समृद्धि का प्रतीक अक्षय तृतीया: 19 अप्रैल को मनाया जाएगा पर्व, शुभ कार्यों के लिए खास दिन

निवेदिता चंद|18 अप्रैल 2026
19 अप्रैल को मनाया जाएगा पर्व, शुभ कार्यों के लिए खास दिन

हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया का विशेष महत्व है। यह पर्व वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है और इसे वर्ष के सबसे शुभ दिनों में गिना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए शुभ कार्य कभी समाप्त नहीं होते, इसलिए इसे ‘अक्षय’ कहा जाता है। जिसका अर्थ है- जिसका कभी क्षय न हो। इस वर्ष अक्षय तृतीया 19 अप्रैल को उदया तिथि में मनाई जाएगी। सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त सुबह 10:49 बजे से अगले दिन सुबह 6:14 बजे तक रहेगा।

अक्षय तृतीया हिंदू और जैन धर्म का अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहार है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन सतयुग और त्रेतायुग का आरंभ हुआ था। साथ ही भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का जन्म भी इसी तिथि को हुआ माना जाता है। महाभारत काल में इसी दिन पांडवों को अक्षय पात्र प्राप्त हुआ था जिससे उनके भोजन की कभी कमी नहीं हुई।

दान-पुण्य और पूजा का विशेष महत्व

इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। लोग जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, जल और धन का दान करते हैं। मान्यता है कि इस दिन किया गया दान कई गुना फल देता है और कभी नष्ट नहीं होता। भक्तजन भगवान विष्णु और भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं जिससे घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।

खरीदारी की परंपरा, बाजारों में बढ़ती रौनक

अक्षय तृतीया पर सोना-चांदी खरीदने की परंपरा भी काफी प्रचलित है। इस दिन बड़ी संख्या में महिलाएं और परिवार सर्राफा बाजारों में खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। लोगों का विश्वास है कि इस दिन खरीदी गई संपत्ति या आभूषण घर में समृद्धि लाते हैं। इस वर्ष सोने-चांदी के साथ-साथ पीतल के बर्तन, धनिया और हल्दी खरीदना भी शुभ माना जा रहा है।

नए कार्यों की शुरुआत के लिए शुभ अवसर

अक्षय तृतीया को नए कार्यों की शुरुआत, गृह प्रवेश, विवाह और निवेश जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए भी अत्यंत शुभ माना जाता है। यही कारण है कि इस दिन बाजारों में खास रौनक देखने को मिलती है और व्यापारियों के लिए भी यह पर्व आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देता है।

धार्मिक आस्था के साथ आर्थिक महत्व भी

यह पर्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है बल्कि समाज और व्यापार दोनों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मंदिरों में पूजा-अर्चना और बाजारों में खरीदारी के कारण पूरे वातावरण में उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। अक्षय तृतीया लोगों के जीवन में सुख, समृद्धि और नई शुरुआत का संदेश लेकर आती है।

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