स्पेन बना फुटबाल का विश्व चैंपियन: 106वें मिनट में टोरेस के गोल से अर्जेंटीना पस्त, 60 साल का बदला पूरा

18 घंटे पहले
106वें मिनट में टोरेस के गोल से अर्जेंटीना पस्त, 60 साल का बदला पूरा

न्यूजर्सी स्टेडियम में रविवार रात खेले गए फीफा विश्व कप 2026 के रोमांचक फाइनल में स्पेन ने अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। निर्धारित 90 मिनट तक दोनों टीमें गोल नहीं कर सकीं, लेकिन एक्स्ट्रा टाइम के 106वें मिनट में फेरान टोरेस ने निर्णायक गोल दागकर स्पेन को ऐतिहासिक जीत दिला दी। इस जीत के साथ स्पेन ने 1966 के विश्व कप फाइनल में अर्जेंटीना से मिली हार का बदला भी चुका लिया, जबकि लियोनेल मेसी का लगातार दूसरा विश्व कप जीतने का सपना अधूरा रह गया।

फाइनल मुकाबले की शुरुआत से ही स्पेन ने गेंद पर अपना नियंत्रण बनाए रखा और शुरुआती मिनटों में लगातार आक्रामक फुटबॉल खेली। पहले 10 मिनट में उसके पास अधिकांश समय तक बॉल रही। हालांकि अर्जेंटीना की सघन रक्षापंक्ति ने कोई स्पष्ट मौका नहीं बनने दिया। लामिने यमाल ने शुरुआती प्रयास किया, लेकिन उनका शॉट डिफेंडर से टकराने के बाद गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज ने आसानी से रोक लिया। दूसरी ओर अर्जेंटीना ने धीरे-धीरे मुकाबले में वापसी की और शारीरिक खेल के दम पर स्पेन की लय बिगाड़ने की कोशिश की। दोनों टीमों के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिला। लेकिन पहले हाफ में कोई भी गोल नहीं हो सका।

मार्टिनेज चोटिल, मेसी रहे बेअसर

पहले हाफ के 41वें मिनट में अर्जेंटीना के डिफेंडर लिसांद्रो मार्टिनेज को स्पेन के काउंटर अटैक को रोकने के प्रयास में ओयारजाबल पर फाउल करने के कारण मुकाबले का पहला येलो कार्ड मिला। कुछ ही देर बाद चोट के कारण उन्हें मैदान छोड़ना पड़ा और उनकी जगह अनुभवी निकोलस ओटामेंडी उतरे। इस दौरान स्पेन का गेंद पर लगभग 63 प्रतिशत नियंत्रण रहा। लेकिन वह गोल नहीं कर सकी। अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी भी पहले हाफ में प्रभाव नहीं छोड़ सके और स्पेनिश डिफेंस ने उन्हें पूरे समय नियंत्रण में रखा।

अर्जेंटीना 10 खिलाड़ियों तक सिमटी

हाफ टाइम के बाद अर्जेंटीना ने निको गोंजालेज की जगह लिएंड्रो परेडेस को उतारा। 50वें मिनट में खिलाड़ियों के बीच तीखी बहस हुई। इसके बाद परेडेस को येलो कार्ड मिला। स्पेन ने भी मिकेल ओयारजाबल और फैबियन रुइज की जगह फेरान टोरेस तथा पेड्री को मैदान में भेजा। मुकाबला लगातार तेज होता गया और दोनों टीमों ने गोल के लिए कई प्रयास किए। निर्धारित समय के आखिरी क्षणों में एंजो फर्नांडीज को दूसरा येलो कार्ड मिलने पर रेड कार्ड दिखाया गया। इसके बाद अर्जेंटीना इंजरी टाइम से ही 10 खिलाड़ियों के साथ खेलने को मजबूर हो गई।

टोरेस ने दिलाई ऐतिहासिक जीत

एक्स्ट्रा टाइम में स्पेन को शुरुआत में गोल जरूर मिला, लेकिन रेफरी ने मिकेल मेरिनो के फाउल के कारण उसे मान्यता नहीं दी। इसके बाद मुकाबले के 106वें मिनट में फेरान टोरेस ने शानदार गोल कर स्पेन को 1-0 की बढ़त दिला दी। यह विश्व कप में उनका तीसरा गोल था और स्पेन का मैच में 20वां गोल प्रयास सफल साबित हुआ। 113वें मिनट में टोरेस ने एक बार फिर गेंद जाल में पहुंचाई, लेकिन ऑफसाइड होने के कारण यह गोल रद्द कर दिया गया। शेष समय में अर्जेंटीना वापसी नहीं कर सकी और अंतिम सीटी बजते ही स्पेन विश्व फुटबॉल का चैंपियन बन गया।

स्पेन ने रचा इतिहास

इस जीत के साथ स्पेन ने विश्व कप इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया। टीम ने विश्व खिताब अपने नाम किया और 1966 के फाइनल में अर्जेंटीना से मिली हार का हिसाब भी बराबर कर लिया। वहीं, अर्जेंटीना की हार के साथ लियोनेल मेसी का लगातार दूसरी बार विश्व कप ट्रॉफी उठाने का सपना अधूरा रह गया। स्पेन ने पूरे मुकाबले में बेहतर नियंत्रण, अनुशासित रक्षा और निर्णायक क्षणों का फायदा उठाते हुए विश्व फुटबॉल का सबसे बड़ा खिताब अपने नाम कर लिया।

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