सिद्धार्थनगर में कलेक्ट्रेट में पेट्रोल लेकर पहुंची महिला: व्हीलचेयर पर दिव्यांग मां को लाई, प्रशासन को पांच दिन का दिया अल्टीमेटम

जिला कलेक्ट्रेट परिसर में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब सिविल लाइन तेतरी बाजार निवासी शैलजा अपनी लकवाग्रस्त और दिव्यांग मां प्रभावती देवी को व्हीलचेयर पर लेकर पहुंचीं। उनके हाथ में पेट्रोल की बोतल थी। शैलजा ने अधिकारियों के सामने अपनी समस्या रखते हुए कहा कि यदि पांच दिन के भीतर मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो वह आत्मदाह कर लेंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि वह कई दिनों से डीएम और एसपी कार्यालय के चक्कर लगा रही हैं, लेकिन उनकी शिकायत पर सुनवाई नहीं हो रही है। शैलजा ने प्रशासन से अपनी मां के साथ पैतृक मकान में रहने की व्यवस्था कराने और मामले में कार्रवाई की मांग की है।
शैलजा के मुताबिक उनके पिता स्वर्गीय राम करन गुप्ता सिद्धार्थनगर पुलिस विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे। नौकरी के दौरान उनकी मृत्यु के बाद परिवार की सहमति से भाई बृजेश को अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिली थी। शैलजा का कहना है कि बृजेश ने परिवार की देखभाल करने का शपथ पत्र भी दिया था। परिवार में तीन भाई और तीन बहनें थीं। बड़े भाई राम बेलास मानसिक रूप से अस्वस्थ थे और वर्ष 2024 में उनकी मौत हो गई। शैलजा का आरोप है कि छोटे भाई बब्लू की मानसिक स्थिति का फायदा उठाकर उसकी भाभी कमला गुप्ता ने उसकी संपत्ति बिकवा दी। इसके बाद बब्लू लापता हो गया और अब तक उसका पता नहीं चला है।
20 साल से बीमार है मां
शैलजा ने बताया कि उसकी दो बहनों की शादी हो चुकी है, जबकि उसकी खुद शादी नहीं हुई है। मां प्रभावती करीब 20 वर्षों से बीमार हैं और लकवे के कारण बिस्तर पर हैं। उनकी देखभाल, इलाज और रोजमर्रा की जरूरतों की जिम्मेदारी शैलजा ही संभाल रही हैं। शैलजा का आरोप है कि ऐसी स्थिति में मां के साथ पैतृक मकान से बाहर किए जाने के बाद दोनों को किराये के मकान में रहना पड़ रहा है।
भाई की मौत के बाद मकान से निकालने का आरोप
शैलजा के अनुसार वर्ष 2025 में उसके भाई बृजेश की भी मौत हो गई। आरोप है कि बृजेश की नौकरी और मृत्यु के बाद मिलने वाले लाभ कमला गुप्ता को दिए जा रहे हैं, जबकि वह प्रभावती की देखभाल नहीं करतीं। शैलजा का आरोप है कि कमला ने पैतृक मकान पर कब्जा कर उसे और उसकी मां को वहां से निकाल दिया। इसके बाद दोनों को किराये के मकान में रहना पड़ रहा है। उसका कहना है कि जब वह मां के साथ पैतृक घर में रहने जाती है तो गाली-गलौज की जाती है और जान से मारने की धमकी देकर वहां से भगा दिया जाता है।
भतीजे के लिए अनुकंपा नौकरी की भी मांग
शैलजा ने प्रशासन के सामने अपने भतीजे अंश को लेकर भी मांग रखी है। उसने कहा है कि मृतक आश्रित के तौर पर अंश के 18 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद नौकरी दिए जाने पर विचार किया जाए। कलेक्ट्रेट में पेट्रोल की बोतल लेकर पहुंचने और पांच दिन में कार्रवाई न होने पर आत्मदाह की चेतावनी देने के बाद मामला गंभीर हो गया है। शैलजा ने प्रशासन से मां-बेटी को पैतृक मकान में रहने की व्यवस्था कराने और शिकायत पर कार्रवाई की मांग की है।










