नई स्पोर्ट्स पॉलिसी में बड़ा फैसला: पाकिस्तान के साथ बाइलेटरल खेल संबंधों पर भारत का सख्त रुख कायम, सरकार बोली- न टीम वहां जाएगी, न उन्हें यहां बुलाएंगे

07 मई 2026
पाकिस्तान के साथ बाइलेटरल खेल संबंधों पर भारत का सख्त रुख कायम, सरकार बोली- न टीम वहां जाएगी, न उन्हें यहां बुलाएंगे

भारत सरकार ने पाकिस्तान के साथ खेल संबंधों को लेकर अपना रुख एक बार फिर साफ कर दिया है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट कहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच फिलहाल कोई भी बाइलेटरल खेल सीरीज नहीं होगी। सरकार के नए प्रस्तावित खेल नियमों के तहत भारतीय टीमें पाकिस्तान खेलने नहीं जाएंगी और न ही पाकिस्तानी टीमों को भारत में बाइलेटरल सीरीज के लिए बुलाया जाएगा। हालांकि, दोनों देशों के खिलाड़ी वर्ल्ड कप, ओलिंपिक, एशियन गेम्स या अन्य मल्टीलेटरल टूर्नामेंट्स में एक-दूसरे के खिलाफ खेलते रहेंगे। यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है जब भारत अपनी सुरक्षा और कूटनीतिक नीति को लेकर पहले से ज्यादा आक्रामक और स्पष्ट रणनीति अपना रहा है।

युवा मामले और खेल मंत्रालय ने इस संबं में एक आधिकारिक मेमोरेंडम जारी किया है। इसमें साफ कहा गया है कि भारत की खेल नीति देश की कूटनीतिक नीति के अनुरूप ही संचालित होगी। मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान को लेकर भारत का स्टैंड पूरी तरह स्पष्ट है। आतंकवाद और सीमा पार गतिविधियों के बीच सामान्य खेल संबंध बहाल नहीं किए जा सकते। सरकार का यह रुख बताता है कि आने वाले समय में भी दोनों देशों के बीच क्रिकेट, हॉकी या अन्य खेलों की अलग से द्विपक्षीय सीरीज होने की संभावना बेहद कम है।

IOA और सभी स्पोर्ट्स फेडरेशन को भेजा गया सर्कुलर

खेल मंत्रालय ने यह निर्देश भारतीय ओलिंपिक संघ (IOA), स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) और सभी नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशनों को भेज दिया है। सर्कुलर में कहा गया है कि पाकिस्तान से जुड़ी किसी भी खेल गतिविधि में केंद्र सरकार की विदेश नीति और सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के दौरान खिलाड़ियों की एंट्री पर पूरी तरह रोक नहीं होगी। उदाहरण के तौर पर पाकिस्तान के स्टार जैवलिन थ्रोअर अरशद नदीम जैसे खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय इवेंट्स में हिस्सा लेने भारत आ सकेंगे।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ की बरसी के बीच आया फैसला

सरकार का यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है जब सात मई को “ऑपरेशन सिंदूर” की बरसी भी है। यह ऑपरेशन पिछले साल पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था। उस हमले में 26 नागरिकों की जान गई थी। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान को लेकर कई मोर्चों पर सख्त नीति अपनाई थी। अब खेल क्षेत्र में भी सरकार का रुख पहले जैसा ही कड़ा दिखाई दे रहा है।

क्रिकेट पर सबसे ज्यादा असर

भारत सरकार के इस फैसले का सबसे बड़ा असर क्रिकेट पर पड़ रहा है। भारतीय क्रिकेट टीम और पाकिस्तान क्रिकेट टीम के बीच आखिरी बाइलेटरल सीरीज 2012-13 में हुई थी, जब पाकिस्तान की टीम भारत दौरे पर आई थी। इसके बाद से दोनों देशों के बीच सिर्फ ICC और एशिया कप जैसे टूर्नामेंट्स में मुकाबले हुए हैं। हाल के समय में चैंपियंस ट्रॉफी 2025 को लेकर भी काफी विवाद हुआ था। भारत ने पाकिस्तान जाकर खेलने को लेकर स्पष्ट असहमति दिखाई थी। अब सरकार के नए निर्देशों से साफ हो गया है कि निकट भविष्य में कोई द्विपक्षीय क्रिकेट सीरीज संभव नहीं दिख रही।

भारत बनना चाहता है ग्लोबल स्पोर्ट्स हब

एक तरफ पाकिस्तान को लेकर सख्त रुख जारी है, वहीं दूसरी तरफ भारत खुद को इंटरनेशनल स्पोर्ट्स डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करना चाहता है। सरकार ने विदेशी खिलाड़ियों, टीम अधिकारियों और तकनीकी स्टाफ के लिए वीजा प्रक्रिया को आसान बनाने का फैसला किया है। नई नीति के तहत अंतरराष्ट्रीय खेल संस्थाओं के अधिकारियों को उनके कार्यकाल के दौरान पांच साल तक का प्रायोरिटी मल्टी-एंट्री वीजा दिया जाएगा। इसके अलावा भारत आने वाले इंटरनेशनल स्पोर्ट्स अधिकारियों को बेहतर प्रोटोकॉल और सम्मान भी दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे भारत बड़े वैश्विक खेल आयोजनों की मेजबानी के लिए और मजबूत दावेदार बन सकेगा।

खेल और कूटनीति के बीच संतुलन की कोशिश

भारत सरकार की नई नीति यह साफ संकेत देती है कि खेल अब सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं रह गए हैं। अब खेल, सुरक्षा और कूटनीति तीनों एक-दूसरे से सीधे जुड़े हुए हैं। जहां एक तरफ सरकार आतंकवाद और सीमा पार तनाव को देखते हुए पाकिस्तान के साथ बाइलेटरल रिश्तों से दूरी बनाए रखना चाहती है, वहीं दूसरी ओर वह अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर अपनी सक्रिय मौजूदगी भी बनाए रखना चाहती है। यानी आने वाले समय में भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबले तो होंगे, लेकिन सिर्फ उन मंचों पर जहां दुनिया की कई टीमें एक साथ खेलती हैं।

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