आगरा में गांधी जयंती पर लगे गोडसे के होर्डिंग और बैनर: हिंदूवादी संगठनों ने श्राद्ध और तर्पण कार्यक्रम का किया ऐलान, तनावपूर्ण हुआ माहौल

आगरा में गांधी जयंती पर गोडसे के पोस्टर पर भारी विवाद खड़ा हो गया है। गांधी जयंती के दिन शहर में हिंदूवादी संगठन द्वारा महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे के श्राद्ध और तर्पण कार्यक्रम का ऐलान किया गया था। इस घोषणा के बाद शहर के कई इलाकों में गोडसे की तस्वीरों वाले होर्डिंग और बैनर लगा दिए गए, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। प्रशासन ने तुरंत एक्शन लेते हुए इन बैनरों को हटवा दिया है और मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है।
हिंदूवादी संगठनों ने शहर के एमजी रोड, यमुना किनारा और बल्केश्वर जैसे प्रमुख इलाकों में नाथूराम गोडसे के पोस्टर लगाए थे। इन पोस्टरों के जरिए ऐलान किया गया था कि पितृपक्ष के तहत दो अक्टूबर को सुबह 11 बजे यमुना किनारे बेलनगंज स्थित आरती स्थल पर गोडसे का श्राद्ध और तर्पण किया जाएगा। अखिल भारत हिंदू महासभा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अज्जू चौहान और अन्य नेताओं का कहना है कि यह पितृपक्ष की सनातनी परंपरा का हिस्सा है। उनका दावा है कि गोडसे ने देश के लिए बलिदान दिया था, इसलिए उनका तर्पण किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के लिए मथुरा-वृंदावन से साधु-संतों को बुलाने और विशेष प्रसाद बांटने की भी तैयारी की गई थी।
गांधीवादियों ने जताई आपत्ति
गांधी जयंती के पवित्र अवसर पर गोडसे के महिमामंडन को लेकर शहर के गांधीवादी संगठनों और नागरिकों ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि राष्ट्रपिता के अपमान और युवाओं में गलत संदेश जाने से रोकने के लिए इन होर्डिंग्स को तुरंत हटाया जाए। शहर में कानून-व्यवस्था न बिगड़े और तनाव की स्थिति को देखते हुए आगरा पुलिस ने रात और सुबह के वक्त कार्रवाई करते हुए शहर के अलग-अलग कोनों से गोडसे के सभी विवादित पोस्टर-बैनर फाड़कर हटा दिए।
यमुना किनारे भारी फोर्स तैनात
किसी भी अप्रिय घटना को रोकने और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। यमुना किनारे प्रस्तावित कार्यक्रम स्थल और शहर के प्रमुख चौराहों पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और खुफिया तंत्र के जरिए स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।










