सहजन के सेवन के हैं कई फायदे: सुपरफूड की तरफ बढ़ता भारत, सेहत के साथ किसानों को भी फायदा

निवेदिता चंद|16 अप्रैल 2026
सुपरफूड की तरफ बढ़ता भारत, सेहत के साथ किसानों को भी फायदा

बदलती जीवनशैली और बढ़ती स्वास्थ्य जागरूकता के बीच मोरिंगा तेजी से लोगों की थाली में जगह बना रहा है। आमतौर पर इसे 'सहजन' भी कहा जाता है। भारत के गांवों में इसकी महत्ता सदियों से रही है और इसे आयुर्वेदिक चमत्कारी पौधा माना जाता है। वहीं, अब आधुनिक पोषण विज्ञान भी इसके फायदों को मान्यता दे रहा है। इसके पत्ते, फलियां और बीज तीनों ही पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने का कार्य करते हैं।

मार्च से अप्रैल के महीने में मिलने वाले सहजन की डिमांड काफी बढ़ गई है। इसके अंदर भरपूर पोषण और विटामिन भारी मात्रा में पाए जाते हैं, जिस वजह से यह आजकल बच्चों से लेकर युवाओं तक के बीच लोकप्रिय हो रहा है। इसके अनेक फायदों की वजह से डॉक्टर भी इसे खाने की सलाह देते हैं। साथ ही, यह इम्यूनिटी का सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है। यही कारण है कि युवाओं में सहजन को थाली में परोसने की आदत बढ़ गई है। मोरिंगा को सिर्फ सब्जी ही नहीं, बल्कि सूप, थेपला, रायता और कई अन्य डिशेज के साथ डाइट में शामिल किया जा सकता है।

क्या है खास इस मोरिंगा में

मोरिंगा के पत्ते, फलियां और बीज तीनों में ही पोषक तत्वों का भंडार होता है, जो हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने के साथ स्वस्थ रखने का कार्य करते हैं। इसमें विटामिन सी, ए और ई का भरपूर समावेश होता है जो शरीर को सुरक्षित रखने का कार्य करता है। साथ ही, इसमें कैल्शियम और आयरन भी पाया जाता है, जो रक्त को साफ रखने में मदद करता है। इसमें मौजूद प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) बढ़ाने में सहायक हैं।

स्वास्थ्य के लिए लाभदायक

डॉक्टरों का कहना है कि मोरिंगा के नियमित सेवन से हमारा इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और ब्लड शुगर कंट्रोल में रहता है। रोजाना इसे अपने आहार में शामिल करने से त्वचा और बाल दोनों की खूबसूरती बढ़ती है, जिससे आप लंबे समय तक युवा और आकर्षक दिख सकते हैं।

किसानों के लिए फायदेमंद

सहजन की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही है। किसान गांवों से सहजन ले जाकर शहरों में बेच रहे हैं। इसकी खेती बहुत कम लागत में तैयार हो जाती है और मुनाफा अधिक देती है। इसकी एक टहनी को काटकर ऊपर से गोबर और कपड़े की मदद से ढक दिया जाता है, जिसके बाद इसमें नए पत्ते निकलने लगते हैं। एक बार लगाया गया यह पेड़ कब बड़ा हो जाता है, पता ही नहीं चलता और कई वर्षों तक फलियां देता रहता है।

विटामिन ए, सी और ई का भंडार

मोरिंगा में विटामिन सी, ए और ई प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो बॉडी में 'इम्यूनिटी बूस्टर' का काम करता है। इसके सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूती मिलती है और हम ऊर्जावान महसूस करते हैं।

कैसे करें सेवन?

इसका सेवन करने के लिए इसकी फलियों का साग या सब्जी के रूप में प्रयोग करें। इसके पत्तों को सुखाकर और पीसकर चूर्ण बना लें, फिर उसे पानी में घोलकर इस्तेमाल करें। इसके अलावा इसका सूप या स्मूदी बनाकर भी सेवन किया जा सकता है।

नव्य जागरण

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