TMC में सियासी हलचल बढ़ी: निष्कासित विधायकों की सक्रियता से अटकलें तेज, ऋतब्रत-संदीपन की बैठकों ने बढ़ाई नेतृत्व की चिंता

कोलकाता|1 घंटा पहले
निष्कासित विधायकों की सक्रियता से अटकलें तेज, ऋतब्रत-संदीपन की बैठकों ने बढ़ाई नेतृत्व की चिंता

पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस में अंदरूनी असंतोष और गुटबाजी की चर्चाओं के बीच राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। पार्टी से निष्कासित किए गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा की हालिया सक्रियता ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। दोनों नेताओं ने सोमवार देर रात विधायक हॉस्टल में कई विधायकों के साथ बैठकें कीं। जिसके बाद पार्टी के भीतर संभावित शक्ति प्रदर्शन और नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर अटकलों का बाजार गर्म हो गया है।

रिपोर्टों के अनुसार, निष्कासित किए गए दोनों नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस के कई विधायकों से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि इन बैठकों में विशेष रूप से मालदा और मुर्शिदाबाद क्षेत्र से जुड़े कुछ विधायक भी शामिल रहे। हालांकि इन बैठकों के एजेंडे को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी सामने नहीं आई है। राजनीतिक गलियारों में इसे पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष से जोड़कर देखा जा रहा है।

विधायकों के समर्थन को लेकर बड़े दावे

इस पूरे घटनाक्रम के बीच तृणमूल कांग्रेस से निलंबित नेता रिजू दत्ता का बयान भी चर्चा में आ गया है। उन्होंने दावा किया है कि पार्टी के बड़ी संख्या में विधायक वर्तमान नेतृत्व की कार्यशैली से असंतुष्ट हैं। 50 से अधिक विधायक स्वयं को "असली तृणमूल" के रूप में स्थापित करने की दिशा में विचार कर रहे हैं। उनके अनुसार यह समूह विधानसभा में विपक्ष के नेता के पद से जुड़े निर्णयों और संगठनात्मक मामलों में बदलाव की मांग कर रहा है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि पार्टी के भीतर असंतोष का दायरा बढ़ता है तो इसका असर संगठनात्मक एकता पर पड़ सकता है।

निष्कासन के पीछे क्या है विवाद?

जानकारी के अनुसार दोनों विधायकों के खिलाफ कार्रवाई उस विवाद के बाद हुई। जिसमें विधानसभा से जुड़े कुछ दस्तावेजों और हस्ताक्षरों को लेकर सवाल उठाए गए थे। पार्टी नेतृत्व का आरोप है कि दोनों नेता लगातार संगठनात्मक बैठकों से दूरी बनाए हुए थे। सार्वजनिक रूप से ऐसे बयान दे रहे थे, जिनसे पार्टी की छवि को नुकसान पहुंच रहा था। इसी आधार पर उन्हें तत्काल प्रभाव से पार्टी से बाहर कर दिया गया। तृणमूल कांग्रेस की ओर से जारी संदेश में कहा गया कि संबंधित नेताओं की गतिविधियां पार्टी अनुशासन और संगठनात्मक हितों के अनुरूप नहीं थीं। इसलिए यह कार्रवाई आवश्यक समझी गई।

संदीपन साहा बोले- कोई पछतावा नहीं

निष्कासन के बाद संदीपन साहा ने प्रतिक्रिया दी। कहा कि पार्टी के भीतर नैतिकता और पारदर्शिता की बात करना यदि अनुशासनहीनता माना जाता है तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल किसी अन्य राजनीतिक दल में शामिल होने की उनकी कोई योजना नहीं है। उनका कहना था कि वह अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लेना चाहते।

विपक्ष ने साधा निशाना

तृणमूल कांग्रेस के भीतर उभरते विवाद को लेकर विपक्षी दलों ने भी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा कि पार्टी आज उसी स्थिति का सामना कर रही है। जिसकी नींव उसने स्वयं रखी थी। उन्होंने दावा किया कि संगठन के भीतर व्यापक असंतोष मौजूद है। इसका असर भविष्य की राजनीति पर दिखाई दे सकता है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आगामी दिनों में तृणमूल कांग्रेस के भीतर होने वाली गतिविधियां पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। फिलहाल सभी की निगाहें पार्टी नेतृत्व और निष्कासित नेताओं के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

नव्य जागरण

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