त्वचा पर काले धब्बे दिखें तो हो जाएं सतर्क: प्री-डायबिटीज का साइलेंट खतरा, लक्षण अक्सर नजरअंदाज

निवेदिता चंद|03 मई 2026
प्री-डायबिटीज का साइलेंट खतरा, लक्षण अक्सर नजरअंदाज

आज की भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल और गलत खानपान ने बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ा दिया है। खासकर डायबिटीज जैसी क्रॉनिक बीमारी अब तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठनों के मुताबिक, दुनियाभर में लाखों लोग प्री-डायबिटीज से जूझ रहे हैं, लेकिन उनमें से ज्यादातर को इसका पता ही नहीं होता। समस्या यह है कि प्री-डायबिटीज के लक्षण बहुत साफ नहीं होते। लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। यही लापरवाही आगे चलकर टाइप-टू डायबिटीज का रूप ले सकती है। ऐसे में शरीर के छोटे-छोटे संकेतों को समझना बेहद जरूरी हो जाता है।

अगर आपकी गर्दन, बगल या जांघों के आसपास काले और मोटे धब्बे दिख रहे हैं, तो इसे सिर्फ स्किन प्रॉब्लम समझकर अनदेखा न करें। ये शरीर के अंदर हो रहे मेटाबॉलिक बदलाव का संकेत हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे धब्बे कई बार प्री-डायबिटीज या डायबिटीज के शुरुआती संकेत होते हैं। इन धब्बों को मेडिकल भाषा में एकैंथोसिस नाइग्रिकन्स कहा जाता है। यह स्थिति तब बनती है जब शरीर में इंसुलिन का स्तर असंतुलित हो जाता है। ऐसे में त्वचा की कोशिकाएं तेजी से बढ़ने लगती हैं और गहरे रंग के पैच बन जाते हैं।

इंसुलिन रेजिस्टेंस से जुड़ा है यह संकेत

स्टडीज के अनुसार, त्वचा पर ऐसे धब्बे इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत हो सकते हैं। इसका मतलब है कि शरीर इंसुलिन का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पा रहा। जब ऐसा होता है, तो शरीर ज्यादा इंसुलिन बनाता है। यही अतिरिक्त इंसुलिन त्वचा पर असर डालता है। इससे त्वचा मोटी और डार्क होने लगती है। यह स्थिति अगर समय रहते कंट्रोल नहीं की गई, तो आगे चलकर टाइप-टू डायबिटीज का खतरा काफी बढ़ जाता है।

इन लक्षणों को भी न करें नजरअंदाज

त्वचा पर काले धब्बों के अलावा कुछ और संकेत भी होते हैं, जिन्हें गंभीरता से लेना चाहिए। जैसे- बार-बार प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, जल्दी थक जाना और वजन में बदलाव। अगर ये लक्षण लगातार दिख रहे हैं, तो तुरंत जांच कराना जरूरी है। समय पर पहचान ही इस बीमारी को कंट्रोल करने का सबसे आसान तरीका है।

खानपान और लाइफस्टाइल में बदलाव है सबसे बड़ा बचाव

डायबिटीज से बचने के लिए सबसे जरूरी है सही लाइफस्टाइल अपनाना। अपने आहार में फाइबर, प्रोटीन और लो-ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाली चीजों को शामिल करें। ज्यादा मीठा, जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाना बेहद जरूरी है। साथ ही रोजाना 30 से 45 मिनट तक एक्सरसाइज करना भी जरूरी है। योग, वॉक या रनिंग से शरीर की इंसुलिन सेंसिटिविटी बेहतर होती है।

नियमित जांच से मिल सकता है समय रहते अलर्ट

स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि समय-समय पर ब्लड शुगर टेस्ट जरूर कराएं। खासकर एचबीएवनसी टेस्ट करवाना बेहद जरूरी है, जिससे पिछले कुछ महीनों का शुगर लेवल पता चलता है। अगर शुरुआत में ही समस्या पकड़ में आ जाए, तो इसे कंट्रोल करना आसान होता है।

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