बस्ती में 5 दिव्यांग प्रमाण-पत्र संदिग्ध: जांच में मुहर सही मगर रिकॉर्ड गायब, दस्तावेज न मिलने पर दर्ज होगी FIR

बस्ती|
जांच में मुहर सही मगर रिकॉर्ड गायब, दस्तावेज न मिलने पर दर्ज होगी FIR

जिले में यूडीआईडी कार्ड बनाने की ऑनलाइन प्रक्रिया के दौरान दिव्यांग प्रमाण-पत्रों से जुड़े पांच संदिग्ध आवेदन सामने आए हैं। इन प्रमाण-पत्रों पर सीएमओ और मेडिकल बोर्ड के चिकित्सकों की मुहर व हस्ताक्षर दर्ज हैं, लेकिन जिला अस्पताल के मूल रजिस्टर में संबंधित प्रमाण-पत्रों का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पांचों आवेदकों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण और प्रमाण मांगे हैं। विभाग का कहना है कि संतोषजनक जवाब या दस्तावेज नहीं मिलने पर एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी।

जिला अस्पताल में प्रत्येक सोमवार को मेडिकल बोर्ड के चिकित्सक दिव्यांग प्रमाण-पत्र के लिए आवेदकों की जांच करते हैं। मेडिकल परीक्षण के बाद मैनुअल प्रमाण-पत्र जारी किया जाता है। इसके बाद लाभार्थी या संबंधित विभाग प्रमाण-पत्र को विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन करता है। सीएमओ कार्यालय के संबंधित पटल पर आवेदन और प्रमाण-पत्र की जांच होती है। दस्तावेज सही पाए जाने के बाद आवेदन आगे बढ़ाया जाता है और प्रक्रिया पूरी होने पर यूडीआईडी कार्ड जारी होता है। इसी ऑनलाइन वेरिफिकेशन के दौरान पांच प्रमाण-पत्र संदेह के घेरे में आए।

जांच रिपोर्ट में मिली गड़बड़ी

संदिग्ध प्रमाण-पत्रों की जारी तिथि के आधार पर जिला अस्पताल के मूल रजिस्टर से रिकॉर्ड का मिलान कराया गया। जांच के दौरान संबंधित आवेदकों के नाम रजिस्टर में दर्ज नहीं मिले। कुछ प्रमाण-पत्रों पर सीएमओ और मेडिकल बोर्ड के चिकित्सकों की मुहर व हस्ताक्षर प्रथम दृष्टया सही पाए गए हैं। हालांकि, चिकित्सकों की ओर से दर्ज जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी मिली है। इससे प्रमाण-पत्र तैयार करने की पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए हैं और विभाग ने अब संबंधित आवेदकों से दस्तावेजी जवाब मांगा है।

पुराने रिकॉर्ड की जांच से बढ़ सकता है दायरा

स्वास्थ्य विभाग के पास पिछले एक-दो वर्षों में जारी दिव्यांग प्रमाण-पत्रों का मूल रजिस्टर, मैनुअल प्रमाण-पत्र, ऑनलाइन आवेदन और यूडीआईडी कार्ड का रिकॉर्ड मौजूद है। इन सभी दस्तावेजों का आपस में मिलान कराया जाए तो संदिग्ध प्रमाण-पत्रों की वास्तविक संख्या सामने आ सकती है। इससे यह भी स्पष्ट होगा कि मौजूदा पांच मामलों तक ही गड़बड़ी सीमित है या पुराने रिकॉर्ड में भी ऐसे प्रमाण-पत्र मौजूद हैं।

पांच आवेदकों से मांगा स्पष्टीकरण और प्रमाण

दिव्यांग प्रमाण-पत्र के नोडल अधिकारी डॉ. एके चौधरी ने बताया कि पांच संदिग्ध प्रमाण-पत्रों से संबंधित आवेदन जांच के दौरान पकड़े गए हैं। सभी संबंधित आवेदकों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण और प्रमाण मांगे गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि आवेदक संतोषजनक जवाब और जरूरी साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराते हैं तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी।

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