रोजगार और पेपर लीक पर मायावती का फोकस: युवाओं के बीच बसपा की जमीन मजबूत करने की कोशिश, ‘हर हाथ को काम’ को सामाजिक न्याय से जोड़ा

विधानसभा चुनाव से पहले बसपा प्रमुख मायावती ने बेरोजगारी और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता के मुद्दे को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ाने की रणनीति अपनाई है। सोमवार को एक्स पर किए गए पोस्ट में उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए युवा आंदोलन का उल्लेख करते हुए केंद्र और राज्य सरकारों से पेपर लीक व भ्रष्टाचार से मुक्त भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग की। उनका यह रुख जेन-जी और शिक्षित युवाओं के बीच पार्टी की राजनीतिक पहुंच बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
मायावती ने रोजगार के सवाल को सामाजिक न्याय से जोड़ते हुए कहा कि परिवार के एक सदस्य को भी सरकारी नौकरी मिलने से पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति बदल सकती है। उन्होंने सरकारी भर्तियों में एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों को आरक्षण का लाभ मिलने की बात भी उठाई। उनका कहना है कि इससे इन वर्गों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिल सकती है। नीट पेपर लीक के मुद्दे पर दिल्ली के जंतर-मंतर में हुए प्रदर्शन के बाद सपा और कांग्रेस पहले से ही सरकार को घेर रही हैं। मायावती ने इससे पहले राजनीतिक दलों को इस मुद्दे पर राजनीति न करने की नसीहत देते हुए सीमित प्रतिक्रिया दी थी। अब उनके इस मुद्दे पर खुलकर सामने आने को विपक्षी राजनीति में बसपा की अलग भूमिका तय करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
सरकारी नौकरियों का आंकड़ा किया पेश
बसपा प्रमुख ने दावा किया कि उनकी पार्टी की सरकार के दौरान सवा दो लाख सरकारी नौकरियां दी गई थीं। उन्होंने जंतर-मंतर पर शिक्षित युवाओं के आंदोलन का हवाला देते हुए कहा कि भर्ती और रोजगार से जुड़े सवाल अब गंभीर चर्चा का विषय बन चुके हैं। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से राष्ट्रीय संपत्तियों को निजी हाथों में बेचने की प्रक्रिया रोकने और सरकारी भर्तियां शुरू करने की मांग की। मायावती ने यह भी कहा कि आरक्षण का प्रभावी लाभ नहीं मिलने के कारण एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों को अपेक्षित सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा नहीं मिल पा रही है। उन्होंने संसद के मौजूदा सत्र में जारी गतिरोध को समाप्त करने की मांग भी की।
पारंपरिक आधार से आगे युवाओं पर नजर
बसपा की मौजूदा रणनीति अपने पारंपरिक दलित आधार के साथ युवाओं को जोड़ने की दिखाई दे रही है। बेरोजगारी, पेपर लीक और सरकारी भर्ती जैसे मुद्दों के जरिए पार्टी जेन-जी के बीच अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करना चाहती है। हालांकि, इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि बसपा अपने संगठन और राजनीतिक संदेश को युवा मतदाताओं तक कितनी प्रभावी तरीके से पहुंचा पाती है।










