधुनिक लाइफस्टाइल इस समस्या की बड़ी वजह बन रही है। लोगों के पास खाना बनाने का समय कम होता जा रहा है। ऑफिस का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऑनलाइन फूड डिलीवरी ने भी खाने की आदतें बदल दी हैं। कुछ मिनटों में मिलने वाला पैकेट बंद भोजन अब लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है। खासतौर पर युवा वर्ग तेजी से प्रोसेस्ड फूड की ओर बढ़ रहा है। इसका असर आने वाले वर्षों में और गंभीर हो सकता है।
डॉक्टरों ने दी सतर्क रहने की सलाह
हेल्थ एक्सपर्ट्स ने लोगों को खानपान को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। डॉक्टरों का कहना है कि ताजा और संतुलित भोजन दिल की सुरक्षा के लिए जरूरी है। घर का बना खाना शरीर को बेहतर पोषण देता है। फल, हरी सब्जियां और प्राकृतिक खाद्य पदार्थ हृदय को मजबूत रखते हैं। एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि सुविधा और स्वाद के नाम पर बदलती आदतें भविष्य में बड़ी बीमारियों का कारण बन सकती हैं। इसलिए समय रहते खानपान में सुधार बेहद जरूरी माना जा रहा है।
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