केंद्र सरकार की ‘भव्य’ योजना लॉन्च: देशभर में बनेंगे 100 आधुनिक इंडस्ट्रियल पार्क, 33,660 करोड़ का बड़ा निवेश

देश में मैन्युफैक्चरिंग और औद्योगिक निवेश को नई रफ्तार देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने महत्वाकांक्षी ‘भव्य’ यानी भारत औद्योगिक विकास योजना की शुरुआत कर दी है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस योजना के दिशा-निर्देश जारी करते हुए बताया कि इसके तहत देशभर में 100 अत्याधुनिक इंडस्ट्रियल पार्क विकसित किए जाएंगे। योजना के लिए केंद्र सरकार ने 33,660 करोड़ रुपये का विशाल वित्तीय परिव्यय मंजूर किया है। सरकार का लक्ष्य इन पार्कों को ‘प्लग-एंड-प्ले’ मॉडल पर विकसित करना है, ताकि निवेशकों और उद्योगों को पहले से तैयार बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराया जा सके और वे बिना देरी के उत्पादन शुरू कर सकें।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि केंद्रीय कैबिनेट ने लगभग दो महीने पहले इस योजना को मंजूरी दी थी। अब अगले चार महीनों में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे। पहले चरण में 20 इंडस्ट्रियल पार्कों के प्रस्ताव लिए जाएंगे, जबकि दूसरे चरण में 30 अतिरिक्त पार्कों को शामिल किया जाएगा। शेष 50 पार्कों को बाद के चरणों में विकसित करने की योजना है। सरकार को उम्मीद है कि राज्यों की सक्रिय भागीदारी से देशभर में औद्योगिक गतिविधियों को तेजी मिलेगी और भारत वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करेगा।
‘प्लग-एंड-प्ले’ मॉडल से उद्योगों को मिलेगा सीधा फायदा
सरकार की इस योजना की सबसे बड़ी खासियत इसका ‘प्लग-एंड-प्ले’ मॉडल है। इसके तहत कंपनियों को अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इंडस्ट्रियल पार्कों में पहले से तैयार सड़कें, बिजली, पानी, ड्रेनेज सिस्टम, वेयरहाउस, टेस्टिंग लैब्स और श्रमिकों के लिए आवास जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। कंपनियों को केवल अपनी मशीनें स्थापित कर उत्पादन शुरू करना होगा। सरकार का मानना है कि इससे ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को मजबूती मिलेगी और घरेलू व विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। योजना के तहत 100 से 1000 एकड़ तक के इंडस्ट्रियल पार्क विकसित किए जाएंगे। पहाड़ी राज्यों के लिए न्यूनतम सीमा 25 एकड़ रखी गई है। इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण के लिए केंद्र सरकार प्रति एकड़ 1 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता देगी। इसके अलावा बाहरी कनेक्टिविटी और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को बेहतर बनाने के लिए प्रोजेक्ट लागत का 25 प्रतिशत तक अतिरिक्त समर्थन भी दिया जाएगा।
राज्यों और निजी क्षेत्र की साझेदारी पर जोर
यह योजना नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NICDC) के माध्यम से लागू की जाएगी। इसका विकास नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत राज्यों और निजी क्षेत्र के सहयोग से किया जाएगा। केंद्र सरकार ने राज्यों को सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम विकसित करने, स्पेशल पर्पज व्हीकल्स गठित करने और तेजी से मंजूरियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। राजस्थान, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और हरियाणा जैसे राज्यों ने इस योजना में शुरुआती रुचि दिखाई है। सरकार का कहना है कि जिन राज्यों में भूमि, पानी, बिजली और लॉजिस्टिक्स जैसी सुविधाएं बेहतर होंगी, वहां निवेश आकर्षित होने की संभावना अधिक रहेगी। निजी कंपनियों के साथ साझेदारी में तैयार प्रस्तावों के लिए भी केंद्र सरकार 50 लाख रुपये प्रति एकड़ तक सहायता देगी।
रोजगार और सप्लाई चेन को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
सरकार को उम्मीद है कि यह योजना देश में क्लस्टर-बेस्ड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट को नई दिशा देगी। एक ही क्षेत्र में मैन्युफैक्चरर्स, सप्लायर्स और सर्विस प्रोवाइडर्स के आने से घरेलू सप्लाई चेन मजबूत होगी और उत्पादन लागत में कमी आएगी। इसके साथ ही लाखों नए रोजगार अवसर भी पैदा होने की संभावना है। यह पूरी परियोजना पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान के अनुरूप विकसित की जाएगी, जिसमें मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, ग्रीन एनर्जी और सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
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