बंगाल में वंदे मातरम् पर हाईकोर्ट की टिप्पणी: कहा- इससे आसमान नहीं टूट पड़ेगा, धार्मिक प्रार्थना का भी दिया उदाहरण

कोलकाता|05 अगस्त 2026
कहा- इससे आसमान नहीं टूट पड़ेगा, धार्मिक प्रार्थना का भी दिया उदाहरण

मदरसों में वंदे मातरम् के छह छंद गाने को अनिवार्य किए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी की। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तापब्रत चक्रवर्ती ने कहा कि यदि मदरसों में वंदे मातरम् गाया जाता है तो "आसमान नहीं टूट पड़ेगा।" अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल ऐसा कोई कदम सामने नहीं आया है, जिसमें वंदे मातरम् नहीं गाने पर किसी के खिलाफ कार्रवाई की गई हो। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ताओं और केंद्र सरकार दोनों के तर्क सुने।

सुनवाई के दौरान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तापब्रत चक्रवर्ती ने कहा कि देश में हजारों ईसाई शिक्षण संस्थान हैं, जहां सभी विद्यार्थियों से ईश्वर से प्रार्थना कराई जाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी अन्य धर्म के छात्र इस आधार पर आपत्ति जताते हैं कि उनसे ईसाई धर्म से जुड़ी प्रार्थना क्यों कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति से उसके धर्म से अलग कोई बात दोहराने के लिए कहा जाए तो इससे उसका धर्म नहीं बदल जाता और न ही इससे कोई असाधारण स्थिति पैदा होती है।

याचिकाकर्ता ने अनिवार्यता पर जताई आपत्ति

याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट विकास रंजन भट्टाचार्य ने अदालत में दलील दी कि केंद्र सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर वंदे मातरम् के सभी छह छंद गाना अनिवार्य कर दिया है। उनका कहना था कि संविधान लागू होने के समय व्यापक विचार-विमर्श के बाद केवल दो छंदों को स्वीकार किया गया था। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से वंदे मातरम् गाना चाहता है तो इसमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इसे अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता। भट्टाचार्य ने यह भी तर्क दिया कि इस प्रकार की अनिवार्यता से सांप्रदायिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है। उन्होंने अदालत से पूछा कि यदि कोई व्यक्ति अनिवार्य होने के बावजूद वंदे मातरम् नहीं गाता और उसके खिलाफ कार्रवाई होती है, तो ऐसी स्थिति में उसे कानूनी संरक्षण कैसे मिलेगा।

केंद्र ने अंतरिम रोक का किया विरोध

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल धीरज कुमार त्रिवेदी ने अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगाने की मांग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कई जनहित याचिकाएं वास्तव में प्रचार हासिल करने के उद्देश्य से दायर की जा रही हैं। वहीं, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि प्रथम दृष्टया अधिसूचना जारी करने के अधिकार क्षेत्र का प्रश्न विचारणीय है, लेकिन फिलहाल यह भी देखना होगा कि क्या किसी के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई की गई है। अदालत ने कहा कि अब तक ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है, जिसमें वंदे मातरम् नहीं गाने पर किसी व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई की गई हो।

नव्य जागरण

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