समुद्र की गहराइयों में खजाना तलाशेगा भारत- पीएम मोदी: तय करने होंगे बड़े लक्ष्य, नए अवसरों का लाभ उठाना जरूरी

नई दिल्ली|15 अगस्त 2026
तय करने होंगे बड़े लक्ष्य, नए अवसरों का लाभ उठाना जरूरी

देश आज 80वां स्वतंत्रता दिवस राष्ट्रीय गौरव और उत्साह के साथ मना रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से लगातार 13वीं बार राष्ट्रध्वज फहराया और देशवासियों को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विकसित भारत के लक्ष्य से लेकर वैश्विक आपूर्ति शृंखला, विनिर्माण, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, ऊर्जा सुरक्षा और युवाओं की भूमिका पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारत को अपनी क्षमता के अनुरूप बड़े लक्ष्य तय करने होंगे।

स्वतंत्रता दिवस समारोह को देखते हुए राजधानी दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। लाल किले और आसपास के इलाकों में बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा बनाया गया है। सुरक्षा व्यवस्था में 25 हजार से अधिक जवान तैनात किए गए हैं। इसके अलावा एक हजार से ज्यादा एआई आधारित सीसीटीवी कैमरों और एंटी-टेरर रिस्पॉन्स मैकेनिज्म के जरिए सुरक्षा पर नजर रखी जा रही है।

हिंसा फैलाने वालों से रहें सतर्क

प्रधानमंत्री मोदी ने समाज में हिंसा और अराजकता को बढ़ावा देने वाली मानसिकता के खिलाफ सतर्क रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग समाज को गलत दिशा में ले जाने के लिए तरह-तरह के दांव चल रहे हैं। ऐसे तत्वों को पहचानना और उनके प्रयासों के प्रति सजग रहना जरूरी है। उन्होंने कहा कि देश को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए युवा पीढ़ी को सकारात्मक सोच के साथ राष्ट्र निर्माण से जोड़ना होगा। युवाओं की ऊर्जा को हिंसा और अराजकता से दूर रखकर विकास, एकता और रचनात्मक कार्यों में लगाना जरूरी है। समाज को बांटने या युवाओं को गलत राह पर ले जाने वाली मानसिकता के खिलाफ जागरूकता जरूरी है।

डिजाइन से उत्पादन तक भारत बने दुनिया की भरोसेमंद फैक्ट्री

प्रधानमंत्री ने कहा कि डिजाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का भरोसेमंद केंद्र बनना होगा। उन्होंने विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों से इस अवसर को नहीं गंवाने की अपील की। भारत को लागत, गुणवत्ता और पैमाने के वैश्विक मानकों पर खरा उतरना होगा।

दुनिया के बाजारों तक पहुंचें भारतीय उत्पाद

प्रधानमंत्री ने कृषि और फूड प्रोसेसिंग को विकास की दूसरी महत्वपूर्ण शक्ति बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय किसानों के लिए दुनिया के बाजार खुल चुके हैं। एफटीए के कारण भारत को बड़ा बाजार मिल रहा है और अब वहां पहुंच बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि किसानों को खेत से लेकर एक्सपोर्ट मार्केट तक जोड़ना होगा। भारत के पारंपरिक खानपान, मिलेट्स, मसाले और फल-फूल वैश्विक ब्रांड बनने चाहिए। कृषि उत्पादों की गुणवत्ता, प्रसंस्करण और निर्यात को बढ़ाकर किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार का लाभ दिलाया जा सकता है।

5-7 साल में बदलनी होगी विकास की रफ्तार

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आने वाले पांच से सात वर्षों में भारत को वह हासिल करने का प्रयास करना है, जो पिछले पांच से सात दशकों में नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि सरकार आने वाले वर्षों में सुधार की दिशा में आगे बढ़ रही है। सोच में सुधार के साथ लक्ष्यों में भी सुधार जरूरी है। उन्होंने कहा कि देश के सामने अब ऐसे लक्ष्य होने चाहिए, जो भारत की वास्तविक क्षमता के अनुरूप हों। विकास की रफ्तार बढ़ाने के लिए पुरानी सोच से बाहर निकलना और नए अवसरों का लाभ उठाना जरूरी है।

स्थिर सरकार और व्यापार समझौते

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के पास स्थिर राजनीतिक जनादेश, स्थिर सरकार, जीवंत लोकतंत्र, मजबूत न्यायपालिका और सभी का मार्गदर्शन करने वाला संविधान है। उन्होंने हाल में हुए व्यापार समझौतों को देश के लिए शानदार अवसर बताया। प्रधानमंत्री ने एमएसएमई क्षेत्र से इस अवसर को नहीं गंवाने की अपील की। उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों और कारोबार की पहुंच बढ़ाने के लिए इन अवसरों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

सोच की सीमा रोकती है विकास

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि किसी देश की तरक्की अक्सर संसाधनों की कमी से नहीं रुकती बल्कि सोच की सीमाएं उसकी प्रगति को रोक देती हैं। जब सोच ठहर जाती है और दायरा सीमित हो जाता है, तो देश अपनी वास्तविक क्षमता को पहचान नहीं पाता। उन्होंने कहा कि आज भी भारत कच्चे तेल के लिए दूसरे देशों पर निर्भर है और यह स्थिति गलत सोच का नतीजा है। प्रधानमंत्री ने समुद्र के संसाधनों का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत के समुद्र तट का 99 प्रतिशत हिस्सा कभी ‘नो-गो एरिया’ घोषित था। यानी वहां जाने की अनुमति नहीं थी।

99% नो-गो जोन को बनाया गो-अहेड जोन

प्रधानमंत्री ने कहा कि समुद्र की गहराइयों को खंगालने और वहां मौजूद संसाधनों की खोज करने का विचार ही छोड़ दिया गया था। उन्होंने इसे सोच की गरीबी बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने इस स्थिति को बदलते हुए उस 99 प्रतिशत हिस्से को अब ‘गो-अहेड जोन’ बना दिया है। अब समुद्र की गहराई में खोज करने और नए भंडार तलाशने का काम तेजी से किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले साल इस दिशा में ‘समुद्र मंथन’ पहल की घोषणा की गई थी। हाल ही में इस काम को और गति देने के लिए 85 हजार करोड़ रुपये आवंटित करने का फैसला किया गया है। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी क्षमता और संसाधनों का पूरा इस्तेमाल करते हुए ऊर्जा सुरक्षा समेत विकास के हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ना होगा।

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