16 साल पुराने अपहरण-रेप मामले में दो दोषी करार: पूर्व बयान से मुकर गई थी पीड़िता, कोर्ट ने फाइन भी लगाया

जिले की एक कोर्ट ने वर्ष 2009 के बहुचर्चित अपहरण और रेप मामले में 16 वर्ष बाद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। कोर्ट ने दो आरोपियों को दोषी ठहराया है। विशेष बात यह रही कि सुनवाई के दौरान पीड़िता अपने पूर्व बयान से मुकर गई थी। इसके बावजूद कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितिजन्य प्रमाणों को पर्याप्त मानते हुए आरोप सिद्ध पाया। कोर्ट ने दोनों दोषियों को विभिन्न धाराओं के तहत सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (कोर्ट संख्या-2) ने रेहान पुत्र यासीन निवासी रेतपुरवा, जनपद गोरखपुर तथा सलमान पुत्र स्वर्गीय जब्बार निवासी पडरौना शहर को दोषी करार दिया। मामला थाना कोतवाली पडरौना में मुकदमा अपराध संख्या 584/2009 के तहत दर्ज किया गया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार तीन अप्रैल 2009 को 16 वर्षीय नाबालिग किशोरी को बहला-फुसलाकर ले जाया गया था। घटना के संबंध में भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 366 और 376 के तहत केस दर्ज किया गया था।
साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने माना आरोप सिद्ध
वादी पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे एडीजीसी संजीव कुमार सिंह ने बताया कि सुनवाई के दौरान अभियोजन ने चिकित्सकीय रिपोर्ट, विवेचना अधिकारी की गवाही और अन्य दस्तावेजी साक्ष्य कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि पीड़िता वर्तमान में आरोपियों में से एक के साथ रह रही थी। कोर्ट में अपने पूर्व बयान से पलट गई थी। इसके बावजूद कोर्ट ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण कर आरोपों को प्रमाणित माना।
पांच और सात वर्ष के कारावास की सजा
कोर्ट ने दोनों दोषियों को धारा 363 आईपीसी के तहत पांच-पांच वर्ष के सश्रम कारावास तथा पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं धारा 366 आईपीसी के तहत सात-सात वर्ष के सश्रम कारावास और 10-10 हजार रुपये जुर्माने का आदेश दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अर्थदंड जमा न करने की स्थिति में दोषियों को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। कोर्ट ने आदेश दिया कि दोषियों द्वारा पूर्व में जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा। साथ ही पीड़िता को नियमानुसार प्रतिकर दिलाने के लिए आदेश की प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजने का निर्देश भी दिया गया है। 16 वर्ष बाद आए इस फैसले को न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
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