बिहार में 'नीतीश युग' समाप्त: पहली बार बिहार में बीजेपी का मुख्यमंत्री; विधायक दल के नेता चुने गए सम्राट चौधरी; 15 अप्रैल को सुबह 11 बजे लेंगे शपथ

पटना|14 अप्रैल 2026
पहली बार बिहार में बीजेपी का मुख्यमंत्री; विधायक दल के नेता चुने गए सम्राट चौधरी; 15 अप्रैल को सुबह 11 बजे लेंगे शपथ

बिहार की राजनीति में आज का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज होने जा रहा है। पिछले दो दशकों से राज्य की सत्ता के केंद्र रहे नीतीश कुमार के इस्तीफे के साथ ही बिहार में 'नीतीश युग' का समापन हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के कद्दावर नेता और वर्तमान उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को बीजेपी विधायक दल का नया नेता चुन लिया गया है। इसके साथ ही यह साफ हो गया है कि सम्राट चौधरी बिहार के अगले मुख्यमंत्री होंगे।

आज पटना में हुई बीजेपी विधायक दल की बैठक में सम्राट चौधरी के नाम पर मुहर लगी। बैठक के बाद सम्राट चौधरी ने वरिष्ठ नेताओं के साथ राजभवन जाने का समय मांगा है, जहाँ वे राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। कल यानी 15 अप्रैल 2026 को सुबह 11 बजे पटना के लोकभवन में भव्य शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा। यह बिहार के इतिहास में पहली बार होगा जब बीजेपी का कोई नेता मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालेगा।

कौन हैं सम्राट चौधरी?

57 वर्षीय सम्राट चौधरी बिहार बीजेपी के सबसे आक्रामक और प्रभावशाली ओबीसी (कुशवाहा) चेहरों में गिने जाते हैं। 16 नवंबर 1968 को मुंगेर के लखनपुर में जन्मे सम्राट एक प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार के दिग्गज नेता रहे हैं और सात बार विधायक व सांसद रह चुके हैं।

सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर

कम उम्र में बन गए मंत्री: उन्होंने महज 30 साल की उम्र में 1999 में राबड़ी देवी की सरकार में कृषि मंत्री बनकर अपनी धमक दिखाई थी।

विभिन्न दलों में रहने का अनुभव: बीजेपी में आने से पहले वे राजद और जदयू में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।

बीजेपी में कद बढ़ा: 2018 में बीजेपी में शामिल होने के बाद उन्होंने तेजी से प्रगति की। उन्हें बिहार बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया और नीतीश सरकार के पिछले कार्यकाल में वे पंचायती राज मंत्री और फिर उपमुख्यमंत्री (गृह विभाग के साथ) रहे।

जब पहनी सांकेतिक पगड़ी: नीतीश कुमार से अलग होने के बाद उन्होंने सिर पर 'मुरैठा' (पगड़ी) बांधकर संकल्प लिया था कि जब तक बीजेपी का मुख्यमंत्री नहीं बनेगा, वे इसे नहीं खोलेंगे। आज उनका वह संकल्प पूरा होता दिख रहा है।

नीतीश कुमार राज्यसभा में: क्यों छोड़ी मुख्यमंत्री की कुर्सी?

नीतीश कुमार साल 2005 से (बीच के कुछ महीनों को छोड़कर) लगातार बिहार के मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने रिकॉर्ड 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। लेकिन 2026 की शुरुआत में ही उन्होंने सक्रिय राज्य राजनीति से हटकर राष्ट्रीय राजनीति में जाने के संकेत दे दिए थे।

हाल में ही नीतीश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। दरअसल, नीतीश कुमार हाल ही में निर्विरोध राज्यसभा सदस्य चुने गए हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि नीतीश कुमार अब केंद्र की राजनीति में बड़ी भूमिका निभाना चाहते हैं। उन्होंने खुद भी इच्छा जाहिर की थी कि वे अपने संसदीय करियर में संसद के दोनों सदनों (लोकसभा व राज्यसभा) और बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों का सदस्य रहने का 'विशिष्ट गौरव' प्राप्त करना चाहते हैं। राज्यसभा जाकर उन्होंने अपना यह सपना पूरा किया है। साथ ही, बिहार में बीजेपी की बढ़ती ताकत और 2025 के चुनाव परिणामों के बाद यह तय माना जा रहा था कि इस बार नेतृत्व परिवर्तन होगा।

बिहार की सियासत में 'महा-बदलाव': अब क्या बदलेगा?

सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने से बिहार की सत्ता का संतुलन पूरी तरह बदल जाएगा। बीजेपी अब 'जूनियर पार्टनर' की भूमिका से निकलकर 'लीडर' की भूमिका में आ गई है। सम्राट चौधरी अपनी सख्त कार्यशैली और प्रशासनिक पकड़ के लिए जाने जाते हैं। गृह विभाग उनके पास होने के कारण पहले से ही वे कानून-व्यवस्था पर काम कर रहे थे, अब बतौर मुख्यमंत्री उनके पास विकास और सुशासन की दोहरी चुनौती होगी।

15 अप्रैल को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह के लिए पटना को होर्डिंग्स और पोस्टरों से पाट दिया गया है। एनडीए के तमाम बड़े नेताओं और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस समारोह में शामिल होने या वर्चुअली संदेश देने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। बिहार के लिए यह वाकई एक नए राजनीतिक सवेरे की शुरुआत है।

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