4200 करोड़ के एक्सप्रेसवे पर फिर धंसी सड़क: 24 घंटे में चार जगह हुई गड़बड़ी, डीएम-एसपी ने किया निरीक्षण

उन्नाव से लखनऊ के बीच करीब 4200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार एनएचएआइ के एक्सप्रेसवे पर सड़क धंसने का सिलसिला थम नहीं रहा है। मंगलवार को सामने आई खराबी के 24 घंटे के भीतर लखनऊ-उन्नाव लेन पर चार स्थानों पर सड़क धंसी मिली। भवानी खेड़ा के पास करीब 100 मीटर हिस्से में सड़क धंसने से स्थिति गंभीर हो गई है। वहीं, इजरायलखेड़ा के पास सड़क में लंबी नालियां बन गई हैं। अड़ेरुआ के पास भी करीब 60 मीटर हिस्सा धंसा मिला। इसके अलावा उन्नाव-लखनऊ लेन पर जगेथा गांव के पास करीब 100 मीटर सड़क दोबारा धंस गई। यहां तीन दिन पहले ही पैचवर्क किया गया था। एक्सप्रेसवे का निर्माण आगरा की पीएनसी इन्फ्राटेक ने किया है। उद्घाटन के करीब एक महीने में ही चार दर्जन से अधिक स्थानों पर सड़क धंसने या उखड़ने की समस्या सामने आ चुकी है।
लखनऊ-उन्नाव लेन पर भवानी खेड़ा के पास किलोमीटर 53.6 से 53.7 तक करीब 100 मीटर सड़क धंसी मिली। यहां डिवाइडर में भी दरारें दिखाई दीं। अड़ेरुआ के पास किलोमीटर 60.3 पर करीब 60 मीटर सड़क प्रभावित हुई है। इजरायलखेड़ा के पास किलोमीटर 62.9 पर सड़क धंसने से लंबी नालियां बन गई हैं। उन्नाव-लखनऊ लेन पर जगेथा गांव के पास किलोमीटर 50.4 पर करीब 100 मीटर हिस्सा फिर धंस गया। इस स्थान पर तीन दिन पहले ही पैचवर्क कराया गया था। इसी लेन पर बछौरा के पास किलोमीटर 40 पर धंसी सड़क की मरम्मत भी शुरू कर दी गई है।
मशीनों से जांच में जुटी तकनीकी टीम
सड़क की लगातार खराब होती स्थिति के बाद इंडियन रोड सर्वे एंड मैनेजमेंट की टीम मशीनों के साथ एक्सप्रेसवे पर जांच करती मिली। टीम के सदस्यों ने बताया कि दोनों लेन पर प्रत्येक 100 मीटर के अंतराल पर सड़क की गुणवत्ता की जांच की जाएगी। एनएचएआइ के परियोजना निदेशक नवरतन ने भी एक्सप्रेसवे की जांच कराए जाने की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि जांच की रिपोर्ट जल्द आने की उम्मीद है। फिलहाल सड़क की मजबूती और धंसने की वजह जानने के लिए तकनीकी स्तर पर अलग-अलग बिंदुओं की जांच की जा रही है।
डीएम-एसपी ने भी मौके पर देखी स्थिति
डीएम घनश्याम मीना और एसपी जय प्रकाश सिंह एक्सप्रेसवे की स्थिति का जायजा लेने पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने किलोमीटर 51.2 के पास झाऊ खेड़ा में सड़क की स्थिति देखी। निरीक्षण के दौरान एक्सप्रेसवे के आसपास लगाई गई कई जालियां कटी मिलीं। इन रास्तों से ग्रामीण अपने मवेशियों को एक्सप्रेसवे पर पहुंचा रहे हैं। डीएम ने निर्माण एजेंसी के अधिकारियों को सभी क्षतिग्रस्त जालियां ठीक कराने और इसकी रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
पानी के जमीन में जाने की आशंका
एक्सप्रेसवे के धंसने के पीछे पानी के सड़क की निचली परत तक पहुंचने को अहम कारण माना जा रहा है। इसी की जांच के लिए एक कंपनी के कर्मचारी उन्नाव-लखनऊ लेन पर बाबा खेड़ा के पास किलोमीटर 30.9 पर काम करते मिले। कर्मचारियों ने बताया कि यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि पानी जमीन में कितनी गहराई तक पहुंच रहा है। पहले चरण में 175 मीटर कच्चे किनारे पर जांच का परीक्षण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य बारिश के पानी के जमीन में जाने की स्थिति और सड़क की मजबूती पर उसके प्रभाव को समझना है।
एफडीआर तकनीक से तलाशा जा रहा समाधान
सड़क की जांच और समाधान के लिए एफडीआर यानी फुल डेप्थ रिक्लेमेशन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके तहत पानी डालकर यह देखा जाएगा कि मिट्टी कितनी मात्रा में पानी सोखती है और पानी कितनी गहराई तक पहुंचता है। तकनीकी टीम यह भी जांच रही है कि सड़क की परतों के जरिए पानी को स्लोप की ओर डायवर्ट किया जा सकता है या नहीं और बेस तक पानी पहुंचने से कैसे रोका जाए? यदि पानी मिट्टी की सतह को पार नहीं करता है तो एनएचएआइ के निर्देश पर यह प्रक्रिया एक्सप्रेसवे के ग्रीन फील्ड क्षेत्र में भी अपनाई जाएगी। एफडीआर तकनीक में सड़क निर्माण में इस्तेमाल सामग्री को रिसाइकिल कर उसी स्थान पर दोबारा उपयोग किया जाता है। इससे संबंधित निर्माण में करीब 40 प्रतिशत तक बजट कम होने की बात बताई गई है।











