थानों में बंद पड़े CCTV और बैकअप सिस्टम पर हाईकोर्ट सख्त: कहा- यह एसपी की जिम्मेदारी, डीजीपी को जारी किए निर्देश

प्रयागराज|04 अगस्त 2026
कहा- यह एसपी की जिम्मेदारी, डीजीपी को जारी किए निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरों और बैकअप बिजली व्यवस्था की खराब स्थिति पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यदि किसी थाने में सीसीटीवी कैमरे, जनरेटर सेट या सोलर पैनल काम नहीं कर रहे हैं तो इसे संबंधित पुलिस अधीक्षक या वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की ड्यूटी में लापरवाही माना जाएगा। अदालत ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को निर्देश दिया है कि राज्य के सभी जिलों के एसपी, एसएसपी और पुलिस कमिश्नरों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर यह सुनिश्चित कराया जाए कि सभी पुलिस स्टेशन आवश्यक सुविधाओं से पूरी तरह सुसज्जित रहें।

जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने कहा कि पुलिस स्टेशन अत्यंत संवेदनशील स्थान होते हैं। यहां कानून-व्यवस्था और हिरासत से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे और निर्बाध बिजली व्यवस्था अनिवार्य है। अदालत ने कहा कि इन सुविधाओं का सुचारु संचालन सुनिश्चित करना जिले के पुलिस प्रमुख की प्रमुख जिम्मेदारी है।

हिरासत मामले की सुनवाई में उठा मुद्दा

यह टिप्पणी नागेंद्र कुमार यादव की याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई। याचिका में आरोप लगाया गया था कि उन्हें देवरिया के भलुअनी थाने के लॉकअप में अवैध रूप से हिरासत में रखा गया था। सुनवाई के दौरान थानाध्यक्ष ने अदालत को बताया कि संबंधित तिथि की सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं हो सकी, क्योंकि उस समय बिजली आपूर्ति बाधित थी और थाने का जनरेटर भी खराब पड़ा था। इस पर अदालत ने सीसीटीवी की हार्ड डिस्क सुरक्षित रखने का निर्देश दिया और बिजली निगम से उस दिन की विद्युत आपूर्ति का ब्यौरा भी तलब किया।

एसपी से मांगा गया व्यक्तिगत हलफनामा

कोर्ट ने देवरिया के पुलिस अधीक्षक से व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने को कहा था, जिसमें यह बताया जाए कि जनरेटर की मरम्मत क्यों नहीं कराई गई। सुनवाई के दौरान बिजली विभाग के अधिशासी अभियंता ने बताया कि संबंधित तिथि पर गांव में निर्धारित 18 घंटे की बजाय केवल 13 घंटे चार मिनट बिजली आपूर्ति हुई थी। अदालत ने यह भी पाया कि थानाध्यक्ष सीसीटीवी हार्ड डिस्क में सुरक्षित फुटेज की स्थिति के संबंध में संतोषजनक जानकारी नहीं दे सके। इसके बाद कोर्ट ने फुटेज निकालकर पेन ड्राइव के माध्यम से प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

रखरखाव में लापरवाही पर जताई नाराजगी

पुलिस अधीक्षक की ओर से दाखिल हलफनामे में बताया गया कि संबंधित थाने का जनरेटर दिसंबर 2024 से खराब था और सोलर पैनल भी काम नहीं कर रहे थे। इसके बावजूद मरम्मत या रखरखाव के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। अदालत ने इस पर गंभीर आपत्ति जताते हुए कहा कि थानाध्यक्ष भी इस लापरवाही के लिए समान रूप से जिम्मेदार हैं। रिकॉर्ड में प्रस्तुत पत्र के अनुसार एसपी ने भी थानाध्यक्ष के आचरण को कर्तव्यों के निर्वहन और अनुशासन में गंभीर लापरवाही मानते हुए प्रारंभिक जांच के निर्देश दिए हैं।

11 अगस्त को फिर होगी सुनवाई

अदालत ने उम्मीद जताई कि पुलिस अधीक्षक इस मामले में तत्काल ठोस कार्रवाई करेंगे। साथ ही उन्हें 11 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर जिले के सभी पुलिस थानों में जनरेटर, सोलर पैनल और सीसीटीवी कैमरों की वर्तमान स्थिति की जानकारी देने का निर्देश दिया गया है। थानाध्यक्ष को भी अगली सुनवाई में उपस्थित रहने के आदेश दिए गए हैं।

नव्य जागरण

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