गोरखपुर फर्म के नाम पर खेल: बिहार के व्यापारी से 9.66 लाख की ठगी, दो ट्रक चूड़ा मंगवाकर जालसाज फरार

गोरखपुर|2 घंटे पहले
बिहार के व्यापारी से 9.66 लाख की ठगी, दो ट्रक चूड़ा मंगवाकर जालसाज फरार

व्यापारिक प्रतिष्ठानों के नाम और साख का दुरुपयोग कर ठगी करने का एक बड़ा मामला सामने आया है। जिसने व्यापारिक जगत में चिंता और आक्रोश पैदा कर दिया है। जालसाजों ने गोरखपुर की एक प्रतिष्ठित फर्म के नाम का इस्तेमाल कर बिहार के एक उद्योगपति से लगभग 9.66 लाख रुपये मूल्य का दो ट्रक चूड़ा मंगवा लिया। माल प्राप्त करने के बाद भुगतान किए बिना फरार हो गए। मामले के खुलासे के बाद व्यापारी संगठनों ने इसे संगठित आर्थिक अपराध बताते हुए दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की है।

जानकारी के अनुसार बिहार के पश्चिम चंपारण निवासी विनोद प्रसाद जायसवाल की फर्म "जय महावीर ट्रेडर्स" चूड़ा निर्माण एवं थोक व्यापार का कार्य करती है। पीड़ित व्यापारी के मुताबिक छह मई को उनके मोबाइल फोन पर एक व्यक्ति का कॉल आया। कॉल करने वाले ने स्वयं को गोरखपुर स्थित प्रतिष्ठित फर्म "मां तारा ट्रेडर्स" का संचालक ओम प्रकाश बताते हुए 3350 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बड़ी मात्रा में चूड़ा खरीदने की इच्छा जताई। साथ ही उसने आश्वासन दिया कि माल प्राप्त होने के दस दिनों के भीतर संपूर्ण भुगतान कर दिया जाएगा। प्रतिष्ठित फर्म का नाम सामने आने और लगातार भरोसा दिलाने के कारण व्यापारी को किसी प्रकार का संदेह नहीं हुआ।

दो चरणों में मंगवाया गया लाखों रुपये का माल

व्यापारी ने आरोपी की बातों पर विश्वास करते हुए नौ मई को पहली खेप गाड़ी संख्या UP53FT0490 के माध्यम से गोरखपुर रवाना कर दी। चालक के अनुसार 10 मई को नौसड़ स्थित विजेता होटल के समीप एक गोदाम में मजदूरों की मदद से पूरा माल उतरवा लिया गया। पहली खेप का भुगतान निर्धारित समय पर नहीं मिला। आरोपी लगातार आश्वासन देता रहा कि भुगतान प्रक्रिया पूरी की जा रही है। इसी भरोसे में व्यापारी ने 17 मई को दूसरी खेप भी भेज दी। दूसरी गाड़ी संख्या UP53KT7266 को बस्ती के लिए बुक कराया गया था। उसे खलीलाबाद की नवीन मंडी के निकट स्थित एक गोदाम में खाली करा लिया गया। इस दौरान जालसाजों ने दस्तावेजों में भी हेरफेर की। बिल "मां तारा ट्रेडर्स, साहबगंज, गोरखपुर" के नाम से तैयार करवाया। इतना ही नहीं, उसमें "शिप टू : विशाल चूड़ा मिल, बस्ती" अंकित कर एक अन्य प्रतिष्ठित फर्म का नाम भी शामिल कर लिया गया।

भुगतान न मिलने पर खुली फर्जीवाड़े की परतें

जब लगातार दोनों खेपों का भुगतान नहीं मिला तो विनोद जायसवाल ने संबंधित व्यक्ति से संपर्क साधा। आरोपी हर बार दो-तीन दिन में भुगतान का भरोसा देता रहा। बाद में उसने एक संदेश भेजकर सोमवार को भुगतान करने की बात कही। इसके तुरंत बाद उसका मोबाइल फोन बंद हो गया। संदेह गहराने पर पीड़ित व्यापारी ने गोरखपुर के व्यापारियों और संबंधित फर्मों से संपर्क किया। जांच में पता चला कि "मां तारा ट्रेडर्स" ने न तो कोई ऑर्डर दिया था और न ही किसी प्रकार का माल मंगवाया था। वहीं बिल में उल्लिखित बस्ती की फर्म ने भी किसी तरह के कारोबारी लेन-देन से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ।

कड़ी कार्रवाई की मांग

ठगी का एहसास होने के बाद विनोद जायसवाल गोरखपुर पहुंचे और व्यापारिक संगठनों से सहयोग मांगा। इसके बाद उन्होंने 29 मई को थाना गीडा में शिकायत दर्ज कराई। मामले की जांच नौसड़ चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक अंजय कुमार सिंह को सौंपी गई है। पीड़ित ने एसएसपी को भी लिखित शिकायत देकर आर्थिक अपराध के इस मामले में कठोर कार्रवाई की मांग की है। उधर, व्यापारिक संगठनों ने घटना को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि ऐसे अपराध न केवल व्यापारियों के बीच विश्वास को कमजोर करते हैं, बल्कि शहर की कारोबारी प्रतिष्ठा को भी प्रभावित करते हैं। व्यापारिक नेताओं ने पुलिस प्रशासन से दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी कर उन्हें कानून के दायरे में लाने की मांग की है।

नव्य जागरण

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