शाकाहारियों में बढ़ रहा बी12 और विटामिन डी की कमी का खतरा: थकान-कमजोरी के पीछे छिपी बड़ी वजह, लाइफस्टाइल बदलाव से बढ़ी समस्या

आजकल बिना किसी गंभीर बीमारी के भी लोगों में थकान, कमजोरी और बॉडी पेन की शिकायत तेजी से बढ़ रही है। लोग इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन एक्सपर्ट्स के मुताबिक इसके पीछे एक बड़ी वजह विटामिन डी और विटामिन बी12 की कमी हो सकती है। बदलती लाइफस्टाइल इसका मुख्य कारण है। लोग धूप में कम समय बिताते हैं। खानपान भी बैलेंस नहीं है। खासकर शाकाहारी लोगों में विटामिन बी12 की कमी ज्यादा देखने को मिल रही है। यह धीरे-धीरे शरीर को कमजोर बनाती है। अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो यह गंभीर रूप भी ले सकती है।
विटामिन बी12 मुख्य रूप से नॉन-वेज फूड में पाया जाता है। जैसे मांस, मछली और अंडा। इसलिए जो लोग शुद्ध शाकाहारी हैं, उनमें इसकी कमी आम होती है। हालांकि डेयरी प्रोडक्ट्स से इसकी कुछ मात्रा पूरी की जा सकती है। दूध, दही, पनीर और चीज अच्छे सोर्स माने जाते हैं। अगर कोई अंडा खाता है तो उसे डाइट में शामिल करना फायदेमंद रहता है। लेकिन कई बार सिर्फ डाइट से जरूरत पूरी नहीं हो पाती। खासकर तब जब शरीर पोषक तत्वों को सही से एब्जॉर्ब नहीं कर पाता। ऐसे मामलों में डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लेना जरूरी हो जाता है। बिना सलाह के सप्लीमेंट लेना नुकसान भी पहुंचा सकता है।
विटामिन डी के लिए धूप सबसे जरूरी
विटामिन डी की कमी आज के समय में बहुत आम हो गई है। इसका सबसे बड़ा कारण है धूप से दूरी। लोग ज्यादा समय घर या ऑफिस में बिताते हैं। ऐसे में शरीर को पर्याप्त धूप नहीं मिल पाती। विटामिन डी का सबसे अच्छा और नेचुरल सोर्स सूरज की रोशनी है। रोज सुबह या शाम 15 से 20 मिनट धूप लेना जरूरी है। इससे शरीर में विटामिन डी का स्तर बना रहता है। अगर कमी ज्यादा हो जाए तो डॉक्टर सप्लीमेंट दे सकते हैं। लेकिन हाई-डोज लेने से बचना चाहिए।
ये हैं कमी के मुख्य लक्षण
विटामिन डी की कमी होने पर शरीर में कई बदलाव दिखते हैं। लगातार थकान रहती है। मूड खराब रहता है। मांसपेशियों में दर्द और कमजोरी महसूस होती है। गंभीर स्थिति में हड्डियां भी कमजोर हो सकती हैं। वहीं विटामिन बी12 की कमी में अलग तरह के लक्षण दिखते हैं। व्यक्ति को कमजोरी महसूस होती है। ध्यान लगाने में दिक्कत होती है। हाथ-पैर में झनझनाहट या सुन्नपन हो सकता है। कुछ मामलों में बैलेंस बिगड़ने की समस्या भी सामने आती है। अगर ये लक्षण लगातार बने रहें, तो तुरंत जांच करानी चाहिए। देरी करने से स्थिति और बिगड़ सकती है।
कब जरूरी हो जाता है सप्लीमेंट लेना
अगर खून की जांच में विटामिन डी या बी12 की कमी सामने आती है, तो सिर्फ डाइट से काम नहीं चलता। ऐसे में डॉक्टर सप्लीमेंट या इंजेक्शन की सलाह देते हैं। खासकर जब शरीर पोषक तत्वों को एब्जॉर्ब नहीं कर पा रहा हो। विटामिन डी का स्तर अगर 12 एनजी/एमएल से कम हो जाए, तो इसे डेफिशिएंसी माना जाता है। 20 से 50 एनजी/एमएल के बीच स्तर सामान्य माना जाता है। वहीं 50 से ज्यादा होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के इसे बढ़ाने की जरूरत नहीं होती। विटामिन बी12 के मामले में 200 एनजी/एमएल से कम स्तर खतरनाक माना जाता है। 200 से 300 के बीच होने पर अतिरिक्त जांच की जरूरत होती है। 300 से ऊपर का स्तर सामान्य माना जाता है।
संतुलित डाइट और सही रूटीन ही समाधान
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस समस्या से बचने का सबसे आसान तरीका है संतुलित डाइट और सही रूटीन। रोजाना दूध, दही और पनीर को डाइट में शामिल करें। अगर संभव हो तो फोर्टिफाइड फूड्स भी लें। साथ ही रोज थोड़ी देर धूप में जरूर बैठें। फिजिकल एक्टिविटी बढ़ाएं। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेकर सही समय पर सप्लीमेंट लें।
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